English

अपनी मातृभूमि को लेकर वीरसिंह के विचार। - Hindi [हिंदी]

Advertisements
Advertisements

Question

अपनी मातृभूमि को लेकर वीरसिंह के विचार।

Answer in Brief
Advertisements

Solution

वीरसिंह ने जैसे बूँदी का नकली दुर्ग देखा तथा राणा लाखा की प्रतिज्ञा के बारे में सुना, उसने निश्चय किया कि हम अपनी मातृभूमि का अपमान नहीं होने देंगे। वीर सिंह को बूँदी का नकली किला भी प्राणों से अधिक प्रिय था। उसने अपने साथियों को बताया कि अपनी जन्मभूमि की धूल में खेलकर बड़े हुए हैं, उसका अपमान किसी भी दशा में नहीं देखा जा सकता। वीर सिंह ने अपने साथी सैनिकों से वादा लिया कि प्राणों के रहते हम इस नकली दुर्ग पर भी मेवाड़ की राज्य-पताका नहीं स्थापित होने देंगे।

shaalaa.com
मातृभूमि का मान
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 1.07: मातृभूमि का मान - स्वाध्याय [Page 31]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Kumarbharati [Hindi] Standard 9 Maharashtra State Board
Chapter 1.07 मातृभूमि का मान
स्वाध्याय | Q (१) (ख) ३. | Page 31

RELATED QUESTIONS

किसी ऐतिहासिक घटना पर संवाद लिखिए तथा कक्षा में प्रस्‍तुत कीजिए।


‘मातृभूमि प्रेम’ इस एकांकी की मूल संवेदना है। अपने अनुभव के आधार पर ऐसे किसी प्रसंग से जुड़ी रोचक घटना को लिखिए।


सेना में भर्ती होने के लिए आवश्यक जानकारी अंतरजाल से प्राप्त कीजिए।


प्रत्येक राजपूत को ______


इस दुर्ग में कोई तो हमारा ______


वीरसिंह और उसके मुट्‍ठी भर साथी अभी तक ______


महाराणा की प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए चारणी द्वारा सुझाया गया उपाय।


नकली बूँदी को लेकर वीरसिंह के साथियों के विचार।


महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक संबंधी कहानी पढ़िए और उसके साहस की विशेषता बताइए।


'मातृभूमि का मान' इस पाठ का केंद्रीय भाव लिखिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×