Advertisements
Advertisements
Question
‘जूझ’ शीर्षक के औचित्य पर विचार करते हुए यह स्पष्ट करें कि क्या यह शीर्षक कथा नायक की किसी केंद्रीय चारित्रिक विशेषता को उजागर करता हैं।
Advertisements
Solution
जूझ का साधारण अर्थ है जूझना अथवा संघर्ष करना। यह उपन्यास अपने नाम की सार्थकता को सिद्ध करता है। उपन्यास का कथानायक भी जीवनभर स्वयं से और अपनी परिस्थितियों से जूझता रहता है। यह शीर्षक कथानायक के संघर्षशील वृत्ति का परिचय देता है। हमारे कथानायक में संघर्ष की भावना है। वह संघर्ष करने के लिए मजबूर है लेकिन उसका यह संघर्ष ही उसे एक दिन पढ़ा-लिखा इंसान बना देता है। इस संघर्ष में भी उसने आत्मविश्वास बनाए रखा है। यद्यपि परिस्थितियाँ उसके विरुद्ध होती हैं तथापि वह अपने आत्मविश्वास के बल इस प्रकार की परिस्थितियों से जूझने में सफल हो जाता है। वास्तव में कथानक की संघर्षशीलता ही उसकी चारित्रिक विशेषता है। उपन्यास के शीर्षक से यही केंद्रीय विशेषता उजागर होती है।
RELATED QUESTIONS
स्वय कविता रच लेने का आत्मविश्वास लखक के मन में कैस पैदा हुआ?
श्री सोंदलगकर के अध्यापन की उन विशषताओं को रेखांकित करें जिन्होंने कविताओं के प्रति लेखक के मन में रुचि जगाई।
कविता के प्रति लगाव से पहल और उसके बाद अकेलेपन के प्रति लेखक की धारणा में क्या बदलाव आया?
आपके खयाल से पढ़ाई-लिखाई के सबध में लेखक और दत्ता जी राव का रवैया सही था या लखक के पिता का? तर्क सहित उत्तर दें।
दत्ता जी राव से पिता पर दबाव डलवाने के लिए लेखक और उसकी माँ को एक झूठ का सहारा लेना पड़ा। यदि झूठ का सहारा न लेना पड़ता तो आगे का घटनाक्रम क्या होता?
दादा कोल्हू जल्दी क्यों लगाना चाहते थे?
‘जूझ’ उपन्यास मूलतः किस भाषा में लिखा गया है?
लेखक आनंद यादव की माँ के अनुसार पढ़ाई की बात करने पर लेखक का पिता कैसे गुर्राता है?
‘जूझ’ कहानी लेखक की किस प्रवृत्ति को उद्घाटित करती है?
'जूझ' - कहानी का लेखक पढ़ना क्यों चाहता था?
जूझ कहानी में लेखक का मन पाठशाला जाने के लिए तड़पता था। लेखक के पाठशाला ना जाने पाने का कारण था?
'जूझ' - कहानी के शीर्षक का अर्थ क्या है?
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-
उस घटना का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए जिससे पता चलता है कि लेखक की माँ उसके मन की पीड़ा समझ रही थी? 'जूझ' कहानी के आधार पर बताइए।
