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Question
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में दीजिए। उत्तर यथासंभव आपके अपने शब्दों में होने चाहिए:-
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रामू एक किसान था। वह अपने खेतों में दिन-रात कठोर परिश्रम करता। इस बार उसकी मेहनत और ईश्वर की कृपा से उसके खेतों में इतना अनाज उगा कि जिसकी आमदनी से उसकी वर्षों की गरीबी मिट गई। बारिश के मौसम में उसकी फूस की छत से पानी बहकर घर में टपकता जिससे घर की मिट्टी की दीवारें भी नमी से गल जाती थीं और उसका घर गिर जाया करता था। इस बार हुए धन-लाभ से उसने अपने कच्चे घर की जगह एक नया और पक्का घर बनाने का निश्चय किया। रामू ने घर बनाने के लिए सारा सामान मँगा लिया था। बस आँगन में खड़े नीम के पेड़ को काटना शेष रह गया था, जिसके कारण घर की नींव खोदना मुश्किल हो रहा था। उसने पेड़ काटने के लिए कुल्हाड़ी लाने अपने बेटे को पड़ोस में भेजा और स्वयं थोड़ी देर आराम करने के लिए पेड़ की छाया में लेट गया। थकान के कारण लेटते ही उसकी आँखें लग गईं और वह सपनों की दुनिया में पहुँच गया। उसने देखा - उसके दादाजी एक नन्हा-सा पौधा लगा रहे हैं और उसके पिताजी पास खड़े उनकी सहायता कर रहे हैं। एक छोटा-सा बालक उन दोनों के साथ उत्साह और खुशी से घूम रहा है। यह छोटा बालक रामू ही था और वह भी उन दोनों के साथ उस पेड़ की बहुत देखभाल किया करता था। दिनोंदिन वह पेड़ बड़ा होता गया और उसके तने व टहनियों के आसपास खेलता हुआ रामू भी बड़ा होने लगा। दादाजी तो गुजर गए थे, परंतु उस पेड़ की गोद में उसे दादाजी की गोद में होने का अहसास होता था। उसे लगा मानो वे दोनों उससे पूछ रहे हैं - “रामू, क्या तुम भूल गए यह पेड़ केवल पेड़ नहीं, हमारे घर का एक सदस्य है, इसने कितनी ही धूप और बरसातों में हमारी रक्षा की है। इसकी डालों पर तुमने कई सावन झूलें झूले हैं। इसकी प्राणवायु से हमारे घर के चारों ओर, दूर तक के दायों में शुद्धता, शीतलता और स्वस्थता विद्यमान रहती है। रोग हमारे घर के सदस्यों को छू भी नहीं पाता। इसकी दातुन, निबोरियाँ और पत्तियाँ हमारे लिए कितनी उपयोगी हैं! प्रचंड गर्मियों की दोपहर में घर के सारे सदस्य इसके नीचे आकार ही चैन पाते हैं। पथिक इसकी छाया में विश्राम करते और हम सभी को आशीर्वाद देकर जाते। मोर, कोयल, तोते और भी न जाने कितने ही पक्षियों और जीवों के लिए यह पेड़ उनका आश्रय-स्थान है। अकाल के समय अपनी सूखी लकड़ियों को देकर इसने तुम्हारे पिता के बड़े भाई के समान घर चलाने में सहायता की थी। इसने कभी तुमसे कुछ नहीं माँगा। हम सभी इसके कृतज्ञ हैं। आज तुम इसे काटकर सैकड़ों पशु-पक्षियों और जीवों को गृह-हीन क्यों करना चाहते हो। क्या इसकी हत्या करने के, इसे काटने के पाप को करने के बाद तुम अपने नए घर में शांति से जी पाओगे ?” रामू की आँखों से आँसू निकल पड़े, तभी उसके बेटे की आवाज़ आई - “बाबा लो, मैं कुल्हाड़ी ले आया।” रामू की आँखें मानो खुल गई थीं। अपनी अश्रूपूरित आँखों से वह पेड़ के तने से लिपटकर क्षमा-याचना करने लगा। अपनी कोमल शाखाओं से नीम ने भी उसे अपने गले लगाकर माफ़ कर दिया। रामू ने नीम के पेड़ से एक हाथ की दूरी पर अपने नए मकान की नींव खोदकर अपना नया घर बनाया। नीम की शीतल छाया उसके घर पर सदैव एक बुजुर्ग के आशीर्वाद के समान बनी रही। |
- रामू कौन था? यह वर्ष उसके लिए लाभकारी कैसे रहा? [2]
- प्रतिवर्ष वह किस समस्या से परेशान रहता था ? उसके हल के लिए उसने क्या निश्चय किया? [2]
- नीम का पेड़ कहाँ था? रामू उसे क्यों काटना चाहता था? [2]
- रामू के आँखों में आँसू क्यों आ गए थे? समझाइए। [2]
- प्रस्तुत गद्यांश से आपको क्या सीख मिली ? वर्तमान समय में यह सीख कैसे उपयोगी है? [2]
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Solution
- रामू एक परिश्रमी किसान था। यह वर्ष उसके लिए बहुत लाभकारी रहा क्योंकि उसकी कड़ी मेहनत और ईश्वर की कृपा से उसके खेतों में इतना अनाज पैदा हुआ कि उसकी वर्षों की गरीबी दूर हो गई।
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प्रतिवर्ष बारिश के मौसम में रामू की फूस की छत से पानी टपकता था, जिससे उसके घर की मिट्टी की दीवारें नमी से गलकर गिर जाती थीं। इस समस्या के स्थायी हल के लिए उसने अपने कच्चे घर की जगह एक नया और पक्का घर बनाने का निश्चय किया।
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नीम का पेड़ रामू के घर के आँगन में स्थित था। रामू उसे इसलिए काटना चाहता था क्योंकि उस पेड़ के कारण नए घर की नींव खोदना बहुत मुश्किल हो रहा था।
- सपने में रामू को अहसास हुआ कि वह नीम का पेड़ कोई साधारण पेड़ नहीं, बल्कि उसके परिवार के एक सदस्य जैसा है जिसे उसके दादा और पिता ने प्रेम से सींचा था। जब उसने पेड़ के उपकारों और निस्वार्थ प्रेम के बारे में सोचा, तो उसे अपनी कृतघ्नता (पेड़ काटने के विचार) पर गहरा पछतावा हुआ और उसकी आँखों में आँसू आ गए।
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इस गद्यांश से हमें यह सीख मिलती है कि पेड़ हमारे जीवन के रक्षक और सच्चे मित्र हैं, हमें उन्हें कभी नहीं काटना चाहिए। वर्तमान समय में जहाँ ग्लोबल वॉर्मिंग और प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएँ बढ़ रही हैं, वहाँ यह सीख अत्यंत उपयोगी है क्योंकि पेड़ों को बचाकर ही हम पर्यावरण को संतुलित रख सकते हैं और आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ जीवन दे सकते हैं।
