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Maharashtra State BoardSSC (English Medium) 7th Standard

‘चतुराई’ संबंधी कोई सुनी हुई कहानी सुनाओ। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

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Question

‘चतुराई’ संबंधी कोई सुनी हुई कहानी सुनाओ।

Writing Skills
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Solution

स्वर्ग की खोज

महाराज कृष्णदेव राय अपने बचपन में सुनी कथा अनुसार यह विश्वास करते थे कि संसार की सबसे उत्तम और मनमोहक जगह स्वर्ग है। एक दिन अचानक महाराज के मन में स्वर्ग देखने की इच्छा उत्पन्न होती है, इसलिए वे दरबार में उपस्थित मंत्रियों से पूछते हैं कि बताइए स्वर्ग कहाँ है? सारे मंत्रीगण सिर खुजाते बैठे रहते हैं पर चतुर तेनालीराम महाराज कृष्णदेव राय को स्वर्ग का पता बताने का वचन देते हैं और इस काम के लिए दस हजार सोने के सिक्के और दो महीनों का समय माँगते हैं।

महाराज कृष्णदेव राय तेनाली को सोने के सिक्के और दो महीने का समय दे देते हैं और शर्त रखते हैं कि अगर तेनालीराम ऐसा न कर सका तो उसे कड़ा दंड दिया जाएगा। अन्य दरबारी तेनाली की कुशलता से ईर्ष्या करते थे। वे यह सोचने लगे कि यदि तेनाली स्वर्ग नहीं खोज पाएगा तो सजा भुगतेगा।

दो महीने बाद जब महाराज तेनालीराम को दरबार में बुलवाते हैं तब तेनालीराम कहता है कि उसने स्वर्ग ढूँढ़ लिया है और वह कल सुबह राजा को वहाँ ले जाएगा। अगले दिन तेनालीराम महाराज कृष्णदेव राय और उनके खास मंत्रीगणों को एक सुंदर से बगीचे में ले जाता है। वहाँ की हरियाली, चहचहाते पक्षी और वातावरण को शुद्ध करने वाले पेड़-पौधों को देखकर महाराज अति प्रसन्न होते हैं, परंतु उनके मंत्रीगण उनको स्वर्ग देखने की बात याद दिलाते हैं। महाराज तेनालीराम से पूछते हैं कि स्वर्ग कहाँ है? तेनालीराम कहता है कि जब पृथ्वी पर फल-फूल, पेड़-पौधे, अनंत प्रकार के पशु-पक्षी, अद्भुत वातावरण और अलौकिक साैंदर्य है फिर स्वर्ग की कामना क्यों? जबकि स्वर्ग जैसी कोई जगह है भी या नहीं इसका कोई प्रमाण नहीं है।

महाराज तेनालीराम की चतुराई समझ जाते हैं और उसकी प्रशंसा करते हैं। बाकी मंत्री ईर्ष्या के कारण महाराज को सोने के सिक्कों की याद दिलाते हैं तब महाराज तेनाली से सिक्कों के बारे में पूछते हैं। इस पर तेनाली कहता है कि उसने इस जगह से उत्तम कोटि के बीज और पौधे खरीदे हैं। जिनको वह अपने राज्य की जमीन में लगाएगा ताकि उसका राज्य भी इस सुंदर स्थान के समान आकर्षक और शांतिदायक बन जाए। महाराज इस बात से अत्यधिक प्रसन्न हो जाते हैं और तेनालीराम को इनाम देते हैं।

सीख: चतुराई से हर समस्या का समाधान किया जा सकता है।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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Chapter 2.03: दाे लघुकथाएँ - सुनो तो जरा [Page 31]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Sulabhbharati Standard 7 Maharashtra State Board
Chapter 2.03 दाे लघुकथाएँ
सुनो तो जरा | Q (१) | Page 31
Balbharati Hindi Sulabhbharati Ekatmik Standard 7 Maharashtra State Board
Chapter 11 दो लघुकथाएँ
अंतःपाठ प्रश्न | Q १. | Page 60

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‘आगे कुआँ पीछे खाई’ कहावत का अर्थ लिखकर उससे संबंधित कोई प्रसंग लिखो।


‘छाते की आत्‍मकथा’ विषय पर निबंध लिखो।



पूरी वर्णमाला क्रम से पढ़ो:

क्ष श य प त ट च क ए अ ञ ष र फ

थ ठ छ ख ऐ आ ज्ञ स ल ब घ ढ़ ई ॠ

द ड ज ग ओ इ श्र ह व भ ध ढ झ ऑ

ळ म न ण त्र ङ अं उ ड़ अः ऊ अँ औ


मैंने समझा बेटी युग कविता से 


।। हवा प्रकृति का उपहार, यही है जीवन का आधार ।।


चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________


।। हे विश्वचि माझे घर ।।


तुम अपनी छोटी बहन/छोटे भाई के लिए क्या करते हो?


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फलों के नाम फूलों के नाम
१. ______ १. ______
२. ______ २. ______
३. ______ ३. ______
४. ______ ४. ______
५. ______ ५. ______
६. ______ ६. ______
७. ______ ७. ______
८. ______ ८. ______
९. ______ ९. ______
१०. ______ १०. ______

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