Advertisements
Advertisements
Question
पंचमीविभक्तियुक्तपदं उदाहरणानुसारं चिह्नितं कुरुत –
यथा- काष्ठात् अग्निः जायते मध्यमानात्।
विद्या ददाति विनय
विनयाद् याति पात्रताम्
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति
धनाद् धर्मः ततः सुखम्।
Advertisements
Solution
विद्या ददाति विनय
विनयाद् याति पात्रताम्
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति
धनाद् धर्मः ततः सुखम्।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
उदाहरणानुसारं सार्थक पदं लिखत –
| शा | खा | सु |
उदाहरणानुसारं लिखित –
| शब्द: | विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुचनम् |
| शाखा | द्वितीया | शाखाम् | शाखे | शाखाः |
| लता | ______ | ______ | ______ | ______ |
कर्मकारक द्वितीयाविभक्तिं च प्रयुज्य प्रदत्तम् उदाहरणम् अनुसृत्य पञ्च वाक्यानि लिखत।
उदाहरणाम् –
1. कौमुदी संस्कृतं पठति।
2. वत्सला आम्रं खादति।
उचितपदेन रिक्तस्थानानि पूरयत –
रङ्गशालायः शोभा ______ भवति।
अधोलिखितशब्दान् उदाहरणानुसारं लिखत –
| श्रमिकः | ||
| श्रमिकाय | श्रमिका | श्रमिकाभ्याम् |
| जन: | ||
| ______ | ______ | ______ |
अधोलिखितशब्दान् उदाहरणानुसारं लिखत –
| लता | ||
| लतायै | लताभ्याम् | लताभ्यः |
| शाखा | ||
| ______ | ______ | ______ |
अधोलिखितशब्दान् उदाहरणानुसारं लिखत –
| पत्त्रं | ||
| पत्राय | पत्रेभ्याम् | पत्रेभ्यः |
| फलम् | ||
| ______ | ______ | ______ |
अधोलिखितशब्दान् उदाहरणानुसारं लिखत –
| लता | ||
| लतायै | लताभ्याम् | लताभ्यः |
| रमा | ||
| ______ | ______ | ______ |
घटात् चतुर्थी-विभक्तियुक्तपदानि चित्वा उचितकोष्ठके लिखत –

| एकवचन | द्विवचनम | बहुवचनम |
| ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ |
| ______ | ______ | ______ |
| ______ | ||
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा लिखत –
कृषक : ______ सर्वत्र प्रसिद्धः अस्ति।
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा लिखत –
कुक्कुरः ______ इतस्ततः भ्रमति।
चतुर्थी-विभक्तियुक्तपदानि स्थूलरेखया चिह्नतानि कुरुत पृथक्तया लिखत च –
ज्ञानाय दानाय च रक्षणाय।
कोष्ठके प्रदत्तशब्दैः सह उचितविभक्तिं प्रयुज्य रिक्तस्थानानि पूरयत।
______ मा प्रमदः। (स्वाध्याय)
षष्ठीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते
आयुर्विद्या यशो बलम्।
| अभिवादनशीलस्य | वृद्धोपसेविनः |
| तस्य | |
षष्ठीविभक्तियुक्तपदानि चित्वा लिखत –
नरस्याभरणं रूपं रूपस्याभरणं गुण:।
गुणास्याभरणं ज्ञानं ज्ञानस्याभरणं क्षमा।।
| ______ | ______ | ______ | ______ |
उदाहरणानुसारं लिखत –
यथा-
| नर | ||
| नरस्य | नर्योः | नराणां |
| विद्या | ||
| ______ | ______ | ______ |
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा लिखत –
अद्य तु ______ अपि वृक्षाः न सन्ति।
कोष्ठकात् उचितं पदं चित्वा लिखत –
______ रक्षायाः विषये सचेताः भयेवुः।
अधिकरणकारकं सप्तमीविभक्तिं च उपयुज्य प्रदत्तम् उदाहरणाम् अनुसृत्य पञ्च वाक्यानि लिखत।
उदाहरणम् –
1. जले मत्स्याः सन्तरन्ति।
2. लतायां पुष्पाणि सन्ति
