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कवि के कंठ से निकले गीत का क्या प्रभाव पड़ेगा? - Hindi (हिंदी)

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Question

कवि के कंठ से निकले गीत का क्या प्रभाव पड़ेगा?

One Line Answer
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Solution

कवि के कंठ से निकले गीत जीर्ण-शीर्ण विचारधाराओं और रुढ़िवादी विचारों का नाश हो जाएगा।

shaalaa.com
पद्य (Poetry) (Class 7)
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Chapter 20: विप्लव - गायन - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

NCERT Hindi - Vasant Part 2 Class 7
Chapter 20 विप्लव - गायन
अतिरिक्त प्रश्न | Q 11

RELATED QUESTIONS

 इस कविता के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?


बार-बार बोलो और नीचे दिए गए शब्द से वाक्य बनाओ।
फल - पल

कविता की कुछ पंक्तियाँ छाँटकर लिखो जिनसे पता लगता है कि कवि को इस बात पर पूरा भरोसा है कि एक दिन सबको मान मिलेगा।


नीचे लिखी पंक्ति को पढ़कर उत्तर दो।

"सौ सौ स्वर्ग उतर आएँगे, सूरज सोना बरसाएँगे। दूध पूत के लिए बदल देगें तारों की चाल"

क्या ऊपर लिखी बातें संभव हो सकती हैं? कारण भी पता करो?


कवि एक नया संसार बसाना चाहता है जहाँ मानव की मेहनत पूजी जाए, जहाँ जनता में एकता हो, जहाँ सब समान हों, जहाँ सभी सुखी हों। तुम्हें अपने संसार में ऊपर लिखी बातें नज़र आती हैं या नहीं? इन बातों के होने या न होने का क्या कारण है?


बताओ तुम ये काम कैसे करोगे? शिक्षक से भी सहायता लो।

नया भूगोल बनाना


बहुत से लोग पक्षी पालते हैं-

पक्षियों को पालना उचित है अथवा नहीं? अपने विचार लिखिए।


स्वर्ण-श्रृंखला और लाल किरण - सी में रेखांकित शब्द गुणवाचक विशेषण हैं। कविता से ढूँढ़कर इस प्रकार के तीन और उदाहरण लिखिए।


कठपुतली को गुस्सा क्यों आया?


पहली कठपुतली ने स्वयं कहा कि-'ये धागे/क्यों हैं मेरे पीछे-आगे?/इन्हें तोड़ दो;/मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।'-तो फिर वह चिंतित क्यों हुई कि-'ये कैसी इच्छा/मेरे मन में जगी?' नीचे दिए वाक्यों की सहायता से अपने विचार व्यक्त कीजिए-

•उसे दूसरी कठपुतलियों की ज़िम्मेदारी महसूस होने लगी।

•उसे शीघ्र स्वतंत्र होने की चिंता होने लगी।

•वह स्वतंत्रता की इच्छा को साकार करने और स्वतंत्रता को हमेशा बनाए रखने के उपाय सोचने लगी।

•वह डर गई, क्योंकि उसकी उम्र कम थी।


'बहुत दिन हुए / हमें अपने मन के छंद छुए।'- इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है? अगले पृष्ठ पर दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अर्थ लिखिए-

(क) बहुत दिन हो गए, मन में कोई उमंग नहीं आई।

(ख) बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता-सी कोई बात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।

(ग) बहुत दिन हो गए, गाने-गुनगुनाने का मन नहीं हुआ।

(घ) बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और न मन में खुशी आई।


कविता में चित्रित शाम और सूर्यास्त के दृश्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।


निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित-हिंदी रूप लिखिए-

जैसे-परे-पड़े (रे, ड़े)

बिपति बादर
मछरी सीत

सज्जन और विद्वान के संपत्ति संचय का क्या उद्देश्य होता है?


स्वाधीनता संग्राम के दिनों में अनेक कवियों ने स्वाधीनता को मुखर करने वाली ओजपूर्ण कविताएँ लिखीं। माखनलाल चतुर्वेदी, मैथिलीशरण गुप्त और सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की ऐसी कविताओं की चार-चार पंक्तियाँ इकट्ठा कीजिए जिनमें स्वाधीनता के भावे ओज से मुखर हुए हैं।


घमंड करने को मनुष्य के विकास का बाधक समझा जाता है। क्या आपमें घमंड करने की प्रवृत्ति है?


बहुविकल्पी प्रश्न

‘भोर और बरखा’ कविता की रचयिता हैं?


बहुविकल्पी प्रश्न

इस कविता में किसको जगाने का प्रयास किया जा रहा है?


बहुविकल्पी प्रश्न

इस कविता में किस ऋतु का वर्णन है


माता यशोदा अपने कृष्ण को किस प्रकार और क्या कहकर जगा रही है?


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