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Hindi (Indian Languages) Official Board 2024-2025 ISC (Commerce) Class 12 Question Paper Solution

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Hindi (Indian Languages) [Official Board]
Marks: 80 CISCE
ISC (Commerce)
ISC (Arts)
ISC (Science)

Academic Year: 2024-2025
Date & Time: 28th February 2025, 2:00 pm
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Instructions to Candidates

  1. You are allowed an additional fifteen minutes for only reading the question paper.
  2. You must NOT start writing during reading time.
  3. This question paper has 11 printed pages and one blank page.
  4. It is divided into two sections: Section A and Section B.
  5. It has fifteen questions in all.
  6. Section A has three questions. All questions are compulsory.
  7. While attempting Multiple Choice Questions in Section A, you are required to write only ONE option as the answer.
  8. Section B has twelve questions. You are required to attempt any four questions in this section on any three out of the four prescribed textbooks.
  9. The intended marks for questions are given in brackets [ ].

Section - A (Language - 40 Marks)
Write a composition in approximately 400 words in Hindi on any one of the topics given below.
[15]1. (i)

निचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।

भारतीय संस्कृति में भोजन पकाने को पाक-कला कहा गया है। भारतीय व्यंजनों में स्नेह, स्वाद तथा सुगंध का अनोखा संगम होता है। आपको भारतीय भोजन की कौन-कौन-सी विशेषताएँ प्रभावित करती हैं? विविध प्रकार के भारतीय व्यंजन दुनिया के अनेक हिस्सों में लोगों के बीच तेजी से क्यों लोकप्रिय होते जा रहे हैं? समझाकर लिखिए।

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Chapter:
[15]1. (ii)

निचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।

‘दूसरों के दर्द का अहसास उसे ही होता है, जिसने खुद जीवन में दर्द सहा हो।’ इस कथन को ध्यान में रखते हुए अपने किसी ऐसे अनुभव का वर्णन कीजिए जहाँ आपने उक्त कथन की सार्थकता को समझा। अपने उस अनुभव से आपने क्या सीखा? समझाकर लिखिए।

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Chapter:
[15]1. (iii)

निचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।

भारतीय प्रजातंत्र में प्रत्येक नागरिक को अठारह वर्ष की उम्र, में मतदान का अधिकार मिलता है। जब आप मतदान करने योग्य हो जाएँगे तो किसी-उम्मीदवार को मत देते समय किन-किन बातों का विशेष ध्यान रखेंगे ताकि अपने बहुमूल्य मत द्वारा आप एक योग्य प्रतिनिधि का चुनाव कर सकें। तर्क सहित अपने विचार लिखिए।

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Chapter:
[15]1. (iv)

निचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।

‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का बढ़ता उपयोग विद्यार्थियों को आधुनिक युग की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बना रहा है।’ इस विषय के पक्ष या विपक्ष में अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।

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Chapter:
[15]1. (v)

निचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।

‘साइकिल चलाना स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत ही महत्त्वपूर्ण है’ इस कथन को ध्यान में रखते हुए आपके विद्यालय ने एक ‘साइकिल रैली’ का आयोजन किया। आपने भी अपने मित्रों के साथ उसमें भाग लिया। इसके लिए आपने क्या क्या तैयारियाँ की और इन सब में आपका अनुभव कैसा रहा? वर्णन कीजिए।

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Chapter:
[7.5]1. (vi) (a)

निम्नलिखित विषय पर मौलिक कहानी लिखिए।

‘अच्छे-बुरे की पहचान विपत्ति के समय ही होती है।’

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Chapter:
[7.5]1. (vi) (b)

निम्नलिखित वाक्य से अंत करते हुए एक मौलिक कहानी लिखिए।

............. और इस तरह उन्होंने मुझे माफ कर दिया।

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Chapter:
Read the passage given below carefully and answer the questions that follow, using your own words in Hindi.
[7.5]2.

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और अपने शब्दों का प्रयोग करते हुए दिए गए प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में दीजिए।

महाकवि कालिदास के कंठ में साक्षात् सरस्वती का वास था। शास्त्रार्थ में उन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता था। अपार यश, प्रतिष्ठा और सम्मान पाकर कालिदास को अपनी विद्वत्ता पर घमंड हो गया था।

उन्हें लगा कि उन्होंने विश्व का सारा ज्ञान प्राप्त कर लिया है और अब सीखने को कुछ बाकी नहीं बचा। उनसे बड़ा ज्ञानी संसार में कोई दूसरा नहीं है। एक बार पड़ोसी राज्य से शास्त्रार्थ का निमंत्रण पाकर कालिदास, राजा विक्रमादित्य से अनुमति लेकर अपने घोड़े पर रवाना हुए।

