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'मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ' में राम के स्वभाव की किन विशेषताओं की ओर संकेत किया गया है? - Hindi (Elective)

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Question

'मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ' में राम के स्वभाव की किन विशेषताओं की ओर संकेत किया गया है?

Short/Brief Note
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Solution

प्रस्तुत पंक्ति में राम के स्वभाव की इन विशेषताओं की ओर संकेत मिलता है -

  1. राम दयालु और स्नेही व्यक्ति हैं। उन्होंने बाल्यकाल से ही भरत पर स्नेह और दया की वर्षा की है।
  2. भरत, राम के प्रिय अनुज थे। उन्होंने सदैव भरत के हित के लिए कार्य किया है।
  3. वे खेल में भी कभी अपने अनुज भरत के प्रति अप्रसन्नता नहीं दिखाते थे। वे सदैव उसे प्रसन्न रखने का प्रयास करते थे।
  4. वे अपराधी पर क्रोध नहीं करते थे।
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भरत-राम का प्रेम
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निम्नलिखित पंक्तियों में निहित काव्य सौंदर्य लिखिए।

पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े।

नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥

कहब मोर मुनिनाथ निबाहा।

एहि ते अधिक कहौं मैं काहा॥


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निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

महीं सकल अनरथ कर मूला। सो सुनि समुझि सहिउँ सब सूला॥
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जिन्हहि निरखि मग साँपिनि बीछी। तजहिं बिषम बिषु तापस तीछी॥


निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए -

पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े। नीरज नयन नेह जल बाढ़े॥
कहब मोर मुनिनाथ निबाहा। एहि तें अधिक कहौं मैं काहा॥
मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ॥
मो पर कृपा सनेहू बिसेखी। खेलत खुनिस न कबहूँ देखी॥

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