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ऐसी किन्ही तीन बहि:प्रजनन युक्तियों की सूची बनाइए जो पर-परागण हेतु पुष्पी द्वारा विकसित की गई है तथा व्याख्या कीजिए कि वे पर-परागण को किस प्रकार प्रोत्साहित करती है। - Biology (जीव विज्ञान)

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प्रश्न

ऐसी किन्ही तीन बहि:प्रजनन युक्तियों की सूची बनाइए जो पर-परागण हेतु पुष्पी द्वारा विकसित की गई है तथा व्याख्या कीजिए कि वे पर-परागण को किस प्रकार प्रोत्साहित करती है।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

  1. कालक्रमिक परिपक्वता (डाइकोगैमी): स्तंभक (परागक) तथा स्तिग्मा/स्त्रीभाग अलग‑अलग समय पर परिपक्व होते हैं (प्रोटान्ड्री: पराग पहले; प्रोटोगाइनी: स्तिग्मा पहले), जिससे अपने ही पुष्प पर परागपुरीणन घटता और क्रॉस‑परागण बढ़ता है।
  2. स्थानिक पृथकता (हेरकॉगैमी): अन्थर और स्तिग्मा स्थानिक रूप से अलग रहते हैं (उदा. अलग ऊँचाई/दूरी), अतः परागकण सीधे अपनी ही रूचि पर नहीं पहुँचते और परागणकों के माध्यम से पराग अन्य पुष्पों पर पहुँचता है।
  3. आत्म‑असंगतता/एकल‑लैंगिकता या विषैतिक पुष्प): आनुवंशिक तंत्र या पुष्प‑रचना अपने ही परागण को अस्वीकार करती है, अथवा पौधों में पृथक‑लैंगिक (उदा. द्विव्यजन) व्यवस्था होने पर आत्म‑प्रजनन नामुमकिन बनता है, जिससे क्रॉस‑परागण सुनिश्चित होता है।
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2025-2026 (March) 57-5-3
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