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Question
कविता (हिम) की अंतिम छह पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
घाटी या कि नदी में
गिर सकने वाली वे
पर्वत थामे चली जा रहीं
पगवाटें भी छूट गईं
सब छूट गईं
जैसे सांसारिकताएँ थीं ये भी।
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Solution
भावार्थ : कवि कहते हैं पहाड़ों पर जो पगडंडियाँ होती हैं, उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि वे पर्वत के सहारे आगे बढ़ रही हैं | किंतु हमेशा इस बात का डर लगा रहता है की ये पगडंडियाँ घाटी अथवा नदी में कभी भी गिर सकती हैं | आगे बढ़ते जानेवाले पांडवों का रास्ता सांसारिक वस्तुओं की तरह इन पगडंडियों ने भी छोड़ दिया |
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एक शब्द में उत्तर लिखिए :
पृथिवी चलकर बनती = ______
एक शब्द में उत्तर लिखिए :
धुला-धुला-सा = ______
कविता (हिम) में इस अर्थ के आए हुए शब्द :
निरंकुश - ______
कविता (हिम) में इस अर्थ के आए हुए शब्द :
स्वतंत्र - ______
कविता (हिम) में इस अर्थ के आए हुए शब्द :
हित चाहने वाले - ______
कविता (हिम) में आए प्राकृतिक घटक :

विशेषताएँ लिखिए :
वृक्ष - ______
विशेषताएँ लिखिए :
पाखीदल का समूह - ______
विशेषताएँ लिखिए :
हवा - ______
निम्नलिखित पठित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:
| ऊर्ध्वतम ही है चलना जैसे पृथिवी चलकर गौरीशंकर बनती ! छूट गए पीछे कस्तूरी मृगवाले वे मधु मानव-से उत्सव जंगल, ग्रीष्म तपे तँबियारे झरे पात की वे वनानियाँ, गिरे चीड़फूलों से लदी भूमि औ’ औषधियों के वल्कल पहने परम हितैषी वृक्ष सभी कुछ छूट गए । |
(1) उचित मिलान कीजिए: (2)
| अ | उत्तर | आ | |
| (i) | औषधि | ताप | |
| (ii) | ग्रीष्म | वल्कल | |
| (iii) | कस्तूरी | पात | |
| (iv) | तौबियारे | उत्सव | |
| (v) | मृग |
(2) पद्यांश से ढूँढ़कर लिखिए: (2)
- विलोम शब्द:
- आगे × ______
- अहितैषी × ______
- समानार्थी शब्द :
-
- पेड़ = ______
- वन = ______
(3) प्रथम चार पंक्तियों का सरल अर्थ 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
