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कृति पूर्ण कीजिए: कनुप्रिया की तन्मयता के गहरे क्षण सिर्फ − ______.

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Question

कृति पूर्ण कीजिए:

कनुप्रिया की तन्मयता के गहरे क्षण सिर्फ − ..............

One Line Answer
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Solution

कनुप्रिया की तन्मयता के गहरे क्षण सिर्फ भावनाओं के क्षण हैं।

shaalaa.com
कनुप्रिया
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Chapter 13: कनुप्रिया - स्वाध्याय [Page 78]

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Balbharati Hindi Yuvakbharati Standard 12 Maharashtra State Board
Chapter 13 कनुप्रिया
स्वाध्याय | Q १. (अ) (१) | Page 78

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कृति पूर्ण कीजिए :

कनुप्रिया के अनुसार यही युद्ध का सत्य स्वरूप है - ____________


कृति पूर्ण कीजिए :

कनुप्रिया के लिए वे अर्थहीन शब्द जो गली-गली सुनाई देते हैं -____________


कारण लिखिए :

कनुप्रिया के मन में मोह उत्पन्न हो गया है।


कारण लिखिए:

आम की डाल सदा-सदा के लिए काट दी जाएगी।


‘व्यक्ति को कर्मप्रधान होना चाहिए’, इस विषय पर अपना मत लिखिए।


‘वृक्ष की उपयोगिता’, इस विषय पर अपने विचार लिखिए।


‘कवि ने कनुप्रिया के माध्यम से आधुनिक मानव की व्यथा को शब्दबद्ध किया है’, इस कथन को स्पष्ट कीजिए। 


निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग ८० से १०० शब्दों में लिखिए:

राधा की दृष्टि से जीवन की सार्थकता बताइए।


निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

नीचे की घाटी से
ऊपर के शिखरों पर
जिसको जाना था वह चला गया
हाय मुझी पर पग रख
मेरी बाँहों से
इतिहास तुम्हें ले गया!

सुनो कनु, सुनो
क्या मैं सिर्फ एक सेतु थी तुम्हारे लिए
लीलाभूमि और युद्धक्षेत्र के
अलंघ्य अंतराल में!

अब इन सूने शिखरों, मृत्यु घाटियों में बने
सोने के पतले गुँथे तारोंवाले पुल-सा
निर्जन
निरर्थक
काँपता-सा, यहाँ छूट गया-मेरा यह सेतु जिस्म
जिसको जाना था वह चला गया

(१) संजाल पूर्ण कीजिए: (२)

(२) पद्यांश में आए हुए निम्न शब्दों का चयन परिवर्तन कीजिए: (२)

  1. बाँह - ______
  2. सेतु - ______
  3. लीला - ______
  4. घाटी - ______

(३) ‘वृक्ष की उपयोगिता’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ४५ शब्दों में लिखिए। (२)


कनुप्रिया की दृष्टि से जीवन की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

अपनी जमुना में
जहाँ घंटों अपने को निहारा करती थी मैं
वहाँ अब शस्त्रों से लदी हुई
अगणित नौकाओं की पंक्ति रोज-रोज कहाँ जाती है?

धारा में बह-बहकर आते हुए टूटे रथ
जर्जर पताकाएँ किसकी हैं?

हारी हुई सेनाएँ, जीती हुई सेनाएँ
नभ को कँपाते हुए युद्ध घोष, क्रंदन-स्वर,
भागे हुए सैनिकों से सुनी हुई
अकल्पनीय अमानुषिक घटनाएँ युद्ध की
क्या ये सब सार्थक हैं?
चारों दिशाओं से
उत्तर को उड़-उड़कर जाते हुए
गृद्धों को क्या तुम बुलाते हो

(जैसे बुलाते थे भटकी हुई गायों को)

जितनी समझ तुमसे अब तक पाई है कनु,
उतनी बटोरकर भी
कितना कुछ है जिसका
कोई भी अर्थ मुझे समझ नहीं आता हैं

अर्जुन की तरह कभी
मुझे भी समझा दो
सार्थकता है क्या बंधु?
मान लो कि मेरी तन्मयता के गहरे क्षण
रँगे हुए, अर्थहीन, आकर्षक शब्द थे-
तो सार्थक फिर क्या है कनु?
पर इस सार्थकता को तुम मुझे
कैसे समझाओगे कनु?

शब्द : अर्थहीन

शब्द, शब्द, शब्द, .............
मेरे लिए सब अर्थहीन हैं
यदि वे मेरे पास बैठकर
तुम्हारे काँपते अधरों से नहीं निकलते
शब्द, शब्द, शब्द, .............
कर्म, स्वधर्म, निर्णय, दायित्व........
मैंने भी गली-गली सुने हैं ये शब्द
अर्जुन ने इनमें चाहे कुछ भी पाया हो
मैं इन्हें सुनकर कुछ भी नहीं पाती प्रिय,
सिर्फ राह में ठिठककर
तुम्हारे उन अधरों की कल्पना करती हूँ
जिनसे तुमने ये शब्द पहली बार कहे होंगे

1. कृति पूर्ण कीजिए:   (2)

कनुप्रिया के अनुसार यही युद्ध का सत्य स्वरूप हैं:  

  1. ____________
  2. ____________
  3. ____________
  4. ____________

2. कृति पूर्ण कीजिए:  (2)

  1. कनुप्रिया कनु से इनकी तरह सब कुछ समझना चाहती है सार्थकता-
  2. कनुप्रिया की तन्मयता के गहरे क्षण -
  3. कनुप्रिया के लिए अर्थहीन शब्द जो गली -गली सुनाई देते हैं -
  4. कनुप्रिया के लिए वे सारे शब्द तब अर्थहीन है - 

