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Question
माध्यमभाषया सरलार्थं लिखत।
| वसन्तसेना | (बाहू प्रसार्य) एहि मे पुत्रक! अनुकृतमनेन पितुः रूपम्। अथ किं निमित्तमेष रोदिति? |
| रदनिका | एतेन प्रतिवेशिक-दारकस्य सुवर्णशकटिकया क्रीडितम्, तेन च सा नीता, ततः पुनस्तां याचते ततो मया इयं मृत्तिकाशकटिका कृत्वा दत्ता। ततो भणति...‘रदनिके! किं मम एतया मृत्तिकाशकटिकया, तामेव सौवर्णशकटिकां देहि’ इति। |
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Solution 1
English:
| Vasantasena | (by spreading both arms) Come, my child! He has imitated his father’s appearance. Well, why is he crying now? |
| Radanika | He was playing with golden cart of their neighbour’s son. Now, he took it back. Hence, he is asking for the same cart. I prepared an earthen cart; and gave him. Well, he argues, “What is the use of this cart to me? Give me only that golden cart.” |
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Solution 2
हिंदी:
| वसंतसेना | (हाथ फैलाकर) इसमें, मेरे बेटे! मन पिता के रूप की नकल करता है। तो वह क्यों रो रहा है? |
| रदनिका | इस पड़ोसी की बेटी की सोने की टोकरी से खेल रही थी और वह उसे ले गया। फिर उसने उससे दोबारा पूछा और मैंने यह मिट्टी की टोकरी बनाकर उसे दे दी। फिर वह कहता है...‘रदानिका! मुझे इस मिट्टी की टोकरी से क्या लेना-देना, मुझे वही सोने की टोकरी दे दो। |
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Solution 3
मराठी:
| वसंतसेना | (हात पसरुन) हो, माझ्या बाळा. हा अगदी वडिलांसारखा दिसतो. हा का म्हणून रडत आहे? |
| रदनिका | हा शेजारच्या मुलाच्या सोन्याच्या गाडीशी खेळत होता. आणि तो ती घेऊन गेला. याने पुन्हा ती मागितल्यावर मी ही मातीची गाडी बनवून दिली. तर हा म्हणतोय, रदनिके, मला या मातीच्या गाडीचा काय उपयोग? तीच सोन्याची गाडी दे. |
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