गर्मी का मौसम था। धूप काफी तेज थी और लगातार यात्रा से कालिदास को प्यास लग आई थी। थोड़ा तलाश करने पर उन्हें एक टूटी झोपड़ी दिखाई दी। झोपड़ी के सामने एक कुआँ भी था। पानी की आशा में वे उस ओर बढ़ चले।

कालिदास ने सोचा कि कोई झोपड़ी में हो तो उससे पानी देने का अनुरोध किया जाए। उसी समय झोपड़ी से एक छोटी बच्ची मटका लेकर निकली। बच्ची ने कुएँ से पानी भरा और वहाँ से जाने लगी।

कालिदास उसके पास जाकर बोले- “बालिके! बहुत प्यास लगी है, जरा पानी पिला दे।”

बालिका ने पूछा- “आप कौन हैं? मैं आपको जानती भी नहीं, पहले अपना परिचय दीजिए।”

कालिदास को लगा कि मुझे कौन नहीं जानता, भला मुझे परिचय देने की क्या आवश्यकता ? फिर भी प्यास से बेहाल थे, तो बोले- “बालिके! अभी तुम छोटी हो इसलिए मुझे नहीं जानती। घर में कोई बड़ा हो तो उसे भेजो । वह मुझे देखते ही पहचान लेगा। दूर-दूर तक मेरा बहुत नाम और सम्मान है। मैं बहुत विद्वान व्यक्ति हूँ।”

कालिदास के बड़बोलेपन और घमंड भरे वचनों से प्रभावित हुए बिना बालिका ने पानी से भरा मटका उठाया और झोपड़ी के भीतर चली गई। अब तो कालिदास हताश हो गए। प्यास से शरीर की शक्ति घट रही थी। दिमाग चकरा रहा था। उन्होंने आशा से झोपड़ी की तरफ देखा। तभी अंदर से एक वृद्धा निकली। उसके हाथ में एक खाली मटका था। वह कुएँ से पानी भरने लगी। अब तक काफी विनम्र हो चुके कालिदास बोले- “माते! पानी पिला दीजिए, बड़ा पुण्य होगा।”

वृद्धा बोली- “बेटा मैं तुम्हें नहीं जानती। अपना परिचय दो। मैं अवश्य पानी पिला दूँगी।”

कालिदास ने कहा- “मैं मेहमान हूँ, कृपया पानी पिला दीजिए।”

वृद्धा बोली- “तुम मेहमान कैसे हो सकते हो ? संसार में दो ही मेहमान हैं। पहला धन और दूसरा यौवन। इन्हें जाने में समय नहीं लगता। सत्य बताओ,तुम कौन हो?”

वृद्धा के तर्क से पराजित कालिदास बोले- “मैं सहनशील हूँ। अब आप पानी पिला दीजिए।”

वृद्धा ने कहा- “नहीं, सहनशील तो दो ही हैं। पहली, धरती जो पापी-पुण्यात्मा सबका बोझ सहती है। उसकी छाती चीरकर बीज बो देने से भी अनाज के भंडार देती है। दूसरे, पेड़ जिनको पत्थर मारो फिर भी मीठे फल देते हैं। तुम सहनशील नहीं हो। सच बताओ, तुम कौन हो?”

कालिदास लगभग मूर्च्छा की स्थिति में आ गए और तर्क वितर्क से झल्लाकर बोले- “मैं हठी हूँ।”

वृद्धा बोली- “फिर असत्य! हठी तो दो ही हैं पहला नख और दूसरे केश, कितना भी काटो बार-बार निकल आते हैं। सत्य कहें ब्राह्मण, कौन हैं आप?” पूरी तरह अपमानित और हताश हो चुके कालिदास ने कहा- “फिर तो मैं मूर्ख ही हूँ।”

“नहीं, तुम मूर्ख कैसे हो सकते हो? मूर्ख दो ही हैं। पहला, राजा जो बिना योग्यता के भी सब पर शासन करता है और दूसरा, दरबारी पंडित जो राजा को प्रसन्न करने के लिए गलत बात पर भी तर्क देकर उसको सही सिद्ध करने की चेष्टा करता है।”

कुछ न बोल सकने की स्थिति में कालिदास वृद्धा के पैरों पर गिर पड़े।

वृद्धा ने कहा- “उठो वत्स!” आवाज सुनकर कालिदास ने ऊपर देखा तो साक्षात् माता सरस्वती वहाँ खड़ी थीं। कालिदास पुन: नतमस्तक हो गए।