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए: (2)

'युद्ध से विनाश एवं शांति से विकास होता है' - इस विषय पर अपने विचार लिखिए।


निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए:

सेतु: मैं

सुनो कनु, सुनो
क्या मैं सिर्फ एक सेतु थी तुम्हारे लिए
लीलाभूमि और युद्धक्षेत्र के
अलंघ्य अंतराल में !
अब इन सूने शिखरों, मृत्यु घाटियों में बने
सोने के पतले गुँथे तारोंवाले पुल-सा
निर्जन
निरर्थक
काँपता-सा, यहाँ छूट गया - मेरा यह सेतु जिस्म
- जिसको जाना था वह चला गया

अमंगल छाया

घाट से आते हुए
कदंब के नीचे खड़े कनु को
ध्यानमग्न देवता समझ, प्रणाम करने
जिस राह से तू लौटती थी बावरी
आज उस राह से न लौट

उजड़े हुए कुंज
रौंदी हुई लताएँ
आकाश पर छाई हुई धूल
क्या तुझे यह नहीं बता रही
कि आज उस राह से
कृष्ण की अठारह अक्षौहिणी सेनाएँ
युद्ध में भाग लेने जा रही हैं !

आज उस पथ से अलग हटकर खड़ी हो
बावरी !
लताकुंज की ओट
छिपा ले अपने आहत प्यार को
आज इस गाँव से

1. निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर लिखिए।  (2)

  1. उपर्युक्त पद्यांश में प्रयुक्त एक सुंदर वृक्ष का नाम लिखिए।
  2. कृष्ण की कितनी सेनाएँ युद्ध में भाग लेने जा रही है ?
  3. सेतु के दोनों छोर कौन से हैं?
  4. कृष्ण की सेनाएँ कौनसे मार्ग से जा रही हैं ?

2. उत्तर लिखिए।   (2)

राधा का सेतु जिस्म ऐसा है .....

  1. ____________
  2. ____________
  3. ____________
  4. ____________

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए:  (2)

“वृक्ष की उपयोगिता" इस विषय पर अपने विचार लिखिए।


'कनुप्रिया' में अवचेतन मन में बैठी राधा चेतनावस्था में स्थित राधा को संबोधित करती है।” इस बात को स्पष्ट कीजिए।


'मेरा यह सेतु-रूपी शरीर काँपता हुआ निर्जन और निरर्थक रह गया है।'- इसे 'कनुप्रिया' के आधार पर स्पष्ट कीजिए।


भगवान की सर्वश्रेष्ठ उपासना के रूप में इसे प्रतिष्ठित किया गया है:


निम्नलिखित काव्य पंक्तियों को पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

यह आम्रवृक्ष की डाल
उनकी विशेष प्रिय थी
तेरे न आने पर
सारी शाम इसपर टिक
उन्होंने वंशी में बार-बार
तेरा नाम भरकर तुझे टेरा था-

आज यह आम की डाल
सदा-सदा के लिए काट दी जाएगी
क्योंकि कृष्ण के सेनापतियों के
वायुवेगगामी रथों की
गगनचुंबी ध्वजाओं में
यह नीची डाल अटकती है
और यह पथ के किनारे खड़ा
छायादार पावन अशोक वृक्ष

आज खंड-खंड हो जाएगा तो क्या-
यदि ग्रामवासी, सेनाओं के स्वागत में
तोरण नहीं सजाते
तो क्या सारा ग्राम नहीं उजाड़ दिया जाएगा?

(१) कारण लिखिए: (२)

  1. आम्रवृक्ष की डाल सदा के लिए काट दी जाएगी - ______
  2. छायादार अशोक वृक्ष खंड-खंड हो जाएगा - ______

(२) उचित मिलान कीजिए: (२)

(१) वृक्ष टहनी
(२) ग्राम राह
(३) पथ गाँव
(४) डाल पेड़

(३) ‘युद्ध के दुष्परिणाम’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)


निम्नलिखित काव्य पंवितियाँ पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

घाट से आते हुए
कदंब के नीचे खड़े कनु को
ध्यानमग्न देवता समझ, प्रणाम करने
जिस राह से तू लौटती थी बावरी
आज उस राह से न लौट
उजड़े हुए कुंज
रौंदी हुई लताएँ
आकाश पर छाई हुई धूल
क्या तुझे यह नहीं बता रही
कि आज उस राह से
कृष्ण की अठारह अक्षौहिणी सेनाएँ
युद्ध में भाग लेने जा रही हैं!
आज उस पथ से अलग हटकर खड़ी हो बावरी!
लताकुंज की ओट
छिपा ले अपने आहत प्यार को।
  1. कारण लिखिए:      [2]
    1. राधा को उस राह से ना लौटने के लिए कहा - ______
    2. राधा को पथ से हटकर खड़े होने को कहा - ______
  2. उचित मिलान कीजिए:     [2]
    (१) ध्यानमग्न राधा
    (२) बावरी प्यार
    (३) अक्षौहिणी देवता
    (४) आहत सेनाएँ
  1. "वर्तमान युग में युद्ध नहीं शांति चाहिए" इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए।     [2]

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग ८० से १०० शब्दों में लिखिए:

"राधा ने चरम तन्मयता के क्षणों में डूबकर जीवन की सार्थकता पाई है," इस कथन को स्पष्ट कौजिए।


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