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Question
‘भाषा राष्ट्र के विकास में सहायक होती है’, इसपर अपना मत लिखिए।
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Solution
भाषा किसी भी राष्ट्र की जीवनरेखा मानी जाती है। यह केवल संवाद का माध्यम ही नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा, शिक्षा, विज्ञान और राष्ट्रीय एकता की आधारशिला भी है। भाषा ही वह साधन है जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने विचार, अनुभव और भावनाएँ व्यक्त करता है। किसी राष्ट्र की प्रगति में भाषा की भूमिका उतनी ही महत्त्वपूर्ण है जितनी शरीर के लिए प्राणों की।
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज के निर्माण का आधार पारस्परिक सहयोग है। यह सहयोग तभी संभव है जब लोगों के बीच संवाद हो, और संवाद का आधार भाषा ही है। भाषा समाज को एक सूत्र में पिरोती है और लोगों के बीच सहयोग, भाईचारा और समझ को बढ़ाती है।
भाषा राष्ट्र के नागरिकों को जोड़ने का कार्य करती है। जब लोग एक ही भाषा बोलते और समझते हैं तो उनमें आत्मीयता और विश्वास की भावना बढ़ती है। यह एकता राष्ट्र को मजबूत बनाती है। भाषा के माध्यम से नागरिकों में राष्ट्रीय चेतना जागृत होती है, जो स्वतंत्र और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए आवश्यक है।
भाषा ही वह साधन है जिसके माध्यम से शिक्षा का प्रसार होता है। यदि शिक्षा मातृभाषा में दी जाए तो विद्यार्थी गहराई से समझ पाते हैं और नवाचार व रचनात्मकता का विकास होता है। शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र में बौद्धिक और वैज्ञानिक विकास संभव होता है। इसलिए कहा जाता है कि शिक्षा और भाषा राष्ट्र की उन्नति के दो पंख हैं।
भाषा किसी राष्ट्र की संस्कृति और परंपराओं की वाहक होती है। साहित्य, कविता, गीत, नाटक और ऐतिहासिक ग्रंथों के माध्यम से एक राष्ट्र की संस्कृति सुरक्षित रहती है। यदि भाषा का ह्रास हो जाए तो संस्कृति भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है। इसलिए भाषा को बचाना, राष्ट्र की आत्मा को बचाने के समान है।
आज के वैज्ञानिक युग में भाषा का महत्त्व और भी बढ़ गया है। विज्ञान, तकनीक, व्यापार और प्रशासन के विकास के लिए भाषा का सरल और प्रभावी होना आवश्यक है। यदि विज्ञान और तकनीकी ज्ञान अपनी भाषा में उपलब्ध हो, तो राष्ट्र के नागरिक तेजी से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
इतिहास गवाह है कि जिन राष्ट्रों ने अपनी भाषा का सम्मान किया, वे तेजी से प्रगति कर पाए। महात्मा गांधी ने भी कहा था कि राष्ट्र के विकास के लिए अपनी भाषा का प्रयोग आवश्यक है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने स्पष्ट कहा,
“निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।। ”
अतः यह स्पष्ट है कि भाषा राष्ट्र के विकास में अनिवार्य भूमिका निभाती है। यह राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक संरक्षण, शिक्षा, विज्ञान और आर्थिक प्रगति की आधारशिला है। भाषा के बिना राष्ट्र की प्रगति अधूरी है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपनी भाषा का सम्मान करे और उसके प्रचार-प्रसार में योगदान दे।
