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Question
‘घर की याद’ कविता में कवि सावन के बादलों को दूत बनाकर अपने परिवार के पास संदेश ले जाने का आग्रह करता है। प्रकृति के उपादानों की कल्पना संदेशवाहक के रूप में करने के अनेक उदाहरण साहित्य में मिलते हैं। शिक्षक, पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता से ऐसी कुछ रचनाओं के बारे में पता लगाइए और बताइए कि इनमें प्रकृति के किन उपादानों को संदेशवाहक बनाया गया है?
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Solution
प्रकृति को संदेशवाहक के रूप में प्रयोग करने की परंपरा साहित्य में अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रही है। संस्कृत साहित्य में इसे “संदेश काव्य” कहा जाता है, जिसमें संदेश पहुँचाने के लिए बादल, पक्षी और हवा जैसे प्राकृतिक तत्वों का उपयोग किया जाता है।
कुछ प्रमुख रचनाएँ और उनके संदेशवाहक इस प्रकार हैं-
मेघदूत – कालिदास
- संदेशवाहक: बादल (मेघ)
- इस प्रसिद्ध काव्य में एक यक्ष अपने प्रिय तक संदेश भेजने के लिए बादल को दूत बनाता है।
- यह बादल उसके प्रेम और विरह की भावना को लेकर हिमालय तक पहुँचता है।
घटकरपर काव्य
- संदेशवाहक: प्रातःकालीन बादल
- इस रचना में एक विरही नायिका अपने प्रिय तक संदेश पहुँचाने के लिए बादल से अनुरोध करती है।
संदेश काव्य परंपरा
- संदेशवाहक: पक्षी (हंस), हवा (पवन), बादल आदि
- इस परंपरा में प्रकृति के विभिन्न तत्वों को भावनाओं के वाहक के रूप में देखा गया है, जो दूर तक संदेश पहुँचाने में सक्षम होते हैं।
‘घर की याद’ (भवानीप्रसाद मिश्र)
- संदेशवाहक: सावन के बादल
- इस कविता में कवि बादलों के माध्यम से अपने परिवार तक संदेश पहुँचाने की इच्छा व्यक्त करता है, जो संदेश काव्य परंपरा से जुड़ा हुआ है।
इन रचनाओं से यह स्पष्ट होता है कि साहित्य में प्रकृति केवल एक पृष्ठभूमि नहीं होती, बल्कि वह मानवीय भावनाओं की संवाहक भी बन जाती है। बादल, हवा और पक्षियों जैसे प्राकृतिक तत्वों को संदेशवाहक बनाकर कवि अपने प्रेम, विरह और संवेदनाओं को अधिक प्रभावशाली रूप में व्यक्त करते हैं।
