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Physics (भौतिक विज्ञान) 55/1/1 2025-2026 Science (Hindi Medium) Class 12 [कक्षा १२] Question Paper Solution

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Physics (भौतिक विज्ञान) [55/1/1]
Marks: 70 CBSE
Science (Hindi Medium)

Academic Year: 2025-2026
Date & Time: 20th February 2026, 10:30 am
Duration: 3h
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नोट:

  1. कृपया जाँच कर लें कि इस प्रश्न-पत्र में मुद्रित पृष्ठ 31 हैं।
  2. प्रश्न-पत्र में दाहिने हाथ की ओर दिए गए प्रश्न-पत्र कोड को परीक्षार्थी उत्तर-पुस्तिका के मुख-पृष्ठ पर लिखें।
  3. कृपया जाँच कर लें कि इस प्रश्न-पत्र में 33 प्रश्न हैं।
  4. कृपया प्रश्न का उत्तर लिखना शुरू करने से पहले, उत्तर-पुस्तिका में यथास्थान पर प्रश्न का क्रमांक अवश्य लिखें।
  5. इस प्रश्न-पत्र को पढ़ने के लिए 15 मिनट का समय दिया गया है। प्रश्न-पत्र का वितरण पूर्वाह्न में 10.15 बजे किया जाएगा। 10.15 बजे से 10.30 बजे तक परीक्षार्थी केवल प्रश्न-पत्र को पढ़ेंगे और इस अवधि के दौरान वे उत्तर-पुस्तिका पर कोई उत्तर नहीं लिखेंगे।

सामान्य निर्देश:

निम्नलिखित निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उनका पालन कीजिए:

  1. इस प्रश्न-पत्र में 33 प्रश्न हैं। सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
  2. यह प्रश्न-पत्र पाँच खण्डों में विभाजित है - खण्ड-क, ख, ग, घ तथा ङ।
  3. खण्ड - क में प्रश्न संख्या 1 से 16 तक बहुविकल्पीय प्रकार के प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है।
  4. खण्ड - ख में प्रश्न संख्या 17 से 21 तक अति लघु-उत्तरीय प्रकार के प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न 2 अंकों का है।
  5.  खण्ड - ग में प्रश्न संख्या 22 से 28 तक लघु-उत्तरीय प्रकार के प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न 3 अंकों का है।
  6.  खण्ड - घ में प्रश्न संख्या 29 तथा 30 केस अध्ययन-आधारित प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न 4 अंकों का है।
  7. खण्ड - ङ में प्रश्न संख्या 31 से 33 तक दीर्घ-उत्तरीय प्रकार के प्रश्न हैं। प्रत्येक प्रश्न 5 अंकों का है।
  8. प्रश्न-पत्र में समग्र विकल्प नहीं दिया गया है। यद्यपि, खण्ड-क के अतिरिक्त अन्य खण्डों के कुछ प्रश्नों में आंतरिक विकल्प दिया गया है।
  9. ध्यान दें कि दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों के लिए एक अलग प्रश्न-पत्र है।
  10. कैलकुलेटर का उपयोग वर्जित है।
    जहाँ आवश्यक हो, आप निम्नलिखित भौतिक नियतांकों के मानों का उपयोग कर सकते हैं:
    c = 3 × 108 m/s
    h = 6.63 × 10−34 Js
    e = 1.6 × 10−19 C
    μ0 = 4π × 10−7 Tm A−1
    ε0 = 8.854 × 10−12 C2 N1 m2
    `1/(4πε_0) = 9 xx 10^9 N m^2 C^-2`
    इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (me) = 9.1 × 10−31 kg
    न्यूट्रॉन का द्रव्यमान (mn) = 1.675 × 10−27 kg
    प्रोटॉन का द्रव्यमान (mp) = 1.672 × 10−27 kg
    आबोग्रैद्रो संख्या = 6.023 
    × 1023 प्रति ग्राम मोल
    बोल्ट्ज़मान नियतांक = 1.38 × 1023 J K−1

खण्ड - क
[1]1.

