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निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य ‘उड़ चल, हारिल’ का विश्लेषण कीजिए: (1) रचनाकार का नाम - [1] (2) रचना की विधा - [1] (3) पसंद की पंक्तियाँ - [1] (4) पंक्तियाँ पसंद होने का कारण - [1] - Hindi [हिंदी]

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Question

निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य ‘उड़ चल, हारिल’ का विश्लेषण कीजिए:

  1. रचनाकार का नाम - [1]
  2. रचना की विधा - [1]
  3. पसंद की पंक्तियाँ - [1]
  4. पंक्तियाँ पसंद होने का कारण - [1]
  5. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा - [2]
Very Long Answer
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Solution

  1. रचनाकार का नाम: श्री सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
  2. रचना की विधा: कविता।
  3. पसंद की पंक्तियाँ: काँप न, यद्यपि दसों दिशा में, तुझे शून्य नभ घेर रहा है,
    रुक न यद्यपि उपहास जगत का, तुझको पथ से हेर रहा है!
  4. पंक्तियाँ पसंद होने का कारण: कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा।
  5. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणा: प्रस्तुत कविता में ‘अज्ञेय’ जी ने हारिल पक्षी के माध्यम से देश के नवयुवकों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। कवि का कहना है कि व्यक्ति के जीवन पथ में अनेक कठिनाइयाँ आएँगी किंतु उनसे घबराना नहीं है। जीवन-जगत के आह्वान को स्वीकार करके ‘फीनिक्स’ पक्षी की भाँति आसमान की ऊँचाइयों तक पहुँचना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
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