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कविता (हिम) की अंतिम छह पंक्‍तियों का भावार्थ लिखिए। घाटी या कि नदी में गिर सकने वाली वे पर्वत थामे चली जा रहीं पगवाटें भी छूट गईं सब छूट गईं जैसे सांसारिकताएँ थीं ये भी। - Hindi [हिंदी]

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Question

कविता (हिम) की अंतिम छह पंक्‍तियों का भावार्थ लिखिए।

घाटी या कि नदी में
गिर सकने वाली वे
पर्वत थामे चली जा रहीं
पगवाटें भी छूट गईं
सब छूट गईं
जैसे सांसारिकताएँ थीं ये भी। 

Short/Brief Note
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Solution

भावार्थ : कवि कहते हैं पहाड़ों पर जो पगडंडियाँ होती हैं, उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि वे पर्वत के सहारे आगे बढ़ रही हैं | किंतु हमेशा इस बात का डर लगा रहता है की ये पगडंडियाँ घाटी अथवा नदी में कभी भी गिर सकती हैं | आगे बढ़ते जानेवाले पांडवों का रास्ता सांसारिक वस्तुओं की तरह इन पगडंडियों ने भी छोड़ दिया | 

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हिम
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Chapter 1.07: हिम - स्वाध्याय [Page 36]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Kumarbharati [Hindi] Standard 10 Maharashtra State Board
Chapter 1.07 हिम
स्वाध्याय | Q (५) | Page 36
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