किसी क्षेत्र में वैद्युत विभव समीकरण V = 10 − 50x के अनुसार परिवर्तित होता है, जहाँ V का मान वोल्ट में एवं x मीटर में है। इस क्षेत्र में वैद्युत क्षेत्र है:

+x अक्ष के अनुदिश 10 N/C

−x अक्ष के अनुदिश 10 N/C

+x अक्ष के अनुदिश 50 N/C

−x अक्ष के अनुदिश 50 N/C

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Chapter:
[1]2.

धातु के दो आवेशित गोलों ‘A’ एवं ‘B’ को जिनकी त्रिज्याएँ क्रमशः r1 एवं r2 हैं, एक चालक तार परस्पर जोड़ता है। गोलों के बीच की दूरी, उनकी त्रिज्याओं की तुलना में बहुत अधिक है। गोलों ‘A’ एवं ‘B’ के पृष्ठों पर वैद्युत क्षेत्रों का अनुपात `(E_A/E_B)` होगा –

`r_1/r_2`

`r_2/r_1`

`r_1^2/r_2^2`

`r_2^2/r_1^2`

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Chapter:
[1]3.

एक लंबे सीधे तार में, जिसके वृत्ताकार अनुप्रस्थ परिच्छेद की त्रिज्या a है, एक स्थायी धारा I प्रवाहित हो रही है। यह धारा इस पूरे अनुप्रस्थ परिच्छेद पर समान रूप से वितरित है। तार की अक्ष से `a/2` दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर धारा के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण होगा –

शून्य

`(mu_0 I)/(2 pi a)`

`(mu_0 I)/(4 pi a)`

`(mu_0 I)/(6 pi a)`

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Chapter:
[1]4.

यंग के द्विझिरी प्रयोग में, जब झिरियों एवं पर्दे के बीच की दूरी झिरियों के बीच की दूरी की तुलना में बहुत अधिक होती है, तो व्यतिकरण फ्रिंजों की आकृति होती है लगभग –

सरलरेखीय

परवलयाकार

वृत्ताकार

अतिपरवलयी

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Chapter:
[1]5.

कोई वैद्युत चुम्बकीय तरंग निर्वात से किसी ऐसे परावैद्युतीय माध्यम में प्रवेश करती है जिसकी आपेक्षिक विद्युतशीलता `(3/2)` एवं आपेक्षिक चुम्बकशीलता `(8/3)` है। तब इसका ______

तरंगदैर्ध्य दो गुना हो जाएगा और आवृत्ति अपरिवर्तित रहेगी।

तरंगदैर्ध्य दो गुना हो जाएगा और आवृत्ति आधी हो जाएगी।

तरंगदैर्ध्य आधा हो जाएगा और आवृत्ति अपरिवर्तित रहेगी।

तरंगदैर्ध्य एवं आवृत्ति दोनों अपरिवर्तित रहेंगे।
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Chapter:
[1]6.

किसी श्रेणीक्रम LCR परिपथ में, प्रतिरोधक, संधारित्र एवं प्रेरक, प्रत्येक के सिरों के बीच वोल्टता 10 V है। यदि संधारित्र को लघुपथित कर दिया जाए तो प्रेरक के सिरों के बीच वोल्टता हो जाएगी –

10 V

`5 sqrt2` V

`5/sqrt2` V

`10 sqrt 2` V

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Chapter:
[1]7.

आयुर्विज्ञान के एक नैदानिक उपकरण में प्रयोग में लाई जाने वाली वैद्युत चुंबकीय तरंगों का तरंगदैर्ध्य - परिसर होता है।

1 nm से 10−3 nm

400 nm से 1 nm

1 mm से 700 nm

0.1 m से 1 mm

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Chapter:
[1]8.

जब कोई अल्फा-कण, v वेग से, लक्ष्यित नाभिक की ओर अभिमुख होता है तो नाभिक से इसके अभिगम की न्यूनतम दूरी (संघट्ट प्राचल) ‘d’ होती है । यदि अल्फा कण के वेग को आधा कर दिया जाए, तो संघट्ट प्राचल का मान होगा −

`d/2`

2d

`d/4`

4d

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Chapter:
[1]9.

10 सेमी फोकस दूरी के एक अवतल लेंस को काटकर दो सर्वसम समतलावतल लेंस प्राप्त किए जाते हैं। इनमें से प्रत्येक लेंस की फोकस-दूरी होगी −

20 सेमी

30 सेमी

40 सेमी

5 सेमी

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Chapter:
[1]10.

चार अलग-अलग तरंगों को निम्नवत् व्यक्त किया जाता है:

  1. y1 = A1 sin ωt
  2. y2 = A2 sin 2ωt
  3. y3 = A3 cos ωt
  4. `y_4 = A_4 sin(ωt + π/3)`

व्यतिकरण संभव है:

केवल (i) एवं (iii) के बीच

केवल (iii) एवं (iv) के बीच

केवल (i), (iii) एवं (iv) के बीच

इनमें से सभी के बीच

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Chapter:
[1]11.

दो वैद्युत ऊष्मकों को, जिनके शक्ति एवं वोल्टता के मान क्रमशः (P1, V) एवं (P2, V) हैं, `V/2` वोल्ट के दिष्टधारा (dc) स्रोत के साथ श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। ऊष्मकों के संयोजन द्वारा उपभुक्त शक्ति होगी –

P1 + P2

`(P_1 + P_2)/2`

`(P_1P_2)/(2(P_1 + P_2))`

`(P_1P_2)/(4(P_1 + P_2))`

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Chapter:
[1]12.

बिना किसी बायस के p-n संधि डायोड की साम्यावस्था में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?

विसरण धारा शून्य होती है किंतु अपवाह धारा रहती है।

विसरण धारा रहती है किंतु अपवाह धारा शून्य होती है।

विसरण एवं अपवाह धाराएँ बराबर एवं विपरीत होती हैं।

विसरण एवं अपवाह दोनों धाराएँ रहती हैं लेकिन वे बराबर नहीं होती।
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Chapter:
प्रश्न संख्या 13 से 16 में से प्रत्येक में दो कथन दिए गए हैं - इनमें से एक को कथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में नापांकित किया गया है । इन प्रश्नों के लिए नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए:
[1]13.

कथन (A): सभी परमाणुओं का एक नेट चुंबकीय आघूर्ण होता है।

कारण (R): धारा लूप सदैव चुंबकीय द्विध्रुव की भाँति व्यवहार नहीं करता है।

कथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।

कथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, किंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।

कथन (A) सत्य है, किंतु कारण (R) असत्य है।

कथन (A) और कारण (R) दोनों ही असत्य हैं।

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Chapter:
[1]14.

कथन (A): यदि त्वरित इलेक्ट्रॉनों को किसी संकीर्ण झिरी से गुजारा जाए तो एक विवर्तन पैटर्न प्रेक्षित किया जाता है।

कारण (R): इलेक्ट्रॉन कण एवं तरंग दोनों की तरह व्यवहार करते हैं।

कथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।

कथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, किंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।

कथन (A) सत्य है, किंतु कारण (R) असत्य है।

कथन (A) और कारण (R) दोनों ही असत्य हैं।

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Chapter:
[1]15.

कथन (A): किसी नाभिक का द्रव्यमान उसके घटक न्यूक्लिऑनों के द्रव्यमानों के योग से कम होता है।

कारण (R): जब न्यूक्लिऑन परस्पर बद्ध होकर नाभिक निर्मित करते हैं तो ऊर्जा अवशोषित होती है।

कथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।

कथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, किंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।

कथन (A) सत्य है, किंतु कारण (R) असत्य है।

कथन (A) और कारण (R) दोनों ही असत्य हैं।

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Chapter:
[1]16.

कथन (A): हाइड्रोजन परमाणु के बोर-मॉडल में ऊर्जा स्तर विविक्त एवं क्वांटीकृत होते हैं।

कारण (R): हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला स्थिर वैद्युत बल इसे वह अभिकेन्द्री बल प्रदान करता है जिसके कारण यह नाभिक के परितः परिक्रमण करता है।

कथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं और कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या है।

कथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं, किंतु कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।

कथन (A) सत्य है, किंतु कारण (R) असत्य है।

कथन (A) और कारण (R) दोनों ही असत्य हैं।

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Chapter:
खण्ड - ख
[2]17.

किसी प्रकाशवैद्युत संबंधी प्रयोग में उत्सर्जक प्लेट को 200 nm के विकिरणों से उद्भासित किया जाता है। जब संग्राहक प्लेट को −0.80 V विभव प्रदान किया जाता है तो प्रकाशविद्युत धारा शून्य हो जाती है। उत्सर्जक के कार्य-फलन का मान इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) में परिकलित कीजिए।

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Chapter:
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[2]18. (a)

प्रकाश का एक किरण पुंज जिसमें दो तरंगदैर्ध्यों 400 nm एवं 600 nm का प्रकाश विद्यमान है, 1 mm चौड़ाई की किसी एकल झिरी को प्रदीप्त करने के लिए उपयोग में लाया जाता है। झिरी से 1.5 m दूर रखे पर्दे पर केन्द्रीय उच्चिष्ठ से उस बिन्दु की न्यूनतम दूरी का परिकलन कीजिए जिस पर दोनों तरंगदैर्ध्यों के संगत अदीप्त फ्रिंजें संपाती हो जाती हैं।

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Chapter:
अथवा
[2]18. (b)

यंग की एक द्विझिरी प्रयोग व्यवस्था में झिरियों के बीच दूरी 0.6 mm है। 440 nm एवं 660 nm तरंगदैर्ध्य युक्त एक प्रकाशपुंज का उपयोग करके झिरियों से 1.5 m दूर रखे किसी पर्दे पर व्यतिकरण पैटर्न प्राप्त किया जाता है। केंद्रीय उच्चिष्ठ से उस बिन्दु तक की न्यूनतम दूरी ज्ञात कीजिए जिस पर दोनों तरंगदैर्ध्यों के संगत दीप्त फ्रिंजें संपाती हो जाती हैं।

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Chapter:
[2]19.

L लम्बाई के एक तार को मोड़कर बारी-बारी से

  1. N फेरों की एक वर्गाकार कुंडली तथा
  2. N फेरों की एक वृत्ताकार कुंडली बनाई जाती है।

दोनों प्रकरणों में बनी कुंडली अपने तल के साथ संपाती एक अक्ष के परितः ऊर्ध्वाधरतः किसी एकसमान, क्षैतिज चुंबकीय क्षेत्र में घूमने के लिए स्वतंत्र है और इनमें समान धारा प्रवाहित हो रही है। वर्गाकार कुंडली पर लगने वाले बल-आघूर्ण एवं वृत्ताकार कुंडली पर लगने वाले बल-आघूर्ण के अधिकतम मानों के अनुपात का परिकलन कीजिए।

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Chapter:
[1]20. (i)
किसी चालक में इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग की परिमाण-कोटि क्या है?
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Chapter:
[1]20. (ii)

किसी चालक में प्रवाहमान धारा और इसके इलेक्ट्रॉनों के अपवाह वेग में संबंध व्युत्पन्न कीजिए।

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Chapter:
[2]21.

न्यूक्लिऑनों के एक युग्म की स्थितिज ऊर्जा को उनके बीच की दूरी के फलन के रूप में आलेखित कीजिए। इस आलेख के आधार पर निकाले जा सकने वाले कोई दो महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष लिखिए।

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Chapter:
खण्ड - ग
[2]22. (i) (a)

गाउस के नियम का उपयोग करके एकसमान रूप से आवेशित अनंत विस्तार की एक समतल, पतली शीट के कारण किसी बिंदु पर वैद्युत क्षेत्र के लिए व्यंजक निगमित कीजिए।

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Chapter:
[1]22. (i) (b)

दो विशाल, पतली समतल शीट जिनमें से प्रत्येक पर पृष्ठ आवेश घनत्व σ है वायु में एक दूसरे के निकट और समांतर रखी हैं। इन शीटों के 

  1. अंदर और
  2. बाहर किसी बिंदु पर नेट वैद्युत क्षेत्र का मान क्या है?
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Chapter:
अथवा
[1]22. (ii) (a)

व्हीटस्टोन सेतु के संतुलन की शर्त निगमित कीजिए।

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Chapter:
[2]22. (ii) (b)

चित्र में दर्शाए गए प्रतिरोधकों के नेटवर्क का बिंदु A एवं B के बीच तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।

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Chapter:
[3]23.

C धारिता के एक समांतर प्लेट संधारित्र की प्लेटों के बीच एक परावैद्युतीय पट्टिका लगी है। एक बैटरी के सिरों के बीच जोड़कर इसे V वोल्ट के विभवांतर तक आवेशित किया जाता है। इसके बाद बैटरी को हटा लिया जाता है। अब यदि परावैद्युतीय पट्टिका को संधारित्र से बाहर निकाल लिया जाए तो निम्नलिखित पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

  1. संधारित्र की धारिता पर
  2. संधारित्र में संचित ऊर्जा पर
  3. संधारित्र की प्लेटों के बीच विभवांतर पर

उपर्युक्त प्रत्येक राशि के लिए अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।

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Chapter:
[3]24.

एक दूसरे से 2 cm की दूरी पर रखी दो समांतर क्षैतिज प्लेटों `P_1P_1^'` एवं `P_2P_2^'` के बीच के स्थान में इलेक्ट्रॉनों का एक संकीर्ण पुंज 3 × 107 m/s के वेग से सममित रूप से प्रवेश कर रहा है जैसा चित्र में दर्शाया गया है।

यदि प्रत्येक प्लेट की लम्बाई 3 cm हो तो उस विभवांतर V के मान का परिकलन कीजिए जिसको प्लेटों के बीच लगाने पर इलेक्ट्रॉन-पुंज ठीक सिरे `P_2^'` को छूता है।

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Chapter:
[3]25.

दो आदर्श डायोडों एवं तीन प्रतिरोधकों के नेटवर्क में सिरों A एवं B के बीच प्रत्यावर्ती (ac) वोल्टता Vi = 12 sin (100 πt) V चित्र में दर्शाए अनुसार लगाई गई है।

निवेशी वोल्टता Vi के धनात्मक अर्ध-चक्र के दौरान:

  1. पहचानिए कि दोनों में से किस डायोड से होकर धारा प्रवाहित होगी और क्यों?
  2. धारा प्रवाह दर्शाने के लिए इस परिपथ का एक तुल्य परिपथ आरेख बनाइए।
  3. जब निवेशी वोल्टता अपने शिखर मान पर होती है उस क्षण तीनों प्रतिरोधकों में से प्रत्येक के सिरों के बीच निर्गत वोल्टता-पात V0 का परिकलन कीजिए।
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Chapter:
[3]26.

p-n संधि निर्माण के दौरान घटित होने वाले दो महत्वपूर्ण प्रक्रमों की संक्षेप में व्याख्या कीजिए।

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Chapter:
[1]27. (a) (i)

अपवर्तक टेलीस्कोप द्वारा प्रतिबिम्ब का बनना दर्शाने के लिए किरण-आरेख बनाइए।

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Chapter:
[1]27. (a) (ii)

अपवर्तक टेलीस्कोप सामान्य समंजन की स्थिति में कोणीय आवर्धन के लिए व्यंजक लिखिए।

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Chapter:
[1]27. (b)

दो कारण बताते हुए यह व्याख्या कीजिए कि परावर्तक टेलीस्कोप को अपवर्तक टेलीस्कोप पर वरीयता क्यों दी जाती है?

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Chapter:
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[1]28. (a)
उन दो प्रतिबंधों का उल्लेख कीजिए जिनके तहत पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है।
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Chapter:
[2]28. (b)

एक पारदर्शी पात्र में तीन अमिश्रणीय पारदर्शी द्रवों A, B एवं C की परतें विद्यमान हैं, जिनके अपवर्तनांक क्रमशः n, `3/4` n एवं `2/3` n हैं। A एवं B के अंतरापृष्ठ पर एक लेसर किरणपुंज θ कोण पर आपतित है जैसा चित्र में दर्शाया गया है। सिद्ध कीजिए कि θ के ऐसे सभी मानों के लिए जिन पर sin θ ≥ `2/3` हो यह किरणपुंज द्रव C में प्रविष्ट नहीं होगा।

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Chapter:
खण्ड - घ
[4]29.
गैल्वेनोमीटर का उपयोग किसी वैद्युत परिपथ में धारा के संसूचन अथवा/और लघु धाराओं के मापन के लिए किया जाता है। अनिवार्यतः यह इस तथ्य पर कार्य करता है कि किसी धारावाही कुंडली को जब चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो यह एक विक्षेपी बल-आघूर्ण का अनुभव करता है। कुंडली के विक्षेपण को मापा जा सकता है और यह कुंडली में प्रवाहित होने वाली धारा, कुंडली में फेरों की संख्या, कुंडली के क्षेत्रफल तथा चुम्बकीय क्षेत्र से संबंधित होता है। कुंडली से जुड़ी एक बालकमानी प्रतितुलन बल-आघूर्ण प्रदान करती है और विक्षेपण को मापने में सहायता करती है। उपयुक्त प्रतिरोधों का उपयोग करके गैल्वेनोमीटर को वांछित परिसर के ऐमीटर अथवा वोल्टतामापी में परिवर्तित किया जा सकता है।

(I) घूर्णन के दौरान कुंडली के अभिविन्यास में परिवर्तन के बावजूद इस पर लगने वाला बल-आघूर्ण अचर रहता है, इसके लिए उत्तरदायी है:

  1. मृदु-लोह क्रोड का उपयोग जो चुम्बकीय क्षेत्र में वृद्धि कर देता है।
  2. त्रिज्य चुम्बकीय क्षेत्र
  3. प्रतितुलन बल-आघूर्ण प्रदान करने वाली बालकमानी
  4. लोह क्रोड में उत्पन्न होने वाली भँवर-धाराएँ जो अवमंदनकारी होती हैं।

(II) किसी गैल्वेनोमीटर की धारा-सुग्राहिता में वृद्धि करनी हो तो इसका सबसे आसान तरीका है:

  1. कुंडली के फेरों की संख्या में वृद्धि करना।
  2. कुंडली का क्षेत्रफल तथा चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता बढ़ाना।
  3. कुंडली के क्षेत्रफल तथा चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता को कम करना।
  4. बालकमानी के मरोड़ी नियतांक में वृद्धि करना।

(III) किसी चलकुंडली गैल्वेनोमीटर की कुंडली का क्षेत्रफल 4.0 × 10−3 m2 तथा इसमें फेरों की संख्या 50 है। कुंडली 0.25 T के चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णन कर रही है। जब कुंडली में 5 A की धारा प्रवाहित होती है तो इस पर लगने वाला बल-आघूर्ण होता है:

  1. 1.0 N m
  2. 2.0 N m
  3. 0.50 N m
  4. 0.25 N m

अथवा

किसी गैल्वेनोमीटर की कुंडली का प्रतिरोध 15 Ω है और यह मीटर 3 mA धारा के लिए पूर्ण स्केल विक्षेपण दर्शाता है। इसको (0.12 V) परिसर के वोल्टतामापी में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक प्रतिरोध का मान है:

  1. 4015 Ω
  2. 3985 Ω
  3. 415 Ω
  4. 385 Ω

(IV) एक गैल्वेनोमीटर जिसकी कुंडली का प्रतिरोध 20 Ω है। 5 mA धारा प्रवाहित करने पर पूर्ण स्केल विक्षेपण दर्शाता है। इसको (0 − 10 A) परिसर के एमीटर में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक होगा कि ______ ।

  1. 0.05 Ω का प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जोड़ा जाए
  2. 0.05 Ω का प्रतिरोध पार्श्वक्रम में जोड़ा जाए
  3. 0.01 Ω का प्रतिरोध पार्श्वक्रम में जोड़ा जाए
  4. 0.01 Ω का प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जोड़ा जाए
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Chapter:
[4]30.

कोई शोधकर्ता दो धातुओं A एवं B का उपयोग करके प्रकाश वैद्युत प्रभाव संबंधी प्रयोग करती है जिनके कार्य-फलन उसे ज्ञात नहीं हैं। वह A एवं B के पृष्ठों को विभिन्न आवृत्तियों के एकवर्णी विकिरणों से दीप्त करती है और संगत निरोधी विभवों (Vs) के मान अभिलेखित करती है। धातुओं A एवं B के लिए आपतित विकिरणों की आवृत्ति (v) में परिवर्तन से निरोधी विभव (Vs) में होने वाले परिवर्तन ग्राफ चित्र में दर्शाए गए हैं।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

(I) ग्राफ बताता है कि A एवं B के कार्यफलन हैं: (h प्लांक नियतांक तथा e इलेक्ट्रॉन पर आवेश का मान है)

  1. v1 एवं v2
  2. V1 एवं V2
  3. hv1 एवं hv2
  4. `(h v_1)/e` एवं `(h v_2)/e`

(II) A एवं B के पृष्ठों पर आपतित विकिरण की आवृत्ति v > v2 हो तो उत्क्षिप्त इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज-ऊर्जा का मान ______

  1. धातु A के लिए अपेक्षाकृत अधिक होगा क्योंकि इसका कार्यफलन कम है।
  2. धातु B के लिए अपेक्षाकृत अधिक होगा क्योंकि इसका कार्यफलन अधिक है।
  3. धातु B के लिए अपेक्षाकृत अधिक होगा क्योंकि इसकी देहरी आवृत्ति का मान अधिक है।
  4. A और B दोनों के लिए समान होगा क्योंकि यह मान धातु के कार्यफलन पर निर्भर नहीं करता।

(III) यदि आपतित विकिरण की आवृत्ति नियत रखते हुए A और B दोनों ही धातुओं के लिए इनकी तीव्रता को दो गुना कर दिया जाए, तो ______

  1. समांतर रेखाओं की प्रवणता बढ़ जाएगी।
  2. समांतर रेखाओं की प्रवणता घट जाएगी।
  3. A एवं B दोनों के ही लिए देहरी आवृत्ति घट जाएगी।
  4. समांतर रेखाओं की प्रवणता में तो कोई अंतर नहीं पड़ेगा किंतु प्रति सेकंड अधिक इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होंगे।

(IV) किसी धात्विक पृष्ठ के लिए देहरी आवृत्ति v0 है। यदि 3v0 आवृत्ति के विकिरण इस पृष्ठ को प्रदीप्त करें तो उत्सर्जित फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा E1 है। यदि आवृत्ति को बढ़ाकर 6v0 कर दिया जाए तो फोटोइलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा E2 हो जाती है। `(E_1/E_2)` बराबर है:

  1. `1/3`
  2. `1/2`
  3. `2/5`
  4. `3/4`
अथवा

माना कि धातु B के लिए ग्राफ-रेखा की प्रवणता m है। यदि e इलेक्ट्रॉन पर आवेश का मान हो, तो प्लांक के नियतांक ‘h’ के लिए व्यंजक होगा −

  1. m e
  2. `1/(m e)`
  3. `m/e`
  4. `e/m`
Concept: undefined - undefined
Chapter:
खण्ड – ङ
[2.5]31. (i) (a)

किसी वैद्युत द्विध्रुव में दो बिंदु आवेश q, एवं −q 2a दूरी द्वारा पृथक्कृत हैं। इस द्विध्रुव के निरक्षीय तल में केंद्र से r दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर द्विध्रुव के कारण वैद्युत क्षेत्र `vecE` का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। किसी अत्यंत दूरस्थ बिंदु पर अर्थात् यदि r >> a हो तो इस वैद्युत क्षेत्र का व्यंजक लिखिए।

Concept: undefined - undefined
Chapter:
[2.5]31. (i) (b)

 कोई द्विध्रुव x-y समतल में इस प्रकार रखा गया है कि q एवं −q क्रमश: x = a एवं x = b पर अवस्थित हैं। इस क्षेत्र में एक वैद्युत क्षेत्र `vecE = 2hati N/C` विद्यमान है। द्विध्रुव पर लगने वाले बल `vecF` एवं बल-आघूर्ण `vec tau` का परिकलन कीजिए।

Concept: undefined - undefined
Chapter:
अथवा
[5]31. (ii)
  1. E1 एवं E2 वैद्युत वाहक बल के दो सेलों के जिनके आंतरिक प्रतिरोध क्रमशः r1 एवं r2 हैं। धन टर्मिनलों को एक साथ और ऋण टर्मिनलों को एक साथ जोड़कर इनका पार्श्वक्रम संयोजन किया गया है। संयोजन के तुल्य emf एवं तुल्य आंतरिक प्रतिरोध के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
  2. ऊपर (a) में उल्लिखित पार्श्वक्रम संयोजन में सेलों के emf E एवं 3 E तथा आंतरिक प्रतिरोध प्रत्येक का R है। इस संयोजन को 2 R प्रतिरोध से जोड़ा गया है। प्रतिरोध 2 R में प्रवाहित होने वाली धारा का परिकलन कीजिए।
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Chapter:
[2]32. (i) (a)

वक्रित गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन के संबंध का उपयोग करके लेंस मेकर सूत्र का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।

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Chapter:
[3]32. (i) (b)

तीन लेंस L1, L2 एवं L3 जिनमें से प्रत्येक की फोकस दूरी 40 cm है समाक्षीय रूप में रखे गए हैं। L1 एवं L2 एवं L3 के बीच की दूरियाँ क्रमशः 120 cm एवं 20 cm हैं। कोई वस्तु लेंस L1 के बाईं ओर 80 cm की दूरी पर रखी गई है।

इस लेंस संयोजन से बने अंतिम प्रतिबिंब की वस्तु से दूरी ज्ञात कीजिए।

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Chapter:
अथवा
[2.5]32. (ii) (a)

अवतल दर्पण के सामने इसके फोकस और वक्रता केन्द्र के बीच रखी किसी वस्तु का प्रतिबिंब निर्माण दर्शाने के लिए किरण आरेख बनाइए। इस आरेख का उपयोग करके दर्पण सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।

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Chapter:
[2.5]32. (ii) (b)

कोई अवतल दर्पण इसके सामने 10 m की दूरी पर रखी वस्तु का दो गुना आवर्धित आभासी प्रतिबिंब बनाता है। इस दर्पण की फोकस दूरी का परिकलन कीजिए।

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Chapter:
[1]33. (i) (a)

फैराडे का विद्युत-चुंबकीय प्रेरण संबंधी नियम लिखिए।

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Chapter:
[2]33. (i) (b)

l लम्बाई, A अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल और N फेरों वाली किसी लंबी वायु क्रोड युक्त परिनालिका के स्व-प्रेरण गुणांक के लिए व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।

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Chapter:
[2]33. (i) (c)

50 cm लंबाई की एक चालक छड़ जिसका एक सिरा कीलकित है, 60 rpm की कोणीय चाल से, 4.0 mT के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में घूम रही है जो छड़ के लम्बवत् है। छड़ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) ज्ञात कीजिए।

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Chapter:
अथवा
[1]33. (ii) (a) (1)

उच्चायी ट्रांसफॉर्मर का एक नामांकित आरेख बनाइए।

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Chapter:
[1]33. (ii) (a) (2)

उस सिद्धांत का कथन लिखिए जिस पर उच्चायी ट्रांसफॉर्मर कार्य करता है।

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Chapter:
[1]33. (ii) (a) (3)

दोनों कुंडलियों में फेरों की संख्या तथा धाराओं के पदों में द्वितीयक वोल्टता एवं प्राथमिक वोल्टता का अनुपात प्राप्त कीजिए।

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Chapter:
[2]33. (ii) (b)

किसी आदर्श ट्रांसफॉर्मर की प्राथमिक और द्वितीयक कुंडली के फेरों का अनुपात 1 : 5 है। यदि प्राथमिक कुंडली में 5 k W शक्ति 200 V पर निवेशित की जाती है, तो ज्ञात कीजिए:

  1. प्राथमिक कुंडली में धारा, तथा
  2. निर्गत वोल्टता
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