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Question
कणों का दीर्घ परास व्यवस्था क्रम होने पर भी सामान्यत: क्रिस्टल आदर्श क्यों नहीं होते?
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Solution
क्रिस्टलीय ठोसों के अवयवी कणों की व्यवस्था में दीर्घ परास नियमितता पाई जाती है। क्रिस्टलीकरण के दौरान आदर्श व्यवस्था से कुछ भिन्नता (यानी दोष) आ सकती है इसलिए क्रिस्टल आदर्श नहीं होते।
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‘अक्रिस्टलीय' पद को परिभाषित कीजिए। अक्रिस्टलीय ठोसों के कुछ उदाहरण दीजिए।
काँच, क्वार्टज जैसे ठोस से किस प्रकार भिन्न है? किन परिस्थितियों में क्वार्टज को काँच में रूपान्तरित किया जा सकता है?
निम्नलिखित को अक्रिस्टलीय तथा क्रिस्टलीय ठोसों में वर्गीकृत कीजिए।
पॉलियूरिथेन, नैफ्थेलीन, बेन्जोइक अम्ल, टेफ्लॉन, पोटैशियम नाइट्रेट, सेलोफेन, पॉलिवाइर्निल क्लोराइड, रेशा काँच, ताँबा।
निम्नलिखित में से कौन-सा अभिलक्षण क्रिस्टलीय ठोस का नही है?
निम्नलिखित में से कौन-सा एक अक्रिस्टलीय ठोस है?
अक्रिस्टलीय ठोसों के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
क्रिस्टलीय ठोसों के निश्चित गलनांक का कारण है ______।
अक्रिस्टलीय ठोसों को ______ कह सकते हैं।
- छद्म ठोस
- वास्तविक ठोस
- अतिशीतित द्रव
- अतिशीतित ठोस
क्वार्ट्ज़ काँच के निम्नलिखित में से कौन से अभिलक्षण नहीं होते?
(i) यह एक क्रिस्टलीय ठोस होता है।
(ii) सभी दिशाओं में इसका अपवर्तनांक समान होता है।
(iii) इसकी गलन की ऊष्मा निश्चित होती है।
(iv) इसे अतिशीतित द्रव भी कहते हैं।
अक्रिस्टलीय ठोस किन परिस्थितियों में क्रिस्टलीय ठोस में परिवर्तित हो जाता है?
