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Question
“नाटक की कहानी बेशक भूतकाल या भविष्यकाल से संबद्ध हो, तब भी उसे वर्तमान काल में ही घटित होना पड़ता है” – इस धारणा के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
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Solution
नाटक को दृश्य काव्य कहा जाता है, क्योंकि इसे दर्शकों के सामने मंच पर प्रस्तुत किया जाता है। कहानी, उपन्यास, कविता या निबंध को हम अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी और धीरे-धीरे पढ़ सकते हैं, लेकिन नाटक को दर्शकों के सामने एक निश्चित समय और स्थान पर प्रस्तुत किया जाता है। इसलिए नाटककार को अपनी कहानी को सीमित समय में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना पड़ता है।
नाटक की कहानी चाहे भूतकाल की किसी घटना पर आधारित हो या भविष्य की कल्पना पर, मंच पर उसे वर्तमान समय में ही घटित होते हुए दिखाया जाता है। पौराणिक और ऐतिहासिक घटनाएँ भी अभिनय, संवाद और मंच-सज्जा के माध्यम से दर्शकों के सामने वर्तमान की तरह प्रस्तुत होती हैं। इसी कारण नाटक के मंच-निर्देश भी सामान्यतः वर्तमान काल में लिखे जाते हैं।
इस प्रकार नाटक की कथा किसी भी काल से संबंधित हो सकती है, लेकिन उसका मंचन और प्रभाव दर्शकों के सामने वर्तमान काल में ही दिखाई देता है।