माता सरस्वती ने कहा- “शिक्षा से ज्ञान आता है न कि अहंकार। तूने शिक्षा के बल पर प्राप्त मान और प्रतिष्ठा को ही अपनी उपलब्धि मान लिया और अहंकार कर बैठे इसलिए मुझे तुम्हारे चक्षु खोलने के लिए ये स्वांग भरना पड़ा।”

यह सुनकर कालिदास का अहंकार चूर चूर हो गया। आज पहली बार उन्हें अपने ज्ञान की निस्सारता का अहसास हुआ।

प्रश्न:

  1. महाकवि कालिदास को किस बात का घमंड हो गया था और क्यों?     [3]
  2. कालिदास द्वारा अपना परिचय ‘मेहमान’ एवं ‘सहनशील’ कहकर दिए जाने पर प्रत्युत्तर में वृद्धा ने क्या तर्क दिए? समझाकर लिखिए।     [3]
  3. माता सरस्वती को किसका स्वांग भरना पड़ा? इस स्वांग के पीछे उनका मकसद क्या था? वे अपने मकसद में किस प्रकार कामयाब हुई?     [3]
  4. निम्नलिखित पंक्तियों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प चुनिए।
    “बालिके! अभी तुम छोटी हो इसलिए मुझे नहीं जानती। घर में कोई बड़ा हो तो उसे भेजा। वह मुझे देखते ही पहचान लेगा। दूर-दूर तक मेरा बहुत नाम और सम्मान है। मैं बहुत विद्वान व्यक्ति हूँ।”
    1. “बालिके! अभी तुम छोटी हो इसलिए मुझे नहीं जानती।” -इस कथन के पीछे कालिदास का क्या भाव था?     [1]
      1. संशय का भाव
      2. अहंकार का भाव
      3. समानता का भाव
      4. अरूचि का भाव
    2. बालिका ने उन्हें पानी क्यों नहीं पिलाया?     [1]
      1. बालिका अभी बहुत छोटी थी।
      2. वह उन्हें देखकर डर गई थी।
      3. वह किसी बड़े को बुलाने गई थी।
      4. व्यक्ति ने अपना परिचय नहीं दिया था।
    3. “........... मेरा बहुत नाम और सम्मान है।” वाक्य का क्या आशय है?     [1]
      1. कालिदास के बहुत नाम हैं।
      2. कालिदास बहुत विनम्र हैं।
      3. कालिदास बहुत चर्चित हैं।
      4. कालिदास बालिका को डरा रहे हैं।
  5. निम्नलिखित पंक्तियों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प चुनिए।
    “शिक्षा से ज्ञान आता है न कि अहंकार। तूने शिक्षा के बल पर प्राप्त मान और प्रतिष्ठा को ही अपनी उपलब्धि मान लिया और अहंकार कर बैठे...”
    1. उक्त पंक्तियाँ किस संदर्भ में कही गई हैं?     [1]
      1. कालिदास की आँखें खोलने के लिए।
      2. उनके ज्ञान का गुणगान करने के लिए।
      3. उन्हें मान और प्रतिष्ठा दिलाने के लिए।
      4. उनका अपमान करने के लिए।
    2. वृद्धा को अपना परिचय देते समय कालिदास की मन स्थिति कैसी थी?     [1]
      1. उत्साह और ग्लानि भरी
      2. विनम्रता और विरक्ति भरी
      3. संयम और सदभावना भरी
      4. विवशता और व्याकुलता भरी
    3. कालिदास वृद्धा के पैरों पर क्यों गिर पड़े?     [1]
      1. प्यास के कारण उनका गला सूख गया था।
      2. बहुत दूर से आने के कारण वे थक गए थे।
      3. वृद्धा के तर्कों से वे निरुत्तर हो गए थे।
      4. प्यास के कारण वे मूर्च्छित हो गए थे।
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Chapter:
[1]3 (A) (i) | Do as directed: निर्देशानुसार उत्तर दीजिए।

निम्नलिखित वाक्य का शुद्ध रूप लिखिए।

अब और स्पष्टीकरण करने की आवश्यकता नहीं है।

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Chapter:
[1]3. (A) (ii)

रिक्त स्थान में सही शब्द भरिए।

हमें हमेशा दूर के ______ सुहाने लगते हैं।

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Chapter:
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[1]3. (A) (iii)

निम्नलिखित वाक्यों में से शुद्ध वाक्य का चयन कीजिए।

शरीर से ताकत होनी चाहिए।

शरीर में ताकत होनी चाहिए।

शरीर के भीतर ताकत होनी चाहिए।

शरीर पर ताकत होनी चाहिए।

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Chapter:
[1]3. (A) (iv)

