मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता ६ वी

रुपयों (नोट) पर लिखी कीमत कितनी और किन भाषाओं में अंकित है, बताओ।

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प्रश्न

रुपयों (नोट) पर लिखी कीमत कितनी और किन भाषाओं में अंकित है, बताओ।

टीपा लिहा
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उत्तर

क. यह ५० रुपए का नोट है।

ख. इस नोट की कीमत १७ भाषाओं में अंकित है। ये भाषाएँ हैं −

हिंदी अंग्रेजी आसामी बांग्ला उर्दू
गुजराती कन्नड़ कश्मीरी कोंकणी  
मलयालम मराठी नेपाली उड़िया  
पंजाबी संस्कृत तमिल तेलगू  
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उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.04: साेना और लोहा - साेना और लोहा [पृष्ठ ३९]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati [English] Standard 6 Maharashtra State Board
पाठ 2.04 साेना और लोहा
साेना और लोहा | Q (११) | पृष्ठ ३९

संबंधित प्रश्‍न

मैंने समझा अनमोल वाणी कविता से 


पूरी वर्णमाला क्रम से पढ़ो:

क्ष श य प त ट च क ए अ ञ ष र फ

थ ठ छ ख ऐ आ ज्ञ स ल ब घ ढ़ ई ॠ

द ड ज ग ओ इ श्र ह व भ ध ढ झ ऑ

ळ म न ण त्र ङ अं उ ड़ अः ऊ अँ औ


मैंने समझा शब्द संपदा पाठ से 


किसी दुकानदार और ग्राहक के बीच होने वाला संवाद लिखो और सुनाओ: जैसे - माँ और सब्जीवाली।


चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

____________


एक से सौ तक की उलटी गिनती पढ़ो और काॅपी में लिखो :


निम्नलिखित विषय पर लगभग 120 शब्दों में लघुकथा लिखिए।

आसमान में उड़ती पतंगें। देश को आजाद हुए 75 वर्ष हो गए। एक लंबा समय और हम अभी भी .........


दिए गए विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए :-

डिजिटल युग और मैं


निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:

“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

आपके विद्यालय की सैर का वर्णन करने वाला पत्र अपनी सहेली/अपने मित्र को लिखिए: (पत्र निम्‍न प्रारूप में हो।)


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