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अपनी अभिक्रियाओं में सल्फर डाइऑक्साइड तथा हाइड्रोजन परॉक्साइड ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों ही रूपों में क्रिया करते हैं, जबकि ओजोन तथा नाइट्रिक अम्ल केवल ऑक्सीकारक के रूप में ही। क्यों?

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Question

अपनी अभिक्रियाओं में सल्फर डाइऑक्साइड तथा हाइड्रोजन परॉक्साइड ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों ही रूपों में क्रिया करते हैं, जबकि ओजोन तथा नाइट्रिक अम्ल केवल ऑक्सीकारक के रूप में ही। क्यों?

Long Answer
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Solution

SO2 में S की ऑक्सीकरण संख्या +4 होती है। S अपनी अभिक्रियाओं में -2 और +6 के बीच की कोई भी ऑक्सीकरण-संख्या दर्शा सकता है। अत: SO2 में S की ऑक्सीकरण संख्या घट सकती है और बढ़ भी सकती है; अर्थात् इसका ऑक्सीकरण तथा अपचयन दोनों संभव है। इस कारण SOऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों अभिकर्मकों की तरह व्यवहार करती है। H2O2 की स्थिति भी समान प्रकार की है। H2O2 में, O की ऑक्सीकरण अवस्था -1 होती है। ऑक्सीजन -2 और 0 (शून्य) के बीच की कोई भी ऑक्सीकरण अवस्था दर्शाता है (+2 भी जब F से जुड़ा होता है) अतः H2O2 में ऑक्सीजन अपनी ऑक्सीकरण संख्या घटा तथा बढ़ा सकता है। इस कारण H2O2 ऑक्सीकारक तथा अपचायक दोनों अभिकर्मकों की तरह व्यवहार करता है।

O3 में, ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य है। यह अपनी ऑक्सीकरण-अवस्था को -1 तथा -2 तक घटा सकता है परंतु अपनी ऑक्सीकरण-अवस्था को बढ़ा नहीं सकता। अत: O3 केवल एक ऑक्सीकारक की तरह व्यवहार करती है। H2O2 की स्थिति भी समान प्रकार की है। HNO3 में, N की ऑक्सीकरण-अवस्था +5 होती है जो N की अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था है। अत: N केवल अपनी ऑक्सीकरण अवस्था घटा सकता है। इस कारण HNO3 केवल ऑक्सीकारक की तरह व्यवहार करता है।

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अपचयोपचय अभिक्रियाएँ
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