निम्नलिखित वाक्यों में से अशुद्ध वाक्य का चयन कीजिए।

रमेश को जल्दी घर जाना है।

मुझे अभी घर नहीं जाना है।

मेरे को माँ के साथ घर जाना है।

हम सभी घर जा रहे है।

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Chapter:
[1]3. (A) (v)

निम्नलिखित वाक्य में रेखांकित शब्द के लिए सही शब्द का चयन कीजिए।

भारत माता के पैरों में पराधीनता की जंजीरें पड़ी हुई थीं।

बेड़ियाँ

कड़ियाँ

हथकड़ियाँ

लड़ियाँ

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Chapter:
[5]3. (B) | Do as directed.
[1]3. (B) (i) | निर्देशानुसार उत्तर दीजिए।

निम्नलिखित मुहावरे से वाक्य बनाइए।

गज भर की छाती होना

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Chapter:
[1]3. (B) (ii)

निम्नलिखित मुहावरे को शुद्ध कीजिए।

ईश्वर के घर देर है सबेर नहीं

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Chapter:
[1]3. (B) (iii)

निम्नलिखित वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए एक सटीक मुहावरे का चयन कीजिए।

सुदामा को द्वारका में आया देख श्रीकृष्ण का उन्हें ______ उनकी सहंदयता का परिचायक है।

ईद का चाँद होना

आसमान के तारे तोड़ना

पलकें बिछाना

सिर आँखों पर बिठाना

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Chapter:
[1]3. (B) (iii)

निम्नलिखित वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए एक सटीक मुहावरे का चयन कीजिए।

सुदामा को द्वारका में आया देख श्रीकृष्ण का उन्हें ______ उनकी सहंदयता का परिचायक है।

ईद का चाँद होना

आसमान के तारे तोड़ना

पलकें बिछाना

सिर आँखों पर बिठाना

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Chapter:
[1]3. (B) (iv)

निम्नलिखित वाक्य के लिए एक सटीक मुहावरें का चयन कीजिए।

 मुंशी प्रेमचन्द ‘कथाशिल्पी’ कहे जीते हैं क्योंकि उनका लेखन ‘अति उत्तम’ है।

टोपी उछालना

कलम तोड़ना

कान काटना

तूती बोलना

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Chapter:
[1]3. (B) (v)

निम्नलिखित मुहांवरें के सही अर्थ का चयन कीजिए।

पापड़ बेलना

पापड़ बनाना

मुसीबत उठाना

खाना बनाना

पतली रोटी बनाना

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Chapter:
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Section - B (Literature - 40 Marks)
Answer four questions from this Section on any three out of the four prescribed textbooks. पाठ्यक्रम में निर्धारित चार पुस्तकों में सें किन्हीं तीन पुस्तकों के चार प्रश्नों के उत्तर इस भाग से दीजिए।
[10]4. | गद्य संकलन (Gadya sankalan)

“परन्तु बुंदेला शरणागत के साथ घात नहीं करता, इस बात को गाँठ बाँध लेना।”

  1. उक्त पंक्तियों से सम्बन्धित पाठ तथा रचनाकार का नाम लिखिए।     [1]
  2. यहाँ ‘शरणागत’ कौन है तथा उसें सहायता लेने की आवश्यकता क्यो हुई?     [2]
  3. उक्त पंक्तियों में किस ‘घात’ की बात की जा रही है? समझाकर लिखिए।     [2]
  4. कहानी में समाज की किस बुराई की ओर संकेत किया गया है? समाज से उस बुराई को दूर करने के लिए आप क्या करेंगे? कोई दो सुझाव दीजिए।     [5]
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Chapter:
[10]5.

‘हमारे समाज में एक बेटी को अपने मायके में हर संभव प्रयास करने के बावजूद बेटे के समान दर्जा नहीं मिलता और उसे ‘पराया धन’ माना जाता हैं, चाहे माता-प्रिता की नजरें में हो या भाई और भाभी की।’ 
‘आउट साइडर’ कहानी के संदर्भ में इस कथन की समीक्षा कीजिए।

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Chapter:
[10]6.

कोई दो उदाहरण देते हुए सभ्यता एवं संस्कृति में अन्तर बताइए। “संस्कृति क्या है?” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि संस्कृति आदान-प्रदान से कैसे बढ़ती है?

