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Question
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
बढ़ती हुई आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किए गए मानवीय क्रियाकलापों ने प्रकृति का नकारात्मक रूप में प्रभावित कर उसे असंतुलित किया है। प्रकृति के इस असंतुलन का मानवीय जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है? 'अब कहाँ दूसरे के दुःख से दुःखी होने वाले' पाठ के संदर्भ में लिखिए।
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Solution
मानव-जाति ने अपनी संकीर्ण मानसिकता से अपने हित के लिए बुद्धि का उपयोग किया। वह सभी धरती पर अधिकार करने का प्रयास किया, समुद्र से ज़मीन छीनी, जंगलों को साफ किया और पशु-पक्षियों को बेघर करके अपने आसपास दीवारें खड़ी की। इससे प्राकृतिक संतुलन खराब हुआ, पशु-पक्षियों का स्थान नहीं रहा, और प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ी। भूकंप, बाढ़, तूफान, गर्मी, तेज़ वर्षा ने कई बीमारियों को उत्पन्न किया। इस तरह पर्यावरण के असंतुलन का जन-जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
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