Advertisements
Advertisements
Question
निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −
'अपना परिचय उनके 'पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर' के रूप में देने में वे गौरवान्वित महसूस करते थे।'
Advertisements
Solution
महादेव जी गांधीजी के सब छोटे-बड़े सभी काम करते थे और सभी कार्य कुशलता पूर्वक करते थे। इसी कारण वे स्वयं को गांधीजी के 'पीर-बावर्ची-भिश्ती-खर' कहते थे और उसमें गौरव का अनुभव करते थे।
RELATED QUESTIONS
कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने में उसके भाई का कितना योगदान था? इससे लेखक के चरित्र में किन-किन जीवन मूल्यों की झलक मिलती है?
'किताबों वाले कमरे' में रहने के पीछे लेखक के मन में क्या भावना थी?
लेखक ने अपने पिता से किया हुआ वायदा किस तरह निभाया? इससे आपको क्या सीख मिलती है?
हामिद के भारत आने पर आप उसके साथ कैसा व्यवहार करते?
यदि आपने भगवाना की माँ जैसी किसी दुखिया को देखा है तो उसकी कहानी लिखिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −
लेखिका को देखकर 'की' हक्का-बक्का क्यों रह गया?
दोनों साप्ताहिक अहमदाबाद से निकलते थे।
नरहरिभाई कौन थे?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए −
लेखक के अनुसार स्वाधीनता आंदोलन का कौन सा दिन बुरा था?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए −
धर्म के स्पष्ट चिह्न क्या हैं?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
पाश्चात्य देशों में धनी और निर्धन लोगों में क्या अंतर है?
बचेंद्रीपाल ने जूस और चाय लेकर नीचे जाने का जोखिम क्यों लिया?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −
कौन-सा आघात अप्रत्याशित था और उसका लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्याय लिखिए −
|
चाँद |
ज़िक्र |
आघात |
ऊष्मा |
अंतरंग |
अतिथि के अपेक्षा से अधिक रूक जाने पर लेखक की क्या-क्या प्रतिक्रियाएँ हुईं, उन्हें क्रम से छाँटकर लिखिए।
यदि अतिथि पाँचवें दिन भी रुक गया तो लेखक की क्या दशा हो सकती थी?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −
सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् के जीवन से प्राप्त होने वाले संदेश को अपने शब्दों में लिखिए।
लेखक चलते-पुरज़े लोगों को यथार्थ दोष क्यों मानता है?
देश में धर्म की धूम है’-का आशय स्पष्ट कीजिए।