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Chapter:
[10]7. | काव्य मंजरी (Kavya Manjari)
नर-समाज का भाग्य एक है, वह श्रम है, वह भुजबल है,
जिसके सम्मुख झुकी हुई पृथिवी, विनीत नभ-तल है।
जिसने श्रम-जल दिया, उसे पीछे मत रह जानें दो,
विजित प्रकृति से सबसे पहले उसको सुख पाने दो।
  1. प्रस्तुत पंक्तियों से सम्बन्धित कविता तथा कवि का नाम लिखिए।     [1]
  2. कवि नें ‘नर समाज का भाग्य’ किसे कहा है और क्यों?     [2]
  3. कवि की दृष्टि में सबसे पहले सुख पाने का अधिकारी कौन है और क्यों? समझाकर लिखिए।     [2]
  4. ‘उसे पीछे मत रह जाने दो’ - पंक्ति के आधार पर बताइए कि यदि वह व्यक्ति पीछे रह गया तो क्या परिणाम होगा? किन्हीं दो तर्कों द्वारा अपनी बात स्पष्ट कीजिए।     [5]
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Chapter:
[10]8.

‘कबीर की साखियों में गुरु का महत्त्व, जीवात्मा-परमात्मा का सम्बन्ध तथा अज्ञानता रूपी अंधकार से ज्ञानरूपी प्रकाश की ओर अग्रसित करने को विधान मिलता है।’ पठ़ित साखियों के आधार पर इस कथन को स्पष्ट कीजिए।

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Chapter:
[10]9.

‘नागार्जुन प्रकृति-चित्रण के कुशल चितेरे कवि हैं। ‘बादल को घिरे, देखा है’ कविता में उन्होंने प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम चित्रण किया है।’ इस कथन की पुष्टि कविता के आधार पर कीजिए।

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Chapter:
[10]10.

“लेकिन मुसीबत सिर्फ रुपयों की ही तो नहीं हैं। उत्तना तो तुम्हें अभी भी मिलता है। असली मुसीबत तो यह है कि हमारे सपने बहुत ऊँचे हैं। भविष्य के नक्शे बिल्कुल अलग हैं।”

  1. प्रस्तुत पंक्तियों के वक्ता और श्रोता कौन हैं?     [1]
  2. उक्त पंक्तियों में किस सपने की बात की जा रही है?     [2]
  3. संयुक्त परिवार में युवकों की क्या स्थिति होती है? उपन्यास के संदर्भ में बताइए।     [2]
  4. उक्त संवाद के आलोक में वक्ता के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।     [5]
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Chapter:
[10]11.

‘सारा आकाश’ उपन्यास मध्यमवर्गीय संयुक्त परिवार के परस्पर तनाव, घुटन और यातना से उत्पन्न विकृतियों की कहानी है। इस कथन की व्याख्या करते हुए उपन्यास के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए।

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Chapter:
[10]12.

संयुक्त परिवार के बारें में शिरीष बाबू के जो विचार हैं उनसे आप कहाँ तक सहमत हैं? अपनी राय व्यक्त करते हुए शिरीष बाबू के चरित्र की कोई तीन विशेषताएँ लिखिए।

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Chapter:
[10]13. | आषाढ़ का एक दिन (Aashad Ka Ek Din)

“मेरे भीगे होने की चिन्ता मत करों।... जानती हो, इस तरह भीगना भी जीवन की महत्त्वाकांक्षा हो सकती है? वर्षों के बाद भीगा हूँ। अभी सूखना नहीं चाहता।”

  1. उक्त कथन किसने, किससे कहा?     [1]
  2. उक्त कथन किस संदर्भ में कहा गया है?     [2]
  3. इस कथन का अन्तर्निहित अर्थ स्पष्ट कीजिए।     [2]
  4. उक्त संवाद के आलोक में वक्‍ता के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।     [5]
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Chapter:
[10]14.

‘विलोम आज के मानव की नियति कों व्यक्त करने वाला एक सशक्त, चरित्र है।’ - उक्त कथन के आलोक में विलोम का चरित्र-चित्रण कीजिए तथा यह भी स्पष्ट कीजिए कि वह परम्परागत खलनायक से किस प्रकार भिन्न है?

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Chapter:
[10]15.

अपने ग्राम प्रांत में आने के बाद भी मल्लिकों से न मिलने एवं राजकुमारी प्रियंगुमंजरी से विवाह कर लेने की बात जानकर भी मल्लिका कें हृदय में कालिदास के लिए विषाद नहीं है। इसका क्या कारण हो सकता है? आपके अनुसार सच्चे प्रेमें की परिभाषा क्या है? नाटक को आधार बनाकर लिखिए।

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Chapter:

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