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प्राय: अभिभावक बच्चों को खेल-कूद में ज़्यादा रूचि लेने पर रोकते हैं और समय बरबाद न करने की नसीहत देते हैं बताइए − खेल आपके लिए क्यों ज़रूरी हैं ।

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Question

प्राय: अभिभावक बच्चों को खेल-कूद में ज़्यादा रूचि लेने पर रोकते हैं और समय बरबाद न करने की नसीहत देते हैं बताइए −

खेल आपके लिए क्यों ज़रूरी हैं?

One Line Answer
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Solution

खेल मनोरंजन के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहता है, बच्चे अनुशासित रहते हैं तथा प्रेम और सहयोग की भावना बढ़ती है। साथ ही साथ प्रतिस्पर्धा के गुण भी समझ में आते हैं। समूह में खेलने से सामाजिक भावना आती है।

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सपनों के-से दिन
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Chapter 2: सपनों के-से दिन - बोध-प्रश्न [Page 31]

APPEARS IN

NCERT Hindi Sanchayan Bhag 2 Class 10
Chapter 2 सपनों के-से दिन
बोध-प्रश्न | Q 11.1 | Page 31

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कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती−पाठ के किस अंश से यह सिद्ध होता हैं?


पीटी साहब की 'शाबाश' फ़ौज के तमगों-सी क्यों लगती थी। स्पष्ट कीजिए।


हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअतल कर दिया?


लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल खुशी से भागे जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?


लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुट्टियों में मिले काम को पूरा करने के लिए क्या-क्या योजनाएँ बनाया करता था और उसे पूरा न कर पाने की स्थिति में किसकी भाँति ‘बहादुर’ बनने की कल्पना किया करता था?


विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में अपने विचार प्रकट कीजिए।


‘बच्चों की यह स्वाभाविक विशेषता होती है कि खेल ही उन्हें सबसे अच्छा लगता है।’ सपनों के-से दिन नामक पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।


लेखक के बचपन में बच्चों के न पढ़ पाने के लिए अभिभावक अधिक जिम्मेदार थे। इससे आप कितना सहमत हैं?


गरमी की छुट्टियों के पहले और आखिरी दिनों में लेखक ने क्या अंतर बताया है?


पीटी मास्टर प्रीतमचंद को देखकर बच्चे क्यों डरते थे?


लेखक और उसके साथी प्रीतमचंद की दी गई सज़ा वाला कौन-सा दिन आजीवन नहीं भूल सके?
अथवा
फ़ारसी की कक्षा में मास्टर प्रीतमचंद ने किस तरह शारीरिक दंड दिया जो बच्चों को आजीवन याद रहा?


लेखक और उसके साथियों द्वारा गरमी की छुट्टियाँ बिताने का ढंग आजकल के बच्चों द्वारा बिताई जाने वाली छुट्टियों से किस तरह अलग होता था?


‘सपनों के-से दिन’ पाठ में हेडमास्टर शर्मा जी की, बच्चों को मारने-पीटने वाले अध्यापकों के प्रति क्या धारणा थी? जीवन-मूल्यों के संदर्भ में उसके औचित्य पर अपने विचार लिखिए।


‘सपनों के-से दिन’ पाठ के आधार पर बताइए कि बच्चों का खेलकूद में अधिक रुचि लेना अभिभावकों को अप्रिय क्यों लगता था? पढ़ाई के साथ खेलों का छात्र जीवन में क्या महत्त्व है और इससे किन जीवन-मूल्यों की प्रेरणा मिलती है?


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

“वर्तमान में विद्यालयों में बढ़ती हुई अनुशासनहीनता को देखते हुए मास्टर प्रीतमचंद जैसे अध्यापकों की आवश्यकता है।" इस कथन से सहमति या असहमति के संबंध में अपने तर्कसम्मत विचार लिखिए।


पूरक पाठ्य-पुस्तक पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:

'सपनों के-से दिन' पाठ में लेखक को बचपन में प्रकृति कैसी प्रतीत होती थी? उस समय लेखक फूलों के साथ कैसा व्यवहार करता था?


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