हिंदी

कवि-पुरोहित के रूप में साहित्यकार की भूमिका स्पष्ट कीजिए। - Hindi (Elective)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

कवि-पुरोहित के रूप में साहित्यकार की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

दीर्घउत्तर
Advertisements

उत्तर

पुरोहित आम जनता के आगे चलकर उनका मार्ग दर्शन करता है। वह जनता को जैसा-जैसा निर्देश देता है, वैसे ही आम जनता करती है। इस तरह वह जनता को पूजा निर्देश देकर उनके जीवन में आए कष्टों का निवारण करता है तथा उनके जीवन में शांति स्थापित करता है। कवि-पुरोहित भी ऐसा ही करता है। वह आम जनता के जीवन में परिवर्तन की चाह को पूरा करने के लिए उनका दिशा निर्देश करता है और उन्हें नए मार्ग दिखाता है। एक समाज में मानवीय-संबंधों के मध्य व्याप्त परेशानियों को समाप्त करता है। कवि पुरोहित यदि जनता का दिशा निर्देश करने में सक्षम नहीं है, तो उसका साहित्यकार कहलाना व्यर्थ है। इस तरह वह साहित्य के साथ न्याय नहीं कर पाएगा। उसका साहित्य ही है, जो लोगों में चेतना जागृत करता है और उन्हें नव तथा सुखी जीवन की राह दिखाता है। उन्हें उद्देश्य तथा प्रेरणा देकर उनके जीवन को ही बदल देता है। कवि-पुरोहित के रूप में वह जनता का कल्याण करता है।
shaalaa.com
यथास्मै रोचते विश्वम्
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?

संबंधित प्रश्न

लेखक ने कवि की तुलना प्रजापति से क्यों की है?


'साहित्य समाज का दर्पण है' इस प्रचलित धारणा के विरोध में लेखक ने क्या तर्क दिए हैं?


दुर्लभ गुणों को एक ही पात्र में दिखाने के पीछे कवि का क्या उद्देश्य है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।


''साहित्य थके हुए मनुष्य के लिए विश्रांति ही नहीं है। वह उसे आगे बढ़ने के लिए उत्साहित भी करता है।'' स्पष्ट कीजिए।


''मानव संबंधों से परे साहित्य नहीं है।'' इस कथन की समीक्षा कीजिए।


'पंद्रहवीं-सोलहवीं' सदी में हिंदी-साहित्य ने कौन-सी सामाजिक भूमिका निभाई?


साहित्य के 'पांचजन्य' से लेखक का क्या तात्पर्य है? 'साहित्य का पांचजन्य' मनुष्य को क्या प्रेरणा देता है?


साहित्यकार के लिए स्रष्टा और द्रष्टा होना अत्यंत अनिवार्य है, क्यों और कैसे?


सप्रसंग सहित व्याख्या कीजिएः
'कवि की यह सृष्टि निराधार नहीं होती। हम उसमें अपनी ज्यों-की-त्यों आकृति भले ही न देखें, पर ऐसी आकृति ज़रूर देखते हैं जैसी हमें प्रिय है, जैसी आकृति हम बनाना चाहते हैं।'

सप्रसंग सहित व्याख्या कीजिएः
'प्रजापति-कवि गंभीर यथार्थवादी होता है, ऐसा यथार्थवादी जिसके पाँव वर्तमान की धरती पर हैं और आँखें भविष्य के क्षितिज पर लगी हुई हैं।'

सप्रसंग सहित व्याख्या कीजिएः

'इसके सामने निरुद्देश्य कला, विकृति काम-वासनाएँ, अहंकार और व्यक्तिवाद, निराशा और पराजय के 'सिद्धांत' वैसे ही नहीं ठहरते जैसे सूर्य के सामने अंधकार।'


पाठ में प्रतिबिंब-प्रतिबिंबित जैसे शब्दों पर ध्यान दीजिए। इस तरह के दस शब्दों की सूची बनाइए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×