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Question
जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –
मुझे बैंगनी रंग कतई अच्छा नहीं लगता।
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Solution
कतई - बिल्कुल
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सेठ कपड़ा लेने किस दिन आया होगा?
नीचे के वाक्य में कुछ हरी-भरी सब्ज़ि का नाम छुपा हैं। ढूँढ़ो तो ज़रा –
मामू लीला मौसी कहाँ है?
नीचे के वाक्य में कुछ हरी-भरी सब्ज़ि का नाम छुपा हैं। ढूँढ़ो तो ज़रा –
शीला के पास बैग नहीं है।
नीचे के वाक्य में कुछ हरी-भरी सब्ज़ि का नाम छुपा हैं। ढूँढ़ो तो ज़रा –
गोपाल कबूतर उड़ा दो।
चित्र को देखो। क्या इसे देखकर तुम्हें कुछ मुहावरा या कहावत याद आती हैं? उन्हें लिखो।
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आरसी |
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सही जोड़ो मिलाओ।

चित्र को देखो। क्या इसे देखकर तुम्हें कुछ मुहावरा या कहावत याद आती हैं? उन्हें लिखो।
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ग्यारह |
| __________________ | |
एक रुमाल या कोई छोटा-सा कपड़ा उछालकर देखो। किसका रुमाल सबसे ऊँचा उछलता है?
रंगाई शब्द रंग से बना है। इसी तरह और शब्द बनाओ –
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रंग |
रंगाई |
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साफ़ |
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चढ़ |
______ |
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बुन |
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जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –
मैं तुम्हारा हुनर देखना चाहता हूँ।
जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –
सेठ बुलंद आवाज़ में बोला।
जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –
सेठ को ईर्ष्या होने लगी।
जिन शब्द के नीचे रेखा खिंची है, उसका मतलब बताओ –
रंग के बारे में मेरी कोई खास पसंद तो है नहीं।
आफ़ंती के बारे में कुछ वाक्य लिखो। तुम उसके कपड़ों, शक्ल-सूरत, पालतू पशु, बुद्धि आदि के बारे में बता सकती हो।
दिन – दीन मेला – मैला।
ऊपर दिए गए शब्दों के जोड़ों में केवल एक मात्रा बदली गई है। किसी भी मात्रा को बदलने से अर्थ भी बदल जाता है। ऐसे और जोड़े बनाओ। देखें, कौन सबसे ज़्यादा जोड़े ढूँढ़ पाता है।
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कभी-कभी हम अपनी बात करते हुए ऐसे शब्द भी बोल देते हैं, जिनकी कोई ज़रूरत नहीं होती। इसी तरह इस वाक्य में कुछ शब्द फ़ालतू हैं। उसे ढूँढ़कर अलग करो –
बाज़ार से हरा धनिया पत्ती भी ले आना।
कभी-कभी हम अपनी बात करते हुए ऐसे शब्द भी बोल देते हैं, जिनकी कोई ज़रूरत नहीं होती। इसी तरह इस वाक्य में कुछ शब्द फ़ालतू हैं। उसे ढूँढ़कर अलग करो –
अरे! रस में इतनी सारी ठंडी बर्फ़ क्यों डाल दी?
कभी-कभी हम अपनी बात करते हुए ऐसे शब्द भी बोल देते हैं, जिनकी कोई ज़रूरत नहीं होती। इसी तरह इस वाक्य में कुछ शब्द फ़ालतू हैं। उसे ढूँढ़कर अलग करो –
ज़ेबा, बगीचे से दो ताज़े नीबू तोड़ लो।
कभी-कभी हम अपनी बात करते हुए ऐसे शब्द भी बोल देते हैं, जिनकी कोई ज़रूरत नहीं होती। इसी तरह इस वाक्य में कुछ शब्द फ़ालतू हैं। उसे ढूँढ़कर अलग करो –
बेकार की फ़ालतू बात मत करो।


