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Question
आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम ‘नहीं होना बीमार’ है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि इस कहानी का यह नाम उपयुक्त है या नहीं। अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
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Solution
हाँ, कहानी का नाम 'नहीं होना बीमार' बिल्कुल उपयुक्त है, क्योंकि पूरी कहानी यही सीख देती है कि बीमार होना कोई ठाठ या मज़े की बात नहीं है। अस्पताल के साफ-सुथरे माहौल और साबूदाने की खीर को देखकर बच्चे को लगा कि बीमार होने में बड़ा मज़ा है। वह सोचता है, 'काश! सुधाकर काका की जगह मैं होता!' इसलिए स्कूल न जाने के लिए वह अगले दिन बीमार होने का नाटक करता है। परंतु फिर उसे कड़वी पुड़िया और काढ़े जैसी चाय पीनी पड़ती है। उसे पूरा दिन भूखा रहना पड़ता है और बिस्तर पर पड़े-पड़े ऊब जाना पड़ता है। दाल-चावल और आम खाते घरवालों को देखकर उसका मन तरसता है, पर उसे कुछ नहीं मिलता। दिनभर की यह परेशानी सहकर बच्चा समझ जाता है कि बीमारी अच्छी चीज़ नहीं है, इसलिए वह तय करता है कि अब कभी बीमारी का बहाना नहीं बनाएगा। इसी सीख को ‘नहीं होना बीमार’ नाम सुंदर ढंग से दर्शाता है, इसलिए यह नाम उपयुक्त है।
