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प्रश्न
“परन्तु बुंदेला शरणागत के साथ घात नहीं करता, इस बात को गाँठ बाँध लेना।”
- उक्त पंक्तियों से सम्बन्धित पाठ तथा रचनाकार का नाम लिखिए। [1]
- यहाँ ‘शरणागत’ कौन है तथा उसें सहायता लेने की आवश्यकता क्यो हुई? [2]
- उक्त पंक्तियों में किस ‘घात’ की बात की जा रही है? समझाकर लिखिए। [2]
- कहानी में समाज की किस बुराई की ओर संकेत किया गया है? समाज से उस बुराई को दूर करने के लिए आप क्या करेंगे? कोई दो सुझाव दीजिए। [5]
सविस्तर उत्तर
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उत्तर
- यह पंक्तियाँ ‘शरणागत’ नामक पाठ से संबंधित हैं, जिसके रचनाकार वृंदावन लाल वर्मा हैं।
- यहाँ शरणागत कसाई था, जिसे सहायता की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि वह अपनी पत्नी के साथ था और रात बहुत हो चुकी थी।
- उक्त पंक्तियों में उस घटना का वर्णन है, जिसमें कुछ डाकुओं ने कसाई को चारों ओर से घेर लिया था। इन डाकुओं का सरदार ठाकुर जी था, जिनके यहाँ कसाई ने शरण ली थी।
- कहानी में समाज की उस कुरीति की ओर ध्यान दिलाया गया है, जिसमें कुछ लोग अपनी शरण में आए व्यक्तियों को धोखा देते हैं। इस सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए मैं सभी से यह निवेदन करूँगा कि वे शरणागत की रक्षा करें और उसके साथ अहित न करें, अर्थात उसे ठगना या धोखा देना उचित नहीं है।
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या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
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