Advertisements
Advertisements
Questions
देवसेना की हार या निराशा के क्या कारण हैं?
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए-
देवसेना की हार या निराशा के क्या कारण हैं?
Advertisements
Solution
सम्राट स्कंदगुप्त से राजकुमारी देवसेना प्रेम करती थी। उसने अपने प्रेम को पाने के लिए बहुत प्रयास किए। परन्तु उसे पाने में उसके सारे प्रयास असफल सिद्ध हुए। यह उसके लिए घोर निराशा का कारण था। वह इस संसार में बंधु-बांधवों रहित हो गई थी। पिता पहले ही मृत्यु की गोद में समा चुके थे तथा भाई भी युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुआ था। वह दर-दर भिक्षा माँगकर गुजरा कर रही थी। उसे प्रेम का ही सहारा था। परन्तु उसने भी उसे स्वीकार नहीं किया था।
RELATED QUESTIONS
"मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई"‐ पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
कवि ने आशा को बावली क्यों कहा है?
"मैंने निज दुर्बल ..... होड़ लगाई" इन पंक्तियों में 'दुर्बल पद बल' और 'हारी होड़' में निहित व्यंजना स्पष्ट कीजिए।
काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-
श्रमित स्वप्न की मधुमाया ........... तान उठाई।
काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
लौटा लो ...... लाज गँवाई।
