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Question
“कनक शस्य कमलधरे”
उपर्युक्त पंक्ति में ‘कनक शस्य’ का अर्थ है- कनक के समान शस्य (सोने जैसी फसलें) और कमलधरे का अर्थ है- हे कमल को धारण करने वाली! ये शब्द समास शब्द कहलाते हैं। ‘कनक शस्य’ और ‘कमलधरे’ समस्त पद/सामासिक पद हैं। कमलधरे संबोधन शब्द है।
समास का अर्थ है- संक्षेप। समास में दो या अनेक शब्दों के मेल से एक नए शब्द की रचना होती है। समास-रचना में प्रायः दो पद (शब्द) होते हैं। पहले पद को पूर्वपद और दूसरे पद को उत्तरपद कहते हैं। समास रचना से बने शब्द को ‘समस्त पद’ कहते हैं। यदि समास रचना से बने शब्द (समस्त पद) के अंग अलग-अलग करने हों, तो उस प्रक्रिया को समास विग्रह कहते हैं। आपने ‘क्या लिखूँ?’ निबंध के अभ्यास में समास और सामासिक पदों के बारे में विस्तार से जाना है।
कविता में से चुनकर कुछ सामासिक पद (शब्द) नीचे दिए गए हैं। उनके समास-विग्रह अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
शतदल, ज्योतिर्जल, शतमुख, सागरजल
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Solution
- शतदल
समास विग्रह: शत (सौ) दलों (पंखुड़ियों) वाला कमल - ज्योतिर्जल
समास विग्रह: ज्योति से युक्त जल/प्रकाशमय जल - शतमुख
समास विग्रह: शत (सौ) मुखों (रूपों/स्वरों) वाला - सागरजल
समास विग्रह: सागर का जल
