Advertisements
Advertisements
Question
प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
प्रसादेन संस्कृतस्य अध्ययनं शालायां कृतम्।
Advertisements
Solution
प्रसादेन संस्कृतस्य अध्ययनं कुत्र कृतम्?
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
योग्यं पर्यायं चिनुत ।
त्वं धनुः ______।
सूचनानुसारं कृतीः कुरुत।
भूमातुः उपदेशं मनसि निधाय पृथुवैन्यः कृषिकार्यम् अकरोत्। (‘भूमातुः’ स्थाने ‘भूमि’ शब्दस्य योग्यं रूपं लिखत।)
पूर्वपदं लिखत।
वातेनोदरम् = ______ + उदरम्।
सूचनानुसारं कृती: कुरुत।
वयम् आनन्देन एकत्र निवसामः। (लट्लकारस्थाने लङ्लकारं योजयत।)
सन्धिविग्रहं कुरुत।
आत्मनो मुखदोषेण
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| विद्याविहीनः | ...... | ...... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| प्रयागक्षेत्रम् | ...... | ...... |
सूचनानुसारं कृती: कुरुत।
त्वं किम् इच्छसि? (‘त्वम्’ इत्यस्य स्थाने ‘भवान्’ इति योजयत।)
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| राजसद्म | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| भक्तिरसार्णवः | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| परमाणुः | ..... | ..... |
तालिकां पूरयत।
| धातवः | अर्थः | लकारः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| दा (३ उ.) | यच्छति | लट् | ______ | ददाते | ददते |
तालिकां पूरयत।
| धातवः | अर्थः | लकारः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| ग्रह (९ उ.) | स्वीकरोति | लट् | गृह्णामि | गृह्णीवः | ______ |
सन्धिविग्रहं कुरुत।
वाचनेनैव
प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
महिला मयि पाषाणखण्डान् अक्षिपत्।
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| सद्गुणसम्पत्तिः | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| बालवीरचमूः | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| अनुत्तमानि | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| चिन्तामग्ना | ..... | ..... |
सूचनानुसारं कृती: कुरुत।
अम्भोदाः वसुधाम् आर्द्रयन्ति। (कर्तृपदम् एकवचने परिवर्तयत।)
सन्धिविग्रहं कुरुत।
याचको वा = ..... + वा।
धातुसाधित-विशेषण-तालिकां पूरयत।
| धातुः | क्त | क्तवतु | कृत्याः | शतृ/शानच् |
| रभ् (१ आ.प.) | रब्धः | ______ | ______ | रभमाणः |
धातुसाधित-विशेषण-तालिकां पूरयत।
| धातुः | क्त | क्तवतु | कृत्याः | शतृ/शानच् |
| लिख् (६ प. प.) | लिखितः | ______ | लेखितव्यः | ______ |
धातुसाधित-विशेषण-तालिकां पूरयत।
| धातुः | क्त | क्तवतु | कृत्याः | शतृ/ शानच् |
| सेव् (१ आ. प.) | सेवितः | सेवितवान् | ______ | ______ |
सन्धिविग्रहं कुरुत।
तृणैर्गुणत्वमापन्नैर्बध्यन्ते
पृष्ठतः ______ युवकाः गोष्ठिषु रताः।
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| पशुपतिः | ..... | ..... |
सर्वनामतालिकां पूरयत।
| ए.व. | द्विव. | ब.व. | विभक्तिः |
| ______ | ______ | युष्मान्/वः | द्वितीया |
सङ्ख्याः अङ्कैः लिखत।
षट्त्रिंशत्
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत।
८०
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत।
७२
लकारं लिखत।
तत्प्राप्तुं यतस्व। = ......
सङ्ख्याः अङ्कैः लिखत।
नव
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत।
७१
मञ्जूषातः नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
(मञ्जूषा - मम, राजा, सः, नदी, एतस्मिन्)
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत।
९०
मञ्जूषातः समानार्थकशब्दान् चित्वा लिखत।
कुसुमम् = ______।
