Advertisements
Advertisements
Question
धातो हेत्वर्थकम् अव्ययं प्रयुज्य वाक्यं पुनर्लिखत।
शृगालः द्राक्षाफलम् (खाद्) उत्पतति।
Advertisements
Solution
शृगालः द्राक्षाफलम् खादितुम् उत्पतति।
RELATED QUESTIONS
सन्धिं कुरुत।
शशवत् + च = ______
एकवचने परिवर्तयत।
नद्यः वहन्ति।
सन्धिविग्रह कुरुत।
नार्यस्तु = ______
सन्धिविग्रहं कुरुत।
सर्वास्तत्र - ______
रूपपरिचयं कुरुत।
पिपासया
सुभाषितात् समानार्थकशब्दं लिखत।
अध्यापकः - ______
सन्धिविग्रहं कुरुत।
इतोऽपि = ______
सन्धिविग्रहं कुरुत।
तथैव = ______
वर्णविग्रहं कुरुत।
स्नानस्य - ______
विरुदधार्थकं शब्दं लिखत।
शुष्कम् × ______
समानार्थकशब्दयुग्मं चिनुत।
मृद् - ______
शब्दस्य वर्णविग्रहं कुरुत।
वर्तन्ते - ______
समानार्थकशब्दं लिखत।
अमरकोषः - ______
समानार्थकशब्दं लिखत।
सुलभम् - ______
समानार्थकशब्दं लिखत।
सरसः - ______
समानार्थकशब्दयुग्मं चिनुत लिखत च।
पक्षिराजः, शूलपाणिः, जलम्, मेघः, शङ्करः, वृक्षः, सिद्धयोगी, गरुडः, तरुः, तोयम्, जलदः, तपस्वी।
विशेषणं लिखत।
______ नभस्तलम्।
समानार्थकशब्दं चिनुत लिखत च।
वदनम् - ______
समानार्थकशब्दं चिनुत लिखत च।
असत्यम् - ______
श्लोकात् षष्ठयन्तपदे चिनुत लिखत च।
प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
अयं घटः सक्तुपिष्टेन पूर्णः।
वर्णविग्रहं कुरुत।
दुर्भिक्षम् - ______
सूचनानुसार वाक्यपरिवर्तन कुरुत।
सोमशर्मा मम समीपम् आगमिष्यति। ('मम' स्थाने 'पितृ' शब्दस्य योग्य रूपं लिखत।)
प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
अन्ये मुनयः वेदान्तज्ञानार्थं वाल्मीकिऋषिम् उपगच्छन्ति।
धातो हेत्वर्थकम् अव्ययं प्रयुज्य वाक्यं पुनर्लिखत।
शशकः निद्रां (कृ) अगच्छत्।
सवर्णदीर्घसन्धिः।
उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ
गुरु + ______ = गुरूपदेशः।
सवर्णदीर्घसन्धिः।
ऋ, ॠ + ऋ ,ॠ = ॠ
पितृ + ______ = पितृतम्।
भवान्/भवती -स्थाने त्वं योजयित्वा वाक्यानि लिखत।
भवती बन्धनं मुञ्चताम्।
भवान्/भवती -स्थाने त्वं योजयित्वा वाक्यानि लिखत।
भवान् शीघ्रं पृच्छतु।
अयादिसन्धिः।
ओ/औ + कोऽपि स्वरः = अव्/आव्
______ + एव = द्वावेव।
वृद्धिसन्धिः।
अ/आ + ए/ऐ = ऐ
मम + ______ = ममैश्वर्यम्।
वृद्धिसन्धिः।
अ/आ + ओ/औ = औ
______ + ओजः = ममौजः।
वृद्धिसन्धिः।
अ/आ + ओ/औ = औ
तव + ______ = तवौदार्यम्।
पूर्वकालवाचक -धातुसाधित-अव्ययं उपयुज्य वाक्यं लिखत।
सः ______ गच्छति। (खाद्)
पूर्वकालवाचक-धातुसाधित-अव्ययं उपयुज्य वाक्यं लिखत।
धनं ______ (लभ्) सोमदत्तः महानगरम् असरत्।
तालिकां पूरयत।
| क्रियापदम् | मूलधातुः | गणः, पदम् | लकारः | पुरुषः | वचनम् |
| १. क्षमस्व | ______ | ______ | लोट् | ______ | ______ |
| २. लभताम् | ______ | १ आ.प. | ______ | ______ | ______ |
| ३. नृत्यन्तु | ______ | ______ | ______ | ______ | बहुवचनम् |
| ४. रचय | रच् | ______ | ______ | ______ | ______ |
| ५. उत्तरत | उत् + तृ-तर् | ______ | ______ | ______ | ______ |
| ६. लिखत | ______ | ६ प. प. | ______ | ______ | ______ |
| ७. गायाम | ______ | ______ | लोट् | ______ | ______ |
| ८. भवन्तु | ______ | ______ | ______ | प्रथम | ______ |
आज्ञार्थ-रूपाणि चिनुत लिखत च।
हे राधिके, फलानि गणय।
रूपाभ्यासं कुरुत।
विन्देमहि
रूपाभ्यासं कुरुत।
पठेत्
तालिकां पूरयत।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| ______ | ______ | जगन्ति | प्रथमा |
| अप्सरसा | ______ | ______ | तृतीया |
| ______ | ______ | मरुत्सु | सप्तमी |
| ______ | भूभृतोः | ______ | षष्ठी |
| सरितः | ______ | ______ | पञ्चमी |
| ______ | तेजसी | ______ | द्वितीया |
| ______ | ______ | उषस्सु | सप्तमी |
समस्तपदं लिखत।
ग्रामं गतः - ______
समस्तपदं लिखत।
काकाय बलिः - ______
समस्तपदं लिखत।
चोरात् भयम् - ______
समस्तपदं लिखत।
भाषायाः अभ्यासः - ______
अधोदत्तान् शब्दान् पठत। एते शब्दस्य समासे कां विभक्तिम् अपेक्षन्ते इति लिखत।
मुक्त - ______
'क्त' प्रत्ययान्तरूपैः रिक्तस्थानानि पूरयत।
जनैः पूजा ______। (कृ)
'क्त' प्रत्ययान्तरूपैः रिक्तस्थानानि पूरयत।
बिडालेन क्षीरं ______। (पा)
'क्तवतु' प्रत्ययान्तरूपैः रिक्तस्थानानि पूरयत।
पुरुषः कार्यं ______। (कृ)
लकार-तालिकां पूरयत।
लट् |
एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | |
| वन्दते | ______ | ______ | प्रथमपुरुषः | |
| ______ | नृत्यावहे | ______ | उत्तमपुरुषः | |
| ______ | ______ | कथयथ | मध्यमपुरुषः |
रूपाणि परिचिनुत।
| अ. क्र. | धातुः | गणः/पदं | कालः | पुरषः | वचनम् | |
| १ | प्राप्स्यामि | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
| २ | अहरत् | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
| ३ | पूज्यते | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
| ४ | चोरयतु | ______ | ______ | ______ | ______ | ______ |
सवर्णदीर्घसन्धिः।
______ + एतत् = खल्वेतत्।
सन्धिकोषः।
पूर्वमुच्यते = ______ + उच्यते।
सन्धिकोषः।
धनुरासनमुच्यते = ______ + उच्यते।
सन्धिकोषः।
जानोर्महिर्वेष्टितवामपाद्म् = जानोः + बहिः + ______।
सन्धिकोषः।
अधुनापि = ______ + अपि।
सन्धिकोषः।
सर्वास्तत्राफलाः = ______ + ______ + अफलाः।
सन्धिकोषः।
______ = क्रियावान् + सः।
सन्धिकोषः।
प्रतिदिनमिव = ______ + इव।
सन्धिकोषः।
तदपि = ______ + अपि।
सन्धिकोषः।
यो भवेत् = यः + ______।
सन्धिकोषः।
समाप्तमन्वेषणकार्यम् = ______ + अन्वेषणकार्यम्।
सन्धिकोषः।
तस्यदिर्न = ______ + आदिः + ______।
सन्धिकोषः।
पराभवमाप्नोति = ______ + आप्नोति।
सन्धिकोषः।
विक्रयणात्प्रभूतम् = ______ + प्रभूतम्।
सन्धिकोषः।
तस्याहम् = तस्य + ______।
सन्धिकोषः।
चिन्तामसम्भाव्याम् = चिन्ताम् + ______।
सन्धिकोषः।
आगतास्मि = ______ + अस्मि।
सन्धिकोषः।
दारकद्वयमुपनीतम् = दारकद्वयम् + ______।
'इदम्' सर्वनाम नपुंसकलिङ्गम्।
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| इदम् | ______ | ______ | प्रथमा |
| इदम्/एनत् | ______ | ______ | द्वितीया |
भवत् आदरार्थकं सर्वनाम।
भवत् - स्त्रीलिङ्गम् (भवती)
| एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | विभक्तिः |
| भवती | ______ | ______ | प्रथमा |
| भवतीम् | ______ | ______ | द्वितीया |
| भवत्या | ______ | ______ | तृतीया |
| भवत्यै | ______ | ______ | चतुर्थी |
| भवत्याः | ______ | ______ | पञ्चमी |
| भवत्याः | ______ | ______ | षष्ठी |
| भवत्याम् | ______ | ______ | सप्तमी |
| हे भवति | ______ | ______ | सम्बोधनम् |
अव्ययस्य विशिष्टं अव्ययरूपस्य आवश्यकता भवति। अधोक्तम् अस्ति।
उभयतः = ______
अव्ययस्य विशिष्टं अव्ययरूपस्य आवश्यकता भवति। अधोक्तम् अस्ति।
अलम् = ______
