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Question
कविता (हिम) की अंतिम छह पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
घाटी या कि नदी में
गिर सकने वाली वे
पर्वत थामे चली जा रहीं
पगवाटें भी छूट गईं
सब छूट गईं
जैसे सांसारिकताएँ थीं ये भी।
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Solution
भावार्थ : कवि कहते हैं पहाड़ों पर जो पगडंडियाँ होती हैं, उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि वे पर्वत के सहारे आगे बढ़ रही हैं | किंतु हमेशा इस बात का डर लगा रहता है की ये पगडंडियाँ घाटी अथवा नदी में कभी भी गिर सकती हैं | आगे बढ़ते जानेवाले पांडवों का रास्ता सांसारिक वस्तुओं की तरह इन पगडंडियों ने भी छोड़ दिया |
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एक शब्द में उत्तर लिखिए :
पृथिवी चलकर बनती = ______
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कविता (हिम) में इस अर्थ के आए हुए शब्द :
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कविता (हिम) में इस अर्थ के आए हुए शब्द :
निरंकुश - ______
कविता (हिम) में इस अर्थ के आए हुए शब्द :
हित चाहने वाले - ______
कविता (हिम) में आए प्राकृतिक घटक :

विशेषताएँ लिखिए :
पाखीदल का समूह - ______
विशेषताएँ लिखिए :
नदियाँ - ______
निम्न मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए :
१. रचनाकार का नाम
२. रचना का प्रकार
३. पसंदीदा पंक्ति
४. पसंद होने का कारण
५. रचना से प्राप्त प्रेरणा
