हिंदी

साहित्य के 'पांचजन्य' से लेखक का क्या तात्पर्य है? 'साहित्य का पांचजन्य' मनुष्य को क्या प्रेरणा देता है? - Hindi (Elective)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

साहित्य के 'पांचजन्य' से लेखक का क्या तात्पर्य है? 'साहित्य का पांचजन्य' मनुष्य को क्या प्रेरणा देता है?

संक्षेप में उत्तर
Advertisements

उत्तर

'पांचजन्य' कृष्ण के शंक का नाम था। इसकी विशेषता थी कि इसे फूंका एक स्थान से जाता था और ध्वनियाँ पाँच स्थानों से बाहर आती थी। अतः लेखक ने साहित्य के पांचजन्य कहकर साहित्य की विशेषता का वर्णन किया है। यह पांचजन्य शंख के समान है, जो जीवन से हार चुके व्यक्ति को अपने नाद से जागृत करता है। इसके अतिरिक्त यह मनुष्य को जीवन रूपी युद्धभूमि में लड़ने के लिए प्रेरित करता है। साहित्य के पांचजन्य ने मनुष्य के मन में व्याप्त दुख, निराशा, हार इत्यादि भावों को उखाड़ फेंका है। यह आज से ही नहीं प्राचीनकाल से मनुष्य की रक्षा कर रहा है। यह मनुष्य को कर्म करने के लिए उत्साहित करता है। जो लोग भाग्य के भरोसे रहते हैं साहित्य का पांचजन्य उनका उपहास उड़ता है।
shaalaa.com
यथास्मै रोचते विश्वम्
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?

संबंधित प्रश्न

लेखक ने कवि की तुलना प्रजापति से क्यों की है?


'साहित्य समाज का दर्पण है' इस प्रचलित धारणा के विरोध में लेखक ने क्या तर्क दिए हैं?


दुर्लभ गुणों को एक ही पात्र में दिखाने के पीछे कवि का क्या उद्देश्य है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।


''साहित्य थके हुए मनुष्य के लिए विश्रांति ही नहीं है। वह उसे आगे बढ़ने के लिए उत्साहित भी करता है।'' स्पष्ट कीजिए।


''मानव संबंधों से परे साहित्य नहीं है।'' इस कथन की समीक्षा कीजिए।


'पंद्रहवीं-सोलहवीं' सदी में हिंदी-साहित्य ने कौन-सी सामाजिक भूमिका निभाई?


साहित्यकार के लिए स्रष्टा और द्रष्टा होना अत्यंत अनिवार्य है, क्यों और कैसे?


कवि-पुरोहित के रूप में साहित्यकार की भूमिका स्पष्ट कीजिए।


सप्रसंग सहित व्याख्या कीजिएः
'कवि की यह सृष्टि निराधार नहीं होती। हम उसमें अपनी ज्यों-की-त्यों आकृति भले ही न देखें, पर ऐसी आकृति ज़रूर देखते हैं जैसी हमें प्रिय है, जैसी आकृति हम बनाना चाहते हैं।'

सप्रसंग सहित व्याख्या कीजिएः
'प्रजापति-कवि गंभीर यथार्थवादी होता है, ऐसा यथार्थवादी जिसके पाँव वर्तमान की धरती पर हैं और आँखें भविष्य के क्षितिज पर लगी हुई हैं।'

सप्रसंग सहित व्याख्या कीजिएः

'इसके सामने निरुद्देश्य कला, विकृति काम-वासनाएँ, अहंकार और व्यक्तिवाद, निराशा और पराजय के 'सिद्धांत' वैसे ही नहीं ठहरते जैसे सूर्य के सामने अंधकार।'


पाठ में प्रतिबिंब-प्रतिबिंबित जैसे शब्दों पर ध्यान दीजिए। इस तरह के दस शब्दों की सूची बनाइए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×