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‘दूसरों के दर्द का अहसास उसे ही होता है, जिसने खुद जीवन में दर्द सहा हो।’ इस कथन को ध्यान में रखते हुए अपने किसी ऐसे अनुभव का वर्णन कीजिए जहाँ आपने उक्त कथन की सार्थकता को समझा। - Hindi (Indian Languages)

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प्रश्न

निचे दिए गए विषय पर हिन्दी में निबन्ध लिखिए जो लगभग 400 शब्दों से कम न हो।

‘दूसरों के दर्द का अहसास उसे ही होता है, जिसने खुद जीवन में दर्द सहा हो।’ इस कथन को ध्यान में रखते हुए अपने किसी ऐसे अनुभव का वर्णन कीजिए जहाँ आपने उक्त कथन की सार्थकता को समझा। अपने उस अनुभव से आपने क्या सीखा? समझाकर लिखिए।

लेखन कौशल्य
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उत्तर

वहीं व्यक्ति दूसरों के दर्द को समझ सकता है, जो स्वयं पीड़ा से गुजरा हो
भूमिका:

मनुष्य का जीवन सुख-दुख, हँसी-आँसू और निरंतर आने वाले उतार-चढ़ावों से भरा होता है। जब हम खुद किसी कठिनाई या संकट का सामना करते हैं, तब हमें दूसरों के दर्द की सच्ची अनुभूति होती है। जिसने जीवन में संघर्ष और परेशानियों को झेला हो, वही किसी और की तकलीफ़ को दिल से महसूस कर सकता है। यह बात मैंने अपने जीवन के अनुभवों से गहराई से जानी है, जिसने मेरी सोच और संवेदनशीलता को और भी प्रबल बना दिया।

मेरा अनुभव:

यह घटना मेरे जीवन के उन अहम पलों में से एक है, जिसने मुझे न सिर्फ दूसरों की तकलीफ समझने की संवेदना दी, बल्कि उनकी सहायता के लिए प्रेरित भी किया।

जब मैं दसवीं कक्षा में पढ़ रहा था, उस समय मेरे पिता की तबीयत अचानक काफी बिगड़ गई। वे एक छोटे स्तर के व्यापारी थे और घर की पूरी आर्थिक ज़िम्मेदारी उन्हीं पर थी। बीमारी के चलते उन्हें अपना काम बंद करना पड़ा, जिससे हमारे परिवार पर गहरा आर्थिक संकट आ गया। ऐसे समय में मेरी माँ ने सिलाई का काम शुरू किया और मैंने भी पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया।

हमारी हालत इतनी खराब हो गई थी कि कई बार भोजन की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो जाता था। इसी दौरान मैंने जीवन में अभावों और संघर्षों के असली मायने समझे। जब स्कूल में कुछ दोस्तों के पास महंगे पेन या नई किताबें होती थीं, तो मैं उन्हें देख बस चुपचाप रह जाता था।

कुछ महीने बाद, जैसे ही मेरे पिता की तबीयत में सुधार आया और उन्होंने काम पर लौटना शुरू किया, हमारी स्थिति धीरे-धीरे बेहतर होने लगी। मगर उस मुश्किल समय ने मेरे मन पर गहरी छाप छोड़ दी, जिसने मेरी सोच, सहानुभूति और संवेदनशीलता को एक नया आयाम दिया।

इस अनुभव से मिली सीख-

  1. दूसरों के दर्द को समझने की संवेदना: 
    • जब मैं खुद आर्थिक तंगी के दौर से गुज़रा, तभी मुझे यह महसूस हुआ कि गरीबी और कठिनाइयों का सामना करना वास्तव में कितना चुनौतीपूर्ण होता है।
    • उस अनुभव के बाद, जब भी मुझे कोई ज़रूरतमंद व्यक्ति मिला, मैंने उसकी मदद करने की हरसंभव कोशिश की।
  2. संवेदनशीलता और करुणा की भावना का विकास:
    • पहले मैं दूसरों की समस्याओं को उतनी गंभीरता से नहीं लेता था, लेकिन जब खुद जीवन में संघर्ष किया, तब यह समझ आया कि हर इंसान अपनी किसी न किसी जंग से जूझ रहा होता है।
    • अब अगर कोई विद्यार्थी किताबों या फीस की कमी से परेशान होता है, तो मैं उसे सहयोग देने का प्रयास करता हूँ।
  3. मदद की अहमियत को समझना:
    • जब मेरे परिवार ने मुश्किल वक्त का सामना किया, तब कुछ रिश्तेदारों और दोस्तों ने आगे बढ़कर हमारा साथ दिया।
    • इस अनुभव से मैंने जाना कि किसी की दी गई थोड़ी-सी मदद भी जरूरतमंद के लिए बहुत बड़ी राहत बन सकती है।
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