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“जल ही जीवन है। जल के बिना सुनहरे कल की कल्पना करना व्यर्थ है।” वर्तमान युग में जल संकट की समस्या किस प्रकार विकराल रूप लेती जा रही है? - Hindi (Indian Languages)

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Question

निचे दिए गए विषय पर निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो:

“जल ही जीवन है। जल के बिना सुनहरे कल की कल्पना करना व्यर्थ है।” वर्तमान युग में जल संकट की समस्या किस प्रकार विकराल रूप लेती जा रही है? जल संरक्षण की आवश्यकता तथा इसके विभिन्‍न उपायों पर प्रकाश डालते हुए अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।

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Solution

जल ही जीवन है

“रहिए पानी राखिए, बिन पानी सब सून।” कवि रहीम की ये पंक्तियाँ आज के युग में मात्र कविता नहीं, बल्कि एक कठोर चेतावनी बन गई हैं। पृथ्वी पर जीवन का आधार ‘जल’ है। मानव शरीर से लेकर सूक्ष्म जीवों और विशाल वनस्पतियों तक, हर किसी का अस्तित्व पानी पर टिका है। जल केवल प्यास बुझाने का साधन नहीं, बल्कि सभ्यता के विकास का कारक भी है। इतिहास गवाह है कि सभी बड़ी सभ्यताएँ नदियों के किनारे ही विकसित हुईं। अतः यह कहना पूर्णतः सत्य है कि ‘जल ही जीवन है’ और इसके बिना सुनहरे कल की कल्पना करना व्यर्थ है।

वर्तमान युग में विकराल होता जल संकट

आज के औद्योगिक और आधुनिक युग में जल संकट एक भयावह समस्या का रूप ले चुका है। जिस प्रकार जनसंख्या में तीव्र वृद्धि हो रही है, उसी अनुपात में पानी की खपत बढ़ी है, किंतु स्रोत सीमित होते जा रहे हैं। शहरों में कंक्रीट के जंगल खड़े होने के कारण वर्षा का जल जमीन के अंदर नहीं जा पाता, जिससे भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। भारत के कई बड़े शहर जैसे चेन्नई, दिल्ली और बेंगलुरु ‘जीरो डे’ (Zero Day) की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ नलों में पानी आना बंद हो सकता है। नदियों का प्रदूषित होना, ग्लेशियरों का पिघलना और वर्षा चक्र में अनिश्चितता इस संकट को और अधिक गहरा बना रही है।

जल संरक्षण की आवश्यकता

जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि हमने आज पानी नहीं बचाया, तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए केवल सूखा और अकाल बचेगा। पानी की कमी का सीधा असर कृषि पर पड़ता है, जिससे खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। बिना पानी के उद्योग-धंधे ठप्प हो जाएंगे और अंततः पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। जल संरक्षण केवल मनुष्य के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को बचाए रखने के लिए अनिवार्य है।

जल संरक्षण के विभिन्न उपाय

इस समस्या का समाधान केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत प्रयासों से ही संभव है। इसके कुछ प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:

  1. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting): यह सबसे प्रभावी तरीका है। छतों पर गिरने वाले वर्षा के जल को पाइपों के माध्यम से टैंकों या जमीन के अंदर भेजकर पुनर्भरण किया जा सकता है।
  2. दैनिक जीवन में बचत: ब्रश करते समय नल खुला न छोड़ें, फव्वारे के स्थान पर बाल्टी का प्रयोग करें और कारों को पाइप से धोने के बजाय गीले कपड़े से साफ करें।
  3. कृषि में आधुनिक तकनीक: किसानों को ‘ड्रिप सिंचाई’ और ‘स्प्रिंकलर’ पद्धति अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, जिससे कम पानी में अधिक उपज ली जा सके।
  4. प्रदूषण पर नियंत्रण: कारखानों के जहरीले कचरे और नालियों के गंदे पानी को सीधे नदियों में गिरने से रोकना होगा।
  5. वृक्षारोपण: अधिक से अधिक पेड़ लगाने से मिट्टी की नमी बनी रहती है और वर्षा में सहायता मिलती है।
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