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मेरी निश्वासों से द्रुततर, सुभग न तू बुझने का भय कर; मैं अँचल की ओट किए हूँ, अपनी मृदु पलकों से चंचल ! सहज-सहज मेरे दीपक जल ! पद्यांश में आए उपसर्ग-प्रत्‍यययुक्‍त शब्‍दों काे ढूँढ़कर लिखिए। - Hindi [हिंदी]

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Question

मेरी निश्वासों से द्रुततर,
सुभग न तू बुझने का भय कर;
मैं अँचल की ओट किए हूँ,
अपनी मृदु पलकों से चंचल !
सहज-सहज मेरे दीपक जल !
सीमा ही लघुता का बंधन,
है अनादि तू मत घड़ियाँ गिन;
मैं दृग के अक्षय कोषों से
तुझ में भरती हूँ आँसू जल !
सजल-सजल मेरे दीपक जल !

पद्यांश में आए उपसर्ग-प्रत्‍यययुक्‍त शब्‍दों काे ढूँढ़कर लिखिए।

Short/Brief Note
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Solution

  1. उपसर्ग: निश्वास, अनादि, अक्षय, सजल।
  2. प्रत्यय: द्रुततर, लघुता।
shaalaa.com
मधुर-मधुर मेरे दीपक जल
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Chapter 1.09: मधुर-मधुर मेरे दीपक जल! - स्वाध्याय [Page 39]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Kumarbharati [Hindi] Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 1.09 मधुर-मधुर मेरे दीपक जल!
स्वाध्याय | Q (२) | Page 39

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मेरी निश्वासों से द्रुततर,
सुभग न तू बुझने का भय कर;
मैं अँचल की ओट किए हूँ,
अपनी मृदु पलकों से चंचल !
सहज-सहज मेरे दीपक जल !

पद्यांश की प्रथम पाँच पंक्‍तियों का सरल अर्थ लिखिए।


एक शब्‍द में उत्‍तर दीजिए:

लघुता का बंधन - ______ 


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