English

3.00 mm त्रिज्या की किसी पारे की बूँद के भीतर कमरे के ताप पर दाब क्या है? 20°C ताप पर पारे का पृष्ठ तनाव 4.65 × 10-1 N m-1 है।

Advertisements
Advertisements

Question

3.00 mm त्रिज्या की किसी पारे की बूँद के भीतर कमरे के ताप पर दाब क्या है? 20°C ताप पर पारे का पृष्ठ तनाव 4.65 × 10-1 N m-1 है। यदि वायुमण्डलीय दाब 1.01 × 105 Pa है तो पारे की बूँद के भीतर दाब-आधिक्य भी ज्ञात कीजिए।

Numerical
Advertisements

Solution

दिया है : त्रिज्या r = 3.00 mm = 3.00 × 10-3m,

वायुमण्डलीय दाब Pa = 1.01 × 105 Pa

20°C पर पारे का पृष्ठ-तनाव S = 4.65 × 10-1Nm-1

पारे की बूँद के भीतर दाब- आधिक्य `"P"_"ex" = (2  "S")/"r"`

= `(2 xx 4.65 xx 10^-1  "N""m"^-1)/(3.00 xx 10^-3  "m")`

= 3.1 × 102 Pa

जबकि बूँद के बाहर दाब वायुमंडलीय दाब है,

∴ बूँद के भीतर दाब P1 = Pa + Pex

= 1.01 × 105 Pa + 3.1 × 102 Pa

= 1.013 × 105 Pa

तथा बूँद के भीतर दाब - आधिक्य = 3.1 × 102 Pa

shaalaa.com
पृष्ठ तनाव
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 9: तरलों के यांत्रिक गुण - अभ्यास [Page 284]

APPEARS IN

NCERT Bhautiki Bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 11
Chapter 9 तरलों के यांत्रिक गुण
अभ्यास | Q 10.19 | Page 284

RELATED QUESTIONS

स्पष्ट कीजिए क्यों

पारे का काँच के साथ स्पर्श कोण अधिक कोण होता है जबकि जल का काँच के साथ स्पर्श कोण न्यूनकोण होता है।


स्पष्ट कीजिए क्यों

यदि किसी बाह्य बल का प्रभाव न हो तो द्रव बूँद की आकृति सदैव गोलाकार होती है।


व्यापक रूप में द्रवों का पृष्ठ-तनाव ताप बढने पर ______  है।


गैसों की श्यानता ताप बढ़ने पर ______ है, जबकि द्रवों की श्यानता ताप बढने पर ______ है।


दृढ़ता प्रत्यास्थता गुणांक वाले ठोसों के लिए अपरूपण प्रतिबल ______ के अनुक्रमानुपाती होता है, जबकि द्रवों के लिए वह ______ के अनुक्रमानुपाती होता है।


U-आकार के किसी तार को साबुन के विलयन में डुबो कर बाहर निकाला गया जिससे उस पर एक पतली साबुन की फिल्म बन गई। इस तार के दूसरे सिरे पर फिल्म के सम्पर्क में एक फिसलने वाला हलका तार लगा है जो 1.5 × 10-2 N भार (जिसमें इसका अपना भार भी सम्मिलित है) को सँभालता है। फिसलने वाले तार की लंबाई 30 cm है। साबुन की फिल्म का पृष्ठ-तनाव कितना है?


निम्नांकित चित्र (a) में किसी पतली द्रव-फिल्म को 4.5 × 10-2 N का छोटा भार सँभाले दर्शाया गया है। चित्र (b) तथा (c) में बनी इसी द्रव की फिल्में इसी ताप पर कितना भार सँभाल सकती हैं? अपने उत्तर को प्राकृतिक नियमों के अनुसार स्पष्ट कीजिए।

(a) (b) (c)

सोडा काँच के साथ पारे का स्पर्श कोण 140° है। यदि पारे से भरी द्रोणिका में 1.00 mm त्रिज्या की काँच की किसी नली का एक सिरा डुबोया जाता है, तो पारे के बाहरी पृष्ठ के स्तर की तुलना में नली के भीतर पारे का स्तर कितना नीचे चला जाता है? (पारे का घनत्व = 136 × 103kg m-3)


3.0 mm तथा 6.0 mm व्यास की दो संकीर्ण नलियों को एक साथ जोड़कर दोनों सिरों से खुली एक U-आकार की नली बनाई जाती है। यदि इस नली में जल भरा है तो इस नली की दोनों भुजाओं में भरे जल के स्तरों में क्या अंतर है। प्रयोग के ताप पर जल का पृष्ठ-तनाव 7.3 × 10-2 N m-1 है। स्पर्श कोण शून्य लीजिए तथा जल का घनत्व 10 × 103 kg m-3 लीजिए। (g = 9.8 ms-2)


1425 m³ आयतन का हीलियम से भरा कोई बड़ा गुब्बारा 400 kg के किसी पेलोड को उठाने के काम में लाया जाता है। यह मानते हुए कि ऊपर उठते समय गुब्बारे की त्रिज्या नियत रहती है, गुब्बारा कितनी अधिकतम ऊँचाई तक ऊपर उठेगा? . [y0 = 8000 m तथा ρHe = 0.18 kg m-3 लीजिए।]


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×