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Question
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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सिष को ऐसा चाहिए, गुरु को सब कुछ देय। कबिरा संगत साधु की, ज्यों गंधी की बास। दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय। गुरु कुम्हार सिष कुंभ है, गढ़-गढ़ काढ़ै खोट। |
- निम्नलिखित विधानों को पढ़कर सत्य अथवा असत्य लिखिए: 2
- गुरुदक्षिणा के रूप में सर्वस्व लेने की मनोवृत्ति गुरु में होनी चाहिए।
- सज्जन व्यक्ति की संगति इत्र बेचने वाले की सुगंध की तरह होती है।
- कमजोर को सताना नहीं चाहिए।
- गुरु घड़े के समान होता है और शिष्य कुम्हार के समान होता है।
- उपयुक्त दोहों में से किसी एक दोहे की 25 से 30 शब्दों मैं सरल अर्थ लिखिए। 2
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Solution
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- असत्य
- सत्य
- सत्य
- असत्य
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दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय। बिना जीव की स्वाँस से, लोह भसम हवै जाय। - संत कबीर का कहना है कि कमजोर लोगों को कभी भी परेशान या सताना नहीं चाहिए, क्योंकि उनकी आह में बहुत शक्ति होती है। यदि उन्हें दुख दिया जाए तो उनकी बददुआ या आह बहुत हानिकारक साबित हो सकती है। इसे समझाने के लिए कबीर एक उदाहरण देते हैं कि लोहार की धौंकनी मरे हुए जानवर की खाल से बनी निर्जीव वस्तु होती है, लेकिन उसकी फूँक से आग इतनी तेज हो जाती है कि वह लोहे तक को जला सकती है।
