English

0.05 kg संहति का कोई कंकड़ ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंका गया है। नीचे दी गई प्रत्येक परिस्थिति में कंकड़ पर लग रहे नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए - Physics (भौतिक विज्ञान)

Advertisements
Advertisements

Question

0.05 kg संहति का कोई कंकड़ ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंका गया है। नीचे दी गई प्रत्येक परिस्थिति में कंकड़ पर लग रहे नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए:

  1. उपरिमुखी गति के समय।
  2. अधोमुखी गति के समय।
  3. उच्चतम बिन्दु पर जहाँ क्षण भर के लिए यह विराम में रहता है। यदि कंकड़ को क्षैतिज दिशा से 45° कोण पर फेंका जाए, तो क्या आपके उत्तर में कोई परिवर्तन होगा? वायु-प्रतिरोध को उपेक्षणीय मानिए।
Answer in Brief
Advertisements

Solution 1

  1. उपरिमुखी गति के समय कंकड़ पर बल = कंकड़ का भार = mg = 0.05 kg × 10 m s-2 = 0.5 N
  2. अधोमुखी गति के समय भी कंकड़ पर बल उसके भार के बराबर अर्थात् 0.5 N लगेगा।
  3. इस स्थिति में भी कंकड़, पर वही बल 0.5 N ही लगेगा।
    कंकड़ को क्षैतिज से 45° के कोण पर फेंकने पर भी कंकड़ पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र में गति करता है; अतः इस स्थिति में भी, प्रत्येक दशा में कंकड़ पर बल 0.5 N ही लगेगा।
shaalaa.com

Solution 2

जब कोई वस्तु ऊपर की ओर फेंकी जाती है या नीचे गिरती है, तो पृथ्वी का निरंतर गुरुत्वाकर्षण बल उस पर समान रूप से प्रभावित करता है। यह खिंचाव नीचे की ओर एक स्थिर त्वरण a =+g = 10 m/s2 का कारण बनता है। यदि m वस्तु का द्रव्यमान है, तो mg उस पर नीचे की ओर कार्य करने वाली बल है। एक कंकड़ के लिए जिसका द्रव्यमान m = 0.05 kg है, बल निम्नानुसार गणना की गई है:

  1. उपरिमुखी गति के समय कंकड़ पर बल = कंकड़ का भार = mg = 0.05 kg × 10 m s-2 = 0.5 N
  2. अधोमुखी गति के समय भी कंकड़ पर बल उसके भार के बराबर अर्थात् 0.5 N लगेगा।
  3. इस स्थिति में भी कंकड़, पर वही बल 0.5 N ही लगेगा।

जब कंकड़ को क्षैतिज दिशा के सापेक्ष 45 डिग्री के कोण पर फेंका जाता है, तो यह क्षैतिज और लंबवत दोनों प्रकार की वेग घटकों को विकसित करेगा। ये घटक गुरुत्वाकर्षण बल पर कोई प्रभाव नहीं डालते हैं जो कंकड़ पर कार्य कर रहा है। इसलिए, गणना किया गया बल सभी परिदृश्यों में अपरिवर्तित रहता है। हालांकि, विशेष रूप से परिदृश्य (c) में, कंकड़ अपने सर्वोच्च बिंदु पर स्थिर नहीं होता है लेकिन इसमें क्षैतिज वेग होता है।

shaalaa.com
जड़त्व का नियम
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 4: गति के नियम - अभ्यास [Page 70]

APPEARS IN

NCERT Bhautiki bhag 1 aur 2 [Hindi] Class 11
Chapter 4 गति के नियम
अभ्यास | Q 4.2 | Page 70

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए:

जल में तैरता 10 g संहति का कोई कॉर्क


निम्नलिखित पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए:

कुशलता से आकाश में स्थिर रोकी गई कोई पतंग


निम्नलिखित पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए:

30 km h-1 के एकसमान वेग से ऊबड़-खाबड़ सड़क पर गतिशील कोई कार


निम्नलिखित पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा लिखिए:

सभी गुरुत्वीय पिण्डों से दूर तथा वैद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों से मुक्त, अंतरिक्ष में तीव्र चाल वाला इलेक्ट्रॉन।


0.1 kg संहति के पत्थर पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा निम्नलिखित परिस्थितियो में ज्ञात कीजिए:
पत्थर को स्थिर रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरंत पश्चात्

उपर्युक्त स्थिति में वायु का प्रतिरोध उपेक्षणीय मानिए।


0.1 kg संहति के पत्थर पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा निम्नलिखित परिस्थिति में ज्ञात कीजिए:

पत्थर को 36 km h-1 के एकसमान वेग से गतिशील किसी रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरंत पश्चात्

उपर्युक्त स्थिति में वायु का प्रतिरोध उपेक्षणीय मानिए।


0.1 kg संहति के पत्थर पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा निम्नलिखित परिस्थिति में ज्ञात कीजिए:

पत्थर को 1 ms-2 के त्वरण से गतिशील किसी रेलगाड़ी की खिड़की से गिराने के तुरंत पश्चात्

उपर्युक्त स्थिति में वायु का प्रतिरोध उपेक्षणीय मानिए।


0.1 kg संहति के पत्थर पर कार्यरत नेट बल का परिमाण व उसकी दिशा निम्नलिखित परिस्थिति में ज्ञात कीजिए:

पत्थर 1 ms-2 के त्वरण से गतिशील किसी रेलगाड़ी के फर्श पर पड़ा है तथा वह रेलगाड़ी के सापेक्ष विराम में है।

उपर्युक्त स्थिति में वायु का प्रतिरोध उपेक्षणीय मानिए।


स्पष्ट कीजिए कि क्यों:

किसी तीव्र गति से चल रही बस के यकायक रुकने पर यात्री आगे की ओर गिरते हैं।


किसी मेज पर एक-एक रुपये के दस सिक्कों को एक के ऊपर एक करके रखा गया है। प्रत्येके सिक्के की संहति m है। निम्नलिखित प्रत्येक स्थिति में बल का परिमाण एवं दिशा लिखिए:

  1. सातवें सिक्के (नीचे से गिनने पर) पर उसके ऊपर रखे सभी सिक्कों के कारण बल,
  2. सातवें सिक्के पर आठवें सिक्के द्वारा आरोपित बल, तथा
  3. छठे सिक्के की सातवें सिक्के पर प्रतिक्रिया।

Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×