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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 7th Standard

दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ: साहस _______ ______ - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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Question

दाएँ पंख में उपसर्ग तथा बाऍं पंख में प्रत्यय लगाकर शब्द लिखाे तथा उनके वाक्य बनाओ:

 

__________________

__________________

Grammar
Very Short Answer
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Solution

साहस

उपसर्ग - दुस्साहस - पाकिस्तानी सैनिकों ने जब सीमा का उल्लंघन करने का दुस्साहस किया तब भारतीय सैनिकों ने उनको मुँह तोड़ जवाब दिया।

प्रत्यय - साहसी - सम्रट अशोक बहुत ही साहसी पुरुष थे।

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व्याकरण
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Chapter 1.06: ‘पृथ्‍वी’ से ‘अग्‍नि’ तक - भाषा की ओर [Page 17]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Sulabhbharati [English] Standard 7 Maharashtra State Board
Chapter 1.06 ‘पृथ्‍वी’ से ‘अग्‍नि’ तक
भाषा की ओर | Q 1. (५) | Page 17
Balbharati Hindi Sulabhbharati Ekatmik [Marathi] Standard 7 Maharashtra State Board
Chapter 6 'पृथ्वी' से 'अग्नि' तक
अंतःपाठ प्रश्न | Q १८. (५) | Page 52

RELATED QUESTIONS

पाठों में आए हुए उपसर्ग और प्रत्‍ययवाले शब्‍द ढूँढ़ो तथा उनके उपसर्ग/प्रत्‍यय अलग करके मूल शब्‍द लिखो।


शब्‍द कोश की सहायता से रेखांकित शब्द का विलोम खोजिए तथा उससे नया वाक्‍य लिखिए:

गर्मियों में सारी धरती शुष्क हो जाती है।


निम्न संधि का विग्रह कर उसका प्रकार लिखिए:

हमारी मंजिल थी सूर्यास्‍त केंद्र बिंदु।


निम्नलिखित मुहावरे/कहावत में से अनुपयुक्त शब्द काटकर उपयुक्त शब्द लिखिए:

लाठी - पानी - का - बैर - ______ - ______ - ______ - ______


निम्नलिखित शब्दों के लिंग बदलो और वाक्य बनाकर लिखो: 

१. चाचा जी प्रकल्प में मेरा मार्गदर्शन करते हैं।

५. ______________________________ 

२. ______________________________

६. ______________________________
३. ______________________________ ७. ______________________________

४. ______________________________

८. ______________________________

उचित विराम चिह्न लगाओ:

                                    घर
किसी दिन हम भी आपके आएँगे।


निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द इस कहानी से ढूँढकर बताओ।


निम्नलिखित शब्दों का रोमन लिपि में लिप्यंतरण करो। 

  


चित्र के आधार पर काल संबंधी वाक्य बनाओ और समझो :


‘खेलना’ इस क्रिया के सकर्मक, अकर्मक, संयुक्त, सहायक और प्रेरणार्थक रूपों का वाक्यों में प्रयोग करो और लिखो।


अशुद्ध शब्द को रेखांकित कर वाक्य शुद्ध करके लिखिए:-

अनेक व्यक्तियों ने प्रदर्शनी देखी।


उचित विरामचिह्न लगाइए:-

भक्तिकाल में दो धाराएँ थीं सगुण धारा, निर्गुण धारा


निम्‍न वाक्‍य के उद्देश्य और विधेय पहचानकर लिखिए:-

पिता जी के पास अथाह खजाना था।


निम्‍न वाक्‍य के उद्देश्य और विधेय पहचानकर लिखिए:-

हमें स्‍कूली शिक्षा में संगीत सबसे पहले सिखाई जाती है।


निर्देशानुसार संधि विच्छेद, संधि तथा उनका नामोल्लेख कीजिए:

संधि संधि विच्छेद संधि का प्रकार
उपर्युक्त ______ + ______  

कुछ भाषाओं के शब्द किसी भी अन्य भाषा से मित्रता कर लेते हैं और उन्हीं में से एक बन जाते हैं। अंग्रेजी भाषा के कई शब्द जिस किसी प्रदेश में गए, वहॉं की भाषाओं में घुलमिल गए। जैसे- ‘बस, रेल, कार, रेडियो, स्टेशन’ आदि। कहा जाता है कि तमिळ भाषा के शब्द केवल अपने परिवार द्रविड़ परिवार तक ही सीमित रहते हैं। वे किसी से घुलना, मिलना नहीं चाहते। अलबत्ता हिंदी के शब्द मिलनसार हैं परंतु सब नहीं; कुछ शब्द तो अंत तक अपना स्वतंत्र अस्तित्व बनाए रखते हैं। अपने मूल रूप में ही वे अन्य स्थानों पर जाते हैं। कुछ शब्द अन्य भाषा के साथ इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनका स्वतंत्र रूप खत्म-सा हो जाता है।

