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Question
निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
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जिसे मनुष्य अपना समझ भरोसा करता है जब उसी से अपमान और तिरस्कार प्राप्त हो तो मन वितृष्णा से भर जाता है, एकदम मर जाने की इच्छा होने लगती है, उसे शब्दों में बता सकना संभव नहीं। दिलीप ने अपनी पत्नी हेमा को पूर्ण स्वतंत्रता दी थी। वह उसका बहुत आदर करता था, बहुत आंतरिकता से वह उसके प्रति अनुरक्त था। बहुत से लोग इसे ‘अति’ कहेंगे। इसपर भी वह हेमा को संतुष्ट कर सका। जब हेमा, केवल दिलीप के मित्र के साथ सिनेमा देख आने के कारण रात भर रूठी रहकर सुबह उठते ही माँ के घर चली गई तब दिलीप के मन में क्षोभ का अंत न रहा। सितंबर का अंतिम सप्ताह था। दिलीप बैठक की खिड़की और दरवाजों पर परदा डाले बैठा था। वितृष्णा और ग्लानि में, समय स्वयं यातना बन जाता है। एक मिनट गुजारना मुश्किल हो जाता है। उसी समय सीढ़ियों पर से छोटे भाई के धम-धम कर उतरते चले आने का शब्द सुनाई दिया। छोटे भाई ने परदे को हटाकर पूछा था, “भाई जी, आपको कहीं जाना न हो तो मैं मोटरसाइकिल ले जाऊँ?” |
(1) कारण लिखिए: 2
- हेमा का रूठकर माँ के घर चले जाना -
......................... - दिलीप के क्षोभ का अंत न रहना -
.........................
(2) ‘गरीबी उन्नति में बाधा नहीं बनती’ विषय पर अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। 2
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Solution
(1)
- हेमा रूठकर मायके चली गई क्योंकि, दिलीप अपने मित्र के साथ सिनेमा देख आया था।
- दिलीप के क्षोभ का अंत न रहा क्योंकि, उसकी पत्नी हेमा रूठकर मायके चली गई।
(2)
