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Question
'सही खाना' न मिले तो बच्चों को क्या-क्या परेशानी हो सकती है?
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Solution
सही खाना न मिलने पर बच्चे कमजोर और बीमार हो जाते हैं।
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अलग-अलग स्वाद की कुछ चीज़ें इकट्ठी करो और अपने साथी के साथ झूलन और झुम्पा की तरह खेल खेलो। अपने साथी को चीज़ें चखाओ और पूछो -
कुछ खाने की चीज़ों को मुँह के किसी और हिस्से पर रखो-होंठ, तालू, जीभ के नीचे। क्या कहीं और भी स्वाद का पता चला?
चबाकर या चबा-चबाकर खाओ - दोनों में अंतर बताओ।
सब मिलकर कक्षा में यह गतिविधि करो। ब्रेड या रोटी का टुकड़ा या पके हुए चावल लो।
- पहले रोटी का टुकड़ा या कुछ चावल मुँह में डालो और तीन-चार बार चबाकर निगल जाओ।
- क्या चबाने से स्वाद में बदलाव आया?
- अब रोटी का टुकड़ा या कुछ चावल मुँह में डालो और 30-32 बार चबाओ।
- क्या देर तक चबाने से स्वाद में बदलाव आया?
घर में लोग तुम्हें कहते होंगे, "खाना धीरे-धीरे खाओ, ठीक से चबाओ, खाना अच्छे से पचेगा"। सोचो, वे ऐसा क्यों कहते होंगे?
स्वाद बताने के लिए कुछ शब्द ढूँढ़ो और खुद से सोचकर बनाओ।
कुछ चीज़ों चखने के बाद झुम्पा बोली 'सी-सी-सी'।
सोचो, उसने क्या खाया होगा?
तुम्हें याद होगा कि तुमने चौथी कक्षा में नमक-चीनी का घोल बनाया था। नीतू के पिताजी ने भी उसे यही घोल दिया। सोचो, उल्टी-दस्त होने पर यह घोल क्यों देते होंगे?
क्या तुमने कभी 'ग्लूकोज़' शब्द सुना है या लिखा हुआ देखा है? कहाँ?
चित्र देखकर बताओ, नीतू को ग्लूकोज़ कैसे चढ़ाया गया?
तुम्हारे हिसाब से रश्मि और कैलाश का खाना ठीक क्यों नहीं है? लिखो।
दादा-दादी से पूछो कि जब वे तुम्हारी उम्र के थे तब वे एक दिन में क्या-क्या काम करते थे? क्या खाते थे और कितना?
अब तुम अपना सोचो, तुम जो खाते हो और जो काम करते हो।
क्या आपके द्वारा की गई चीज़ें/बातें बड़ों जैसी हैं या उनसे अलग?
अगर ऐसा कहा जाए - 'हमारा मुँह ही पचाना शुरू कर देता है' - तो तुम कैसे समझाओगे? लिखो।
