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क्या तुम भी समूह में रहते हो? तुम्हें समूह में रहना कैसा लगता है? तुम्हारे हिसाब से समूह में रहने के फ़ायदे और नुकसान क्या-क्या हो सकते हैं? फ़ायदे नुकसान

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Question

क्या तुम भी समूह में रहते हो? तुम्हें समूह में रहना कैसा लगता है? तुम्हारे हिसाब से समूह में रहने के फ़ायदे और नुकसान क्या-क्या हो सकते हैं?

फ़ायदे नुकसान
   
Answer in Brief
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Solution

हाँ, मैं भी अपने स्कूल में अपने दोस्तों के साथ और घर पर अपने परिवार के साथ एक समूह में रहता हूँ।

फ़ायदे नुकसान
साथ रहने से सुरक्षा मिलती है। साथ रहने से आपस में झगड़ा होने की संभावना ज़्यादा रहती है।
साथ रहने से बल मिलता है। साथ रहने से व्यर्थ की बातें करने में समय नष्ट होता है।
साथ रहकर हम एक दूसरे की मदद कर सकते हैं। हम पूरी तरह से स्वतंत्र महसूस नहीं कर सकते हैं।
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नन्दू हाथी
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Chapter 3: नन्दू हाथी - खेल-खेल में [Page 25]

APPEARS IN

NCERT Environmental Studies - Looking Around [Hindi] Class 4
Chapter 3 नन्दू हाथी
खेल-खेल में | Q 6 | Page 25

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अगर तुम नन्दू होते और झुंड में रहते तो क्या-क्या करते?


हाथियों के झुंड में सभी फ़ैसले सबसे बुज़र्ग हथिनी लेती है। तुम्हारे परिवार में घर के फ़ैसले कौन लेता है?


हाथियों के झुंड का एक कोलाज बनाओ। इसके लिए तुम हाथियों के जितने चित्र इकट्ठा कर सकते हो, करो। अब उन्हें काटकर अपनी कॉपी में चिपकाओ।


नन्दू वह सब करता था, जो उसे पसंद था। यदि तुम्हें अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए एक पूरा दिन मिले, तो तुम उस दिन क्या-क्या करोगे?


पता करो और लिखो, कौन-कौन से जानवर झुंड में रहते हैं?


तुम कौन-कौन से जानवरों पर बैठे हो? उनके नाम लिखो।


बगुला भैंस पर क्यों बैठा होगा?


ऐसे और जानवरों के नाम लिखो, जिन्हें हम सवारी के काम में लाते हैं।


इन चित्रों को देखो और पढ़ो- ये जानवर आपस में क्या-क्या कह रहे हैं। इन पर संवेदनशीलता से चर्चा करें।

यह पिटारी ही अब मेरा घर बन गया है। मैं तो जंगल के जानवरों से मिलना और खुली हवा लेना मानो भूल ही गया हूँ। बस पिटारी है और यह सँपेरा!
यह मत सोचो कि मैं सर्कस में बहुत खुश हूँ। नाचो, कूदो, आग के गोले में से निकलो, और भी न जाने क्या-क्या! न करो, तो भूखे रहो और पिटाई अलग से!
तुमने मेरी दौड़ ही देखी है। मेरे पैरों के नीचे जब लोहे की नाल ठोकते हैं, तो दर्द से जान निकल जाती है।
नाचते-नाचते हमारी तो कमर ही टूट गई। मन न हो फिर भी नाचो। वह भी, खाली पेट!
म्याऊँ-म्याऊँ-म्याऊँ! लोगों के लिए कुछ भी काम नहीं करती, फिर भी बच्चे मुझे बहुत प्यार करते हैं। दूध पिलाते हैं और सहलाते भी हैं। मैं अपनी मर्ज़ी से सब जगह आती-जाती हूँ।
गुटरगूँ! गुटरगूँ! जानते हो, लोग मुझे बुला-बुलाकर बड़े प्यार से दाना खिलाते हैं।

पेड़ों पर झूमते और लटकते बंदरों और मदारी के बंदर में तुम्हें क्या अंतर लगता है?


इस हाथी के कितने पैर हैं?


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