Advertisements
Advertisements
Question
ऐसी किन्ही तीन बहि:प्रजनन युक्तियों की सूची बनाइए जो पर-परागण हेतु पुष्पी द्वारा विकसित की गई है तथा व्याख्या कीजिए कि वे पर-परागण को किस प्रकार प्रोत्साहित करती है।
Long Answer
Advertisements
Solution
- कालक्रमिक परिपक्वता (डाइकोगैमी): स्तंभक (परागक) तथा स्तिग्मा/स्त्रीभाग अलग‑अलग समय पर परिपक्व होते हैं (प्रोटान्ड्री: पराग पहले; प्रोटोगाइनी: स्तिग्मा पहले), जिससे अपने ही पुष्प पर परागपुरीणन घटता और क्रॉस‑परागण बढ़ता है।
- स्थानिक पृथकता (हेरकॉगैमी): अन्थर और स्तिग्मा स्थानिक रूप से अलग रहते हैं (उदा. अलग ऊँचाई/दूरी), अतः परागकण सीधे अपनी ही रूचि पर नहीं पहुँचते और परागणकों के माध्यम से पराग अन्य पुष्पों पर पहुँचता है।
- आत्म‑असंगतता/एकल‑लैंगिकता या विषैतिक पुष्प): आनुवंशिक तंत्र या पुष्प‑रचना अपने ही परागण को अस्वीकार करती है, अथवा पौधों में पृथक‑लैंगिक (उदा. द्विव्यजन) व्यवस्था होने पर आत्म‑प्रजनन नामुमकिन बनता है, जिससे क्रॉस‑परागण सुनिश्चित होता है।
shaalaa.com
Is there an error in this question or solution?
2025-2026 (March) 57-5-3
