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Question
| हमारे दैनिक जीवन में PH एक महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। अम्लों तथा क्षारकों की शक्ति इनके द्वारा उत्पन्न क्रमशः H+ आयनों तथा OH− आयनों की संख्या पर निर्भर करती है। किसी विलयन में हाइड्रोजन आयन सांद्रता के मापन द्वारा pH स्केल अम्लों और क्षारकों की शक्ति की प्रागुक्ति में सहायता करता है। |
निम्नलिखित के उत्तर दीजिए:
(a) कोई अम्ल तथा क्षारक कितना प्रबल है, इसकी प्रागुक्ति के लिए किस प्रकार का सूचक प्रयुक्त किया जाता है?
(b) A, B तथा C तीन विलयनों ने क्रमशः 3, 5 और 7 pH दर्शाईं। किस विलयन में H− आयनों की सांद्रता उच्चतम है?
(c) प्रबल अम्ल तथा दुर्बल अम्ल क्या है?
अथवा
(c) (i) किस परिस्थिति में वर्षा जल को अम्ल वर्षा कहते हैं?
(ii) निम्नलिखित अम्लों में दुर्बल अम्लों की पहचान कीजिए:
नाइट्रिक अम्ल, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, एसीटिक अम्ल, सल्फ्यूरिक अम्ल, फॉर्मिक अम्ल
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Solution
(a) यूनिवर्सल इंडिकेटर का उपयोग यह ज्ञात करने के लिए किया जाता है कि कोई अम्ल या क्षार कितना प्रबल है।
(b) विलयन A (pH = 3) में H+ आयनों की सांद्रता सबसे अधिक होती है (कम pH का अर्थ अधिक अम्लीयता है)।
(c) प्रबल अम्ल: वे अम्ल जो जलीय विलयन में पूर्णतः आयनित हो जाते हैं (जैसे HCl, H2SO4)।
दुर्बल अम्ल: वे अम्ल जो जलीय विलयन में आंशिक रूप से आयनित होते हैं (जैसे CH3COOH)।
अथवा
(c) (i) जब वर्षा के जल का pH 5.6 से कम हो जाता है, तो उसे अम्लीय वर्षा कहते हैं। यह SO2 और NO2 जैसी अम्लीय गैसों के घुलने के कारण होता है।
(ii) दुर्बल अम्ल एसीटिक अम्ल और फॉर्मिक अम्ल हैं।