हिंदी में कुछ शब्‍द ऐसे भी पाए जाते हैं जो दो भिन्न भाषाओं के शब्‍दों के मेल से बने हैं। अब वे शब्‍द हिंदी के ही बन गए हैं। जैसे- हिंदी-संस्‍कृत से वर्षगाँठ, माँगपत्र; हिंदी-अरबी/फारसी से थानेदार, किताबघर; अंग्रेजी-संस्‍कृत से रेलयात्री, रेडियोतरंग; अरबी/फारसी-अंग्रेजी से बीमा पाॅलिसी आदि। इन शब्‍दों से हिंदी का भी शब्द संसार समृद्ध हुआ है। कुछ शब्द अपनी मॉं के इतने लाड़ले होते हैं कि वे मॉं-मातृभाषा को छोड़कर औरों के साथ जाते ही नहीं। कुछ शब्द बड़े बिंदास होते हैं, वे किसी भी भाषा में जाकर अपने लिए जगह बना ही लेते हैं।

शब्दों के इस प्रकार बाहर जाने और अन्य अनेक भाषाओं के शब्दों के आने से हमारी भाषा समृद्ध होती है। विशेषतः वे शब्द जिनके लिए हमारे पास प्रतिशब्द नहीं होते। ऐसे हजारों शब्द जो अंग्रेजी, पुर्तगाली, अरबी, फारसी से आए हैं; उन्हें आने दीजिए। जैसे- ब्रश, रेल, पेंसिल, रेडियो, कार, स्कूटर, स्टेशन आदि परंतु जिन शब्दों के लिए हमारे पास सुंदर शब्द हैं, उनके लिए अन्य भाषाओं के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिए। हमारे पास ‘मॉं’ के लिए, पिता के लिए सुंदर शब्द हैं, जैसे- माई, अम्मा, बाबा, अक्का, अण्णा, दादा, बापू आदि। अब उन्हें छोड़ मम्मी-डैडी कहना अपनी भाषा के सुंदर शब्दों को अपमानित करना है।

हमारे मुख से उच्चरित शब्द हमारे चरित्र, बुद्‌धिमत्ता, समझ और संस्कारों को दर्शाते हैं इसलिए शब्दों के उच्चारण के पूर्व हमें सोचना चाहिए। कम-से-कम शब्दों में अर्थपूर्ण बोलना और लिखना एक कला है। यह कला विविध पुस्तकों के वाचन से, परिश्रम से साध्य हो सकती है। मात्र एक गलत शब्द के उच्चारण से वर्षों की दोस्ती में दरार पड़ सकती हैं। अब किस समय, किसके सामने, किस प्रकार के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए इसे अनुभव, मार्गदर्शन, वाचन और संस्कारों द्वारा ही सीखा जा सकता है। सुंदर, उपयुक्त और अर्थमय शब्दों से जो वाक्य परीक्षा में लिखे जाते हैं उस कारण ही अच्छी श्रेणी प्राप्त होती है। अनाप-शनाप शब्दों का प्रयोग हमेशा हानिकारक होता है।

प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वयं की शब्द संपदा होती है। इस शब्द संपदा को बढ़ाने के लिए साहित्य के वाचन की जरूरत होती है। शब्दों के विभिन्न अर्थों को जानने के लिए शब्दकोश की भी जरूरत होती है। शब्दकोश का एक पन्ना रोज एकाग्रता से पढ़ोगे तो शब्द संपदा की शक्ति का पता चल जाएगा।

तो अब तय करो कि अपनी शब्द संपदा बढ़ानी है। इसके लिए वाचन-संस्कृति को बढ़ाओ। पढ़ना शुरू करो। तुम भी शब्द संपदा के मालिक हो जाओगे।

उपर्युक्‍त अंश से पंद्रह शब्‍द ढूँढ़िए उनमें प्रत्‍यय लगाकर शब्‍दों को पुनः लिखिए।


रेखांकित शब्‍द के विलोम शब्‍द लिखकर नए वाक्य बनाइए।

दुकानदार रमा का परिचित था ।


नीचे दिए गए विरामचिह्न के सामने उनके नाम लिखकर इनका उपयोग करते हुए वाक्य बनाइए:

चिह्न नाम वाक्य
;    


मुहावरों का प्रयोग/चयन करनाा ।

‘मुहावरा’ शब्द अरबी भाषा का है जिसका अर्थ ‘अभ्यास होना’ या आदी होना’ होता है। इस प्रकार मुहावरा शब्द अपने-आप में स्वयं मुहावरा है, क्योंकि यह अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर असामान्य अर्थ प्रकट करता है।


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