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‘विलोम आज के मानव की नियति कों व्यक्त करने वाला एक सशक्त, चरित्र है।’ - उक्त कथन के आलोक में विलोम का चरित्र-चित्रण कीजिए तथा यह भी स्पष्ट कीजिए कि वह परम्परागत खलनायक से किस प्रकार भिन्न है? - Hindi (Indian Languages)

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प्रश्न

‘विलोम आज के मानव की नियति कों व्यक्त करने वाला एक सशक्त, चरित्र है।’ - उक्त कथन के आलोक में विलोम का चरित्र-चित्रण कीजिए तथा यह भी स्पष्ट कीजिए कि वह परम्परागत खलनायक से किस प्रकार भिन्न है?

सविस्तर उत्तर
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उत्तर

विलोम का चरित्र-चित्रण: मोहन राकेश द्वारा रचित ‘आषाढ़ का एक दिन’ एक प्रसिद्ध नाटक है, जिसमें इतिहास और मानवीय संवेदनाओं का गहन चित्रण किया गया है। इस नाटक का प्रमुख पात्र विलोम आधुनिक मानव की नियति को अभिव्यक्त करने वाला एक सशक्त चरित्र है। वह केवल एक खलनायक नहीं, बल्कि परिस्थितियों से जूझता हुआ ऐसा व्यक्ति है, जो अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं, सामाजिक प्रतिष्ठा और आंतरिक संघर्ष के बीच डगमगाता रहता है।

विलोम को महत्वाकांक्षी, स्वार्थपरक और व्यावहारिक व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है, किंतु वह पारंपरिक खलनायकों से भिन्न है क्योंकि उसका व्यक्तित्व पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। उसमें मानवीय दुर्बलताएँ और समाज के दबावों को सहने की विवशता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

विलोम के चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ-

  1. महत्त्वाकांक्षी और यथार्थवादी: विलोम ऐसा व्यक्ति है, जो अपने निजी जीवन और प्रेम के होते हुए भी सामाजिक प्रतिष्ठा और सत्ता की ओर आकृष्ट होता है। उसे यह समझ आ जाता है कि केवल साहित्य और प्रेम के सहारे जीवन को सफल नहीं बनाया जा सकता, बल्कि समाज में ऊँचा स्थान पाने के लिए व्यावहारिक दृष्टि अपनानी पड़ती है।
  2. स्वार्थी और अवसरवादी: वह मल्लिका से प्रेम करता है, किंतु जब उसके सामने सफलता और सामाजिक सम्मान प्राप्त करने का अवसर आता है, तो वह उसे छोड़कर राजा के दरबार की ओर चला जाता है। अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए वह नाटक और काव्य को साधन के रूप में उपयोग करता है।
  3. परिस्थितियों का शिकार और आत्मसंघर्ष से ग्रस्त: विलोम पारंपरिक अर्थों में क्रूर या दुष्ट खलनायक नहीं है, बल्कि वह दुविधा में फँसा हुआ व्यक्ति है, जो अपने निर्णयों के कारण भीतर ही भीतर टूटता रहता है। दरबार में सफलता मिलने के बाद भी उसे आत्मिक शांति नहीं मिलती। मल्लिका से अलग होने के पश्चात वह मानसिक रूप से अशांत हो जाता है और प्रेम व सफलता के बीच स्वयं को अधूरा महसूस करता है।

विलोम पारंपरिक खलनायक से किस प्रकार भिन्न है?

  1. नैतिक रूप से पूर्णतः दुष्ट नहीं: पारंपरिक खलनायक सामान्यतः पूरी तरह नकारात्मक होते हैं, जबकि विलोम के व्यक्तित्व में अंतर्द्वंद्व दिखाई देता है। वह परिस्थितियों के दबाव में गलत निर्णय लेता है, पर अंततः उसे अपने जीवन की त्रासदी का बोध हो जाता है।
  2. भावनात्मक और आत्मसंघर्ष से युक्त: विलोम केवल सत्ता और प्रतिष्ठा का लालची नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील मनुष्य भी है, जो प्रेम और सफलता के बीच उलझा हुआ है। वह यह जानता है कि मल्लिका को छोड़ना उसकी भूल थी, किंतु अपनी कमजोरी और परिस्थितियों के कारण वह वापस लौटने का साहस नहीं कर पाता।
  3. समाज की कठोर वास्तविकता का प्रतीक: वह एक यथार्थवादी चरित्र है, जो आधुनिक मानव की स्थिति को दर्शाता है, जहाँ लोग अपने आदर्शों का त्याग कर सफलता और सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए समझौते कर लेते हैं। विलोम उन व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व करता है, जो सपनों और यथार्थ के द्वंद्व में फँसकर समझौतावादी बन जाते हैं।
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