English

बेन्जीन इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ सरलतापूर्वक क्यों प्रदर्शित करती हैं, जबकि उसमें नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन कठिन होता है?

Advertisements
Advertisements

Question

बेन्जीन इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ सरलतापूर्वक क्यों प्रदर्शित करती हैं, जबकि उसमें नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन कठिन होता है?

Answer in Brief
Advertisements

Solution

C6H6 (बेन्जीन) की कक्षक संरचना प्रदर्शित करती है कि π-इलेक्ट्रॉन अभ्र वलय के ऊपर तथा नीचे स्थित है तथा ढीला व्यवस्थित है अत: इलेक्ट्रॉनस्नेही के लिए आसानी से उपलब्ध है, अत: बेन्जीन इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ शीघ्रता से देती है तथा नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन क्रियाएँ कठिनता से देती है।

shaalaa.com
ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन - बेन्जीन का विरचन
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 9: हाइड्रोकार्बन - अभ्यास [Page 405]

APPEARS IN

NCERT Rasayan bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 11
Chapter 9 हाइड्रोकार्बन
अभ्यास | Q 13.19 | Page 405
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×