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कवि-पुरोहित के रूप में साहित्यकार की भूमिका स्पष्ट कीजिए। - Hindi (Elective)

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Question

कवि-पुरोहित के रूप में साहित्यकार की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

Long Answer
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Solution

पुरोहित आम जनता के आगे चलकर उनका मार्ग दर्शन करता है। वह जनता को जैसा-जैसा निर्देश देता है, वैसे ही आम जनता करती है। इस तरह वह जनता को पूजा निर्देश देकर उनके जीवन में आए कष्टों का निवारण करता है तथा उनके जीवन में शांति स्थापित करता है। कवि-पुरोहित भी ऐसा ही करता है। वह आम जनता के जीवन में परिवर्तन की चाह को पूरा करने के लिए उनका दिशा निर्देश करता है और उन्हें नए मार्ग दिखाता है। एक समाज में मानवीय-संबंधों के मध्य व्याप्त परेशानियों को समाप्त करता है। कवि पुरोहित यदि जनता का दिशा निर्देश करने में सक्षम नहीं है, तो उसका साहित्यकार कहलाना व्यर्थ है। इस तरह वह साहित्य के साथ न्याय नहीं कर पाएगा। उसका साहित्य ही है, जो लोगों में चेतना जागृत करता है और उन्हें नव तथा सुखी जीवन की राह दिखाता है। उन्हें उद्देश्य तथा प्रेरणा देकर उनके जीवन को ही बदल देता है। कवि-पुरोहित के रूप में वह जनता का कल्याण करता है।
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यथास्मै रोचते विश्वम्
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