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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 10th Standard

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजए: लाली मेरे लाल की, जित देखों तित लाल। लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल।। कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढे बन - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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Question

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजए:

लाली मेरे लाल की, जित देखों तित लाल।
लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल।।
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढे बन माहिं।
ऐसे घट में पीव है, दुनिया जानै नाहिं।।
जिन ढूँढ़ा तिन पाइवाँ, गहिंर पानी पैठ।
जो बौरा डूबन डरा रहा किनारे वैठ।।
जो तोको काँटा बुबै, ताहि बोउ तू फूल।
तोहि फूल को फूल है, बाको है तिरसूल।।
  1. उचित जोड़ियाँ मिलाइए:       [2]
    'अ' उत्तर  'आ'
    कस्तूरी ______ परमात्मा
    काँटा ______ फूल
    लाल ______ मृग
    बौरा ______ पानी
        किनारा
  2. पद्यांश के अंतिम दोहे का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए।    [2]
Comprehension
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Solution

  1. 'अ' उत्तर  'आ'
    कस्तूरी मृग परमात्मा
    काँटा फूल फूल
    लाल परमात्मा मृग
    बौरा किनारा पानी
        किनारा
  2. अगर कोई आपकी बुराई करता है, निंदा करता है, तो आप उस बात का उत्तर अच्छाई सेदें। उसे बुरा न कहकर अच्छा ही कहे फूल बोए। जिस व्यक्ति ने अच्छाई की, उसे खुशी मिलेगी जिसने बुराई की, उसे अतत: पीड़ा अर्थात्‌ बुराई सहन करनी पड़ेगी। इस दोहे से हमें यह सीख मिलती है कि बुराई का जवाब अच्छाई से देना चाहिए, इससे हमारी आत्मा को शांति और संतुष्टि मिलती है।
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जिन ढूँढा
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RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

'कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढ़ै बन माहिं।
ऐसे घट में पीव है, दुनिया जानै नाहिं॥
'जिन ढूँढ़ा तिन पाइयाँ, गहिरे पानी पैठ।
जो बौरा डूबन डरा, रहा किनारे बैठ॥
जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोइ तू फूल।
तोहि फूल को फूल है, बाको है तिरसूल ॥

(1) कृति पूर्ण कीजिए:  (2)

(i) लिखिए फूल बोने का परिणाम ______
कौंटे बोने का परिणाम ______
(ii) लिखिए किनारे पर यह बैठा रहता है ______
वन में कस्तूरी यह ढूँढ़ता है ______

(2) पहली दो पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।  (2)


निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय।
बिना जीव की स्वाँस से, लोह भसम हवै जाय।।
गुरु कुम्हार सिष कुंभ है, गढ़-गढ़ काढ़े खोट।
अंतर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट।।
जाको राखै साइयाँ, मारि न सकके कोय।
'बाल न बाँका करि सकै, जो जग बैरी होय।।

(1) उचित जोड़ियाँ मिलाइए:  (2)

खोट निकालना हाय
दुर्बल को सताना साँस
लोहा भस्म होना गुरु
बाल भी बाँका न होना जग

(2) सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए:  (1)

उपसर्गयुक्त शब्द   प्रत्यय युक्त शब्द
________ ← बल →  _________

(3) 'जीवन में गुरु का महत्त्व' पर अपने विचार लिखिए।  (2)


निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-

लाली मेरे लाल की, जित देखों तित लाल।
लाली देखन मैं गई, मैं भी हो गई लाल।।

'कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढ़ै वन माहिं।
ऐसे घट में पीव है, दुनिया जाने नाहिं।।

'जिन ढूँढ़ा तिन पाइयाँ, गहिरे पानी पैठ।
जो बौरा डूबन डरा, रहा किनारे बैठ।।

जो तोको काँटा बुवै, ताहि बोउ तू फूल।
तोहि फूल को फूल है, बाकों है तिरसूल।।

(1) उचित जोड़ियाँ मिलाइए-  (2)

कस्तूरी परमात्मा
काँटा फूल
लाल मृग
बौरा पानी
  किनारा

(2) अन्तिम दो पक्तियों के लिए 25 से 30 शब्दों में अपने विचार लिखिए।  (2)


प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए:


उचित जोड़ियाँ मिलाइए:

उत्‍तर
गुरु   कुंभ
पंथी   छाया
फूल   सिष
कुम्‍हार   बौरा
    काँटा

शब्‍दसमूह के लिए एक शब्‍द लिखिए:

कस्‍तूरी की खोज करने वाला -


शब्‍दसमूह के लिए एक शब्‍द लिखिए:

किनारे पर बैठा रहने वाला -


शब्‍दसमूह के लिए एक शब्‍द लिखिए:

तीन नोकों वाला अस्‍त्र -


शब्‍दसमूह के लिए एक शब्‍द लिखिए:

जो बलहीन है -


दोहों में आए सुवचन:

  1. ______
  2. ______

दोहों में प्रयुक्‍त निम्‍न शब्‍द का दो-दो अर्थ लिखिए:

 


दोहों में प्रयुक्‍त निम्‍न शब्‍द का दो-दो अर्थ लिखिए:


दोहों में प्रयुक्‍त निम्‍न शब्‍द का दो-दो अर्थ लिखिए:


दोहों में प्रयुक्‍त निम्‍न शब्‍द का दो-दो अर्थ लिखिए:


निम्‍नलिखित अर्थ के शब्‍द दोहों से ढूँढ़कर लिखिए:

पुत्र - ______


निम्‍नलिखित अर्थ के शब्‍द दोहों से ढूँढ़कर लिखिए:

इत्र विक्रेता - ______


अपनी पसंद के किसी एक दोहे के भावार्थ से प्राप्त प्रेरणा लिखिए।


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