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Question
लखनऊ आकर भी इफ्फ़न की दादी की एक विशिष्ट पहचान बनी हुई थी। स्पष्ट कीजिए।
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Solution
इफ़्फ़न की दादी लखनऊ के पूरब की रहने वाली थी। वे जमींदार की बेटी थी जो विवाह के बाद अपनी ससुराल लखनऊ आ गईं। वे यहाँ भी पूरबी बोलती थी। वे हिंदू-मुस्लिम संस्कृति के मेल-जोल का जीता-जागता नमूना थी। वे रोजा-नमाज़ की पाबंद थी, परंतु इकलौते बेटे को जब चेचक निकली तो उन्होंने प्रार्थना की, “माता मोरे बच्चे को माफ़ कर द्यो।’ वे सदा मायके की ही भाषा बोलती रही।
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पूरक पाठ्य-पुस्तक पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
'टोपी शुक्ला का दोस्त इफ़्फ़न था लेकिन उसकी घनिष्ठ दोस्ती इफ़्फ़न की दादी से भी थी।' इस कथन को 'टोपी शुक्ला' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
