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प्रश्न
अपने ग्राम प्रांत में आने के बाद भी मल्लिकों से न मिलने एवं राजकुमारी प्रियंगुमंजरी से विवाह कर लेने की बात जानकर भी मल्लिका कें हृदय में कालिदास के लिए विषाद नहीं है। इसका क्या कारण हो सकता है? आपके अनुसार सच्चे प्रेमें की परिभाषा क्या है? नाटक को आधार बनाकर लिखिए।
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उत्तर
‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक में मल्लिका और कालिदास का प्रेम गहन और आत्मीय था, किंतु परिस्थितियों के कारण दोनों को अलग होना पड़ा। जब कालिदास अपने ग्राम क्षेत्र में लौटते हैं, तब भी वे मल्लिका से मिलने नहीं आते, और दूसरी ओर राजकुमारी प्रियंगुमंजरी से विवाह कर लेते हैं। यह सब जानने के बावजूद मल्लिका के मन में उनके प्रति न तो दुःख है और न ही क्रोध।
इसका मुख्य कारण मल्लिका का निःस्वार्थ और त्यागपूर्ण प्रेम है। वह कालिदास को अपनी व्यक्तिगत भावनाओं के बंधन में बाँधकर रखना नहीं चाहती थी। उसने सदैव कालिदास को अपनी महत्त्वाकांक्षाओं की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया, और जब वे सफलता प्राप्त कर लेते हैं, तब वह उनके निर्णयों को सहज भाव से स्वीकार कर लेती है।
मल्लिका यह भली-भाँति समझती है कि कालिदास की स्थिति अब बदल चुकी है। वे अब केवल उसके गाँव के साधारण कवि नहीं रहे, बल्कि एक राजकवि और राजपरिवार के सदस्य बन चुके हैं। वह इस परिवर्तन को समझती है और कालिदास के जीवन में आए बदलावों को सहज रूप से स्वीकार कर लेती है। उसका प्रेम स्वामित्व की भावना से मुक्त था, इसलिए उसके हृदय में विषाद के लिए कोई स्थान नहीं रहा।
सच्चे प्रेम की परिभाषा: सच्चा प्रेम त्याग, निःस्वार्थता और व्यक्ति की स्वतंत्रता के सम्मान से युक्त होता है। यह किसी को बाँधने का भाव नहीं, बल्कि दूसरे की प्रसन्नता में अपनी खुशी खोजने की भावना है। नाटक के संदर्भ में मल्लिका का प्रेम इस परिभाषा को पूर्ण रूप से साकार करता है। वह कालिदास को स्वयं से अधिक महत्व देती है और उनकी सफलता के लिए अपने सुख और भविष्य तक का त्याग कर देती है।
सच्चे प्रेम की प्रमुख विशेषताएँ-
- स्वार्थहीनता: सच्चा प्रेम किसी लाभ या स्वार्थ की अपेक्षा से नहीं, बल्कि निःस्वार्थ भाव से किया जाता है।
- त्याग और बलिदान: प्रेम में समर्पण और त्याग की भावना होती है, जैसा मल्लिका के चरित्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
- स्वतंत्रता और सम्मान: प्रेम में बंधन नहीं, बल्कि स्वतंत्रता का भाव होता है। मल्लिका ने कभी भी कालिदास को बाँधने या रोकने का प्रयास नहीं किया।
- दुख में भी संतोष: यद्यपि मल्लिका को कालिदास से विवाह न हो पाने का दुःख है, फिर भी वह अपनी पीड़ा को संयमित रखती है और उनके निर्णय को स्वीकार कर लेती